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मध्यप्रदेश :सबूत ना रहने के कारण कई बरी हुए 7 महीने में सांसद-विधायक से जुड़े 80 मामले सामने आए

मध्यप्रदेश :सबूत ना रहने के कारण कई बरी हुए 7 महीने में सांसद-विधायक से जुड़े 80 मामले सामने आए

मध्यप्रदेश के भोपाल में बने स्पेशल कोर्ट के पास सांसद और विधायक से जुड़े अभी तक 80 मामले सामने आ चुके हैं। हैरानी की बात तो ये है कि ये मामले बीते 7 महीने में ही सामने आए हैं। वहीं इन 7 महीनों में अब तक 8 विधायक तो ऐसे हैं जो बेदाग हो चुके हैं। इन 8 विधायकों में 3 भाजपा के हैं और 5 कांग्रेस के। ये विधायक सबूतों के अभाव में बरी हुए हैं। वहीं 50 मामलों की सुनवाई अभी भी जारी है।मध्यप्रदेश :सबूत ना रहने के कारण कई बरी हुए 7 महीने में सांसद-विधायक से जुड़े 80 मामले सामने आए

सुप्रीम कोर्ट के आदेश के बाद मार्च में स्पेशल कोर्ट गठित की गई थी। यूं तो स्पेशल कोर्ट में बहुत से विधायक-सांसद के केस चल रहे हैं। वहीं स्पीडी ट्रायल के द्वारा एक साल में जो केस खत्म किए जाने हैं उनमें राकेश सिंह और अशोक अर्गल का केस भी शामिल है। राकेश सिंह भाजपा के प्रदेशाध्यक्ष हैं और उन पर धार्मिक भावनाएं भड़काने, उपद्रव करने जैसे आरोपों में आईपीसी की धारा 153, 156 और 174 के तहत मुकदमा चल रहा है। वहीं अशोक अर्गल मुरैना के महापौर हैं। उनके खिलाफ 1997 से आपराधिक मानहानि से जुड़े दो मामले चल रहे हैं।

इन विधायकों के केस चल रहे हैं

जिन विधायकों के केस अभी चल रहे हैं उनमें कांग्रेस के जीतू पटवारी, राउ (इंदौर) सुखेंद्र सिंह बना, मऊगंज (रीवा) रमेश पटेल, बड़वानी निशंक कुमार जैन के नाम शामिल हैं।
 
वहीं इनमें भाजपा के गौरीशंकर बिसेन (बालाघाट), राजेंद्र शुक्ला (सतना), संजय पाठक (कटनी) अरुण भीमावद (शाजापुर), विजयपाल सिंह (सुहागपुर), गिरीश भंडारी (नरसिंहगढ़) और ऊषा ठाकुर (इंदौर) के नाम शामिल हैं।

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