Saturday , August 18 2018

पंजाब

बहिबलकलां पुलिस फायरिंग में पूर्व सीएम बादल व पूर्व डीजीपी सैनी भी फंसे

 बहिकलां बेअदबी के बाद प्रदर्शनकारियों पर पुलिस फायरिंग से हुई दो मौतों की जांच में पूर्व मुख्यमंत्री प्रकाश सिंह बादल व पूर्व डीजीपी सुमेध सिंह सैनी पर सीधी उंगली उठी है। पुलिस फायरिंग व प्रदर्शनकारियों को समझा पाने में नाकाम रहने तथा हालातों पर काबू पाने में विफल रहने के …

Read More »

खैहरा समर्थकों ने किया भगवंत मान का घेराव, की नारेबाजी

संदौड़ : आम आदमी पार्टी के विपक्ष के नेता सुखपाल खैहरा को उनके पद से हटाए जाने पर पार्टी वर्करों में पैदा हुआ रोष खत्म होने का नाम नही ले रहा। सुखपाल खैहरा के समर्थकों ने दिल्ली हाईकमान की हां में हां मिलाने वाले पार्टी नेताओं के खिलाफ रोष का इजहार …

Read More »

साले की प्रापर्टी हड़पने के लिए जीजा ने रच दी बड़ी साजिश, पूरा परिवार रह गया सन्न

सात अगस्त को लापता हुए डेरा बाबा नानक के गांव पड्डा के कुलजीत सिंह का शव शुक्रवार देर रात थाना घन्नियां के बांगर के अधीन आते गांव खोखर के खेतों में मिला। शनिवार को तहसीलदार मनजीत सिंह और पंजाब पुलिस के अधिकारियों की मौजूदगी में शव को गांव खोखर के …

Read More »

खैरा गुट ने ‘आप’ नेतृत्व को फिर दी चुनौती, सभी जिलों में नियुक्त किए अपने ऑब्जर्वर

आम आदमी पार्टी से बगावत करने वाले सुखपाल खैरा गुट ने एक बार फिर पार्टी को चुनौती दी है। पार्टी संगठन के समानांतर खैरा द्वारा गठित एडहॉक पीएसी ने सभी जिलों में अपने ऑब्जर्वर नियुक्त कर दिए। प्रेस कांफ्रेंस में खैरा ने कहा कि उनका गुट बठिंडा कन्वेंशन में पास …

Read More »

#बड़ा हादसा: हवाई पट्टी पर फिसला विमान दीवार से टकराया…

अबोहर से करीब 35 किमी दूर राजस्थान के गांव लालगढ़ जाटान में स्थित हवाई पट्टी पर मंगलवार शाम जयपुर से आया सुप्रीम एवियेशन का विमान उतरते समय अनियंत्रित होकर हवाई पट्टी के अंतिम छोर स्थित बाउंड्री वॉल से जा टकराया। यह टक्कर इतनी तेज हुई कि लगभग आधा विमान बाउंड्री …

Read More »

पंजाब आप में कलह तेज, खैहरा समेत 11 विधायकों ने दिखाए बगावती तेवर

पंजाब आम आदमी पार्टी की कलह और बढ़ गई है। आप नेतृत्‍व द्वारा नेता विपक्ष से हटाए गए सुखपाल सिंह खैहरा ने शुक्रवार को खुलकर अाक्रामक तेवर दिखाए। उन्‍होंने कंवर संधू सहित 11 विधायकों के साथ प्रेस कान्‍फेंस किया। उन्‍होंने इस तरह पार्टी नेतृत्‍व के खिलाफ खुली बगावत कर दी …

Read More »

बेहतर प्लेसमेंट के कारण चंडीगढ़ युवाओं की पहली पसंद,पर एडमिशन की डगर मुश्किल

डॉ. सुमित सिंह श्योराण/राजेश मलकानियां/रोहित कुमार]। पंजाब यूनिवर्सिटी और शहर के कॉलेजों में दाखिले की दौड़ शुरु हो चुकी है। पंसद के कॉलेज और स्ट्रीम में दाखिले के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 23 जून हैं। सीटों के मुकाबले आवेदन की संख्या कई गुणा होने से कम मेरिट वाले स्टूडेंट्स के लिए दिक्कतें खड़ी हो जाएंगी। पीयू और कॉलेजों में दाखिले में सबसे अधिक दिक्कत ट्राईसिटी से पंचकूला और मोहाली के स्कूलों से 12वीं पास करने वाले स्टूडेट्स को होगी। मोहाली और पंचकूला से स्कूल की पढ़ाई पूरी करने पर चंडीगढ़ के कॉलेज और पंजाब यूनिवर्सिटी ही पहली प्राथमिकता रहती है। लेकिन मोहाली और पंचकूला के स्टूडेंट्स को जनरल कोटे के तहत ही दाखिला मिलेगा। जनरल कोटे के तहत पीयू और कॉलेजों में सिर्फ मोहाली और पंचकूला के स्टूडेंट्स के लिए 15 फीसद सीटें ही रिजर्व होती हैं। दैनिक जागरण ने सप्ताह के मुद्दे के तहत कॉलेज और पीयू में दाखिले की दिक्कतों को समझा। चंडीगढ़ से डिग्री तो बेहतर करियर की उम्मीद एनसीसी, एनएसएस व यूथ फेस्ट की वेटेज दिलाएगी दाखिले की मेरिट लिस्ट में जगह यह भी पढ़ें स्कूल लेवल की पढ़ाई के लिए पंचकूला और मोहाली में अच्छे स्कूल हैं। हर साल सीबीएसई 10वीं और 12वीं में यहांं के स्कूलों के स्टूडेंट्स का शानदार रिजल्ट रहता है। 2018 में भी सीबीएसई,नीट और एम्स में पंचकूला के स्टूडेंट्स ही टॉपर रहे हैं। लेकिन, हायर एजुकेशन के लिए मोहाली और पंचूकला में कोई भी उच्च स्तर की यूनिवर्सिटी और कॉलेज नहीं है। जिस कारण यहां के स्टूडेंट्स पंजाब यूनिवर्सिटी और चंडीगढ़ के कॉलेजों में ही दाखिले को तव्वजो देते हैं। जॉब प्लेसमेंट की बात करें तो पीयू के यूबीएस, यूआइईटी, यूआइसीईटी और पेक जैसे संस्थानों से डिग्री के बाद 45 लाख तक सालाना पैकेज स्टूडेंट्स को मिलता है। स्कूलों की दादागीरी, दुकानों की भागीदारी : सेट ही खरीदना होगा, एक किताब या स्टेशनरी नहीं मिलेगी यह भी पढ़ें बीकॉम में दाखिला नहीं है आसान पीयू और शहर के कॉलेजों में बीकॉम में दाखिले के लिए सबसे अधिक मारामारी रहती है। 11 कॉलेजों में बीकॉम की 2300 सीटों के लिए 8 हजार से अधिक आवेदन आते हैं। इन सीटों में सिर्फ 15 फीसद सीटें ही चंडीगढ़ से बाहर के स्टूडेंट्स के लिए होती हैं। मोहाली और पंचकूला के स्कूलों से पढ़ने वाले स्टूडेंट्स को भी 15 फीसद कोटे में गिना जाता है। बीकॉम में जनरल कोटे के तहत 90 फीसद से अधिक कट ऑफ रहता है। 35 हजार से अधिक आवेदन चंडीगढ़ के 11 प्राइवेट और सरकारी कॉलेजों में विभिन्न कोर्स में दाखिले के लिए 23 जून आवेदन की अंतिम तिथि है। अभी तक 35 हजार से अधिक आवेदन करीब 23 हजार सीटों के लिए आ चुके हैं। शहर के कॉलेजों में प्रोफेशनल ही नहीं बीए जैसे कोर्स में भी दाखिले के लिए खासी मारामारी है। जनरल कोटे के तहत जीसीजी-11 जैसे कॉलेजों में 85 फीसद कट ऑफ रहता है। शहर के प्राइवेट कॉलेजों की बात करें तो एसडी-32 कॉलजे, एमसीएम-36 कालेज,डीएवी कॉलेज-10 और सरकारी कालेजों में जीसी-11, जीसीजी-11,जीसीजी-42,जीसी-46 और सेक्टर-50 स्थित कॉमर्स कॉलेज में दाखिले के लिए खूब मारामारी रहती है। चंडीगढ़ में बेहतर पढ़ाई और इंफ्रास्ट्रक्चर चंडीगढ़ के कॉलेज और यूनिवर्सिटी नार्थ रीजन ही नहीं देशभर के युवाओं की पहली पसंद है। स्मार्ट सिटी के कॉलेजों का बेहतरीन इंफ्रास्ट्रक्चर है। यहां के सरकारी कॉलेजों में भी देश के अन्य प्राइवेट इंस्टीट्यूट से बेहतर सुविधाएं हैं। प्राइवेट और सरकारी कॉलेजों की फीस लगभग एक समाना है। जबकि चंडीगढ़ के पेरीफेरी में पढऩे वाली यूनिवर्सिटी की फीस पीयू और कालेजों से कई गुणा अधिक है। देश भर की यूनिवर्सिटी और कॉलेजों में रैंकिंग भी काफी अच्छी है। इन कोर्स के लिए अधिक मारामारी, सीटों से कई गुणा आवेदन वैसे तो पंजाब यूनिवर्सिटी के किसी भी कोर्स में दाखिले के लिए कट ऑफ काफी अधिक रहती है। लेकिन पीयू के कुछ कोर्स के लिए सीटों के मुकाबले कई गुणा अधिक आवेदन आते हैं। पीयू स्थित यूनिवर्सिटी इंस्टीट्यूट ऑफ लीगल स्टडीज (यूआईएलएस) में पांच वर्षीय लॉ कोर्स की 240 सीटों के लिए 4034 स्टूडेंट्स ने आवेदन किया है। पीयू एमए इकोनॉमिक्स (इंटिग्रेटेड कोर्स ) पांच वर्षीय, तीन वर्षीय लॉ, एमए इंग्लिश के अलावा बीएससी केमिस्ट्री, एमएससी जूलोजी जैसे कोर्स में दाखिले के लिए सबसे अधिक कंपीटीशन रहता है। इंजीनियरिंग कोर्स के लिए यूआइईटी (640 सीटें), यूआइसीईटी (240सीटें) पहली पसंद हैं। पंचकूला में सिर्फ दो कॉलेज, यूनिवर्सिटी की मांग पंचकूला के युवाओं के लिए हायर एजुकेशन के बहुत अधिक विकल्प नहीं है। जिस कारण उन्हें चंडीगढ़ या दूसरे शहरों में जाना पड़ता है। पंचकूला शहर में सिर्फ दो कॉलेज हैं। जिसमें सेक्टर 1 में पोस्ट ग्रेजुएट गवर्नमेंट कॉलेज (कोएड) और 14 में गर्ल्स महाविद्यालय है। कालका और बरवाला में भी एक गवर्नमेंट कॉलेज है। काफी समय से पंचकूला में यूनिवर्सिटी बनाने को लेकर मांग उठती रही है, लेकिन सरकार की ओर से इस मामले में जमीनी स्तर पर अभी तक कोई कदम नहीं उठाया गया। मजबूरी में लेना पड़ता है दाखिला पंजाबी यूनिवर्सिटी नजदीक होने के चलते छात्र सबसे पहले चंडीगढ़ दाखिला लेने की कोशिश करते हैं, परंतु जब वहां सीट नहीं मिलती तो वापस पंचकूला का रुख कर लेते हैं। ज्यादातर छात्र बारहवीं कक्षा चंडीगढ़ से ही करते हैं, ताकि चंडीगढ़ के कॉलेजों में दाखिला मिलना आसान हो जाए। चंडीगढ़ से 12वीं करने वाले स्टूडेंट्स को पीयू और कॉलेजों में 85 फीसद रिजर्वेशन मिलता है। कॉलेजों में आवेदन का अंतिम दिन पंचकूला जिले के चारों कॉलेजों में डिग्री लेवल कोर्स के लिए ऑनलाइन एडमिशन प्रक्रिया शुरू हो चुकी है। 22 जून की रात 12 बजे तक विद्यार्थी आवेदन कर सकते हैं। स्टूडेंट्स घर बैठे भी ऑनलाइन आवेदन करना चाहते हैं, तो वह हरियाणा हायर एजुकेशन की वेबसाइट की मदद से एडमिशन के लिए आवेदन कर सकते हैं। कॉलेजों में एडमिशन एक जुलाई से शुरू हो जाएंगे। जिले के चारों कॉलेजों में बीकॉम की 1040 और बीए की 1320 सीटें है। घर बैठे भी कॉलेजों में एडमिशन के लिए ऑनलाइन आवेदन दे सकते हैं। एक जुलाई को पहली लिस्ट जारी होगी। मोहाली के एक मात्र कॉलेज को पीयू से जोडऩे का प्रयास जिला मोहाली में दो सरकारी कॉलेज हैं। एजुकेशन हब के तौर पर उभर रहे मोहाली में कई निजी विश्वविद्यालय और कॉलेज तो हैं, लेकिन अगर सरकारी कॉलेजों की बात की जाए तो डेराबस्सी व मोहाली में सिर्फ एक एक कॉलेज है। मोहाली के स्टूडेंट्स की प्राथमिकता भी चंडीगढ़ स्थित पंजाब यूनिवर्सिटी और कॉलेज में दाखिला रहता है। चंडीगढ़ में दाखिला नहीं मिलने पर ही स्टूडेंट मोहाली और डेराबस्सी के कॉलेज में दाखिले को प्राथमिकता देते हैं। पीयू से एफिलिएशन की हो रही मांग मोहाली स्थित सरकारी कॉलेजों को पीयू से एफिलिएशन की लंबे समय से मांग की जा रही है। इस संबंध में पंजाब सरकार को भी लिखा जा चुका है। कॉलेज की कुल स्टूडेंट्स की संख्या 1704 है, लेकिन स्टूडेंट्स से लेकर कॉलेज फैकल्टी तक चाहते है कि कॉलेज को पीयू से मान्यता मिल जाए। इसको लेकर मुख्यमंत्री तक को दो माह पहले ज्ञापन तक दिया जा चुका है। कॉलेज में एडमिशन का प्रोसेस पिछले तीन साल से ऑन लाइन ही किया जा रहा है। मोहाली सरकारी कॉलेज में एमए पंजाबी शुरू किया जा रहा है। चंडीगढ़ कॉलेजों के मुकाबले यहां पर स्ट्रीम चुनने (विषय) के लिए स्टूडेंट्स के पास काफी कम विकल्प हैं। इस कारण भी मोहाली के स्टूडेंट्स चंडीगढ़ के कॉलेजों को प्राथमिकता देते हैं। ये होती है स्टूडेंट्स को दिक्कतें कॉलेज प्रबंधन के अनुसार कॉलेज में आने वाले ज्यादातर स्टूडेंट्स ग्रामीण क्षेत्रों से है। उन्हें हर छोटे से छोटे काम के लिए पटियाला जाना पड़ता है। क्योंकि कॉलेज पटियाला यूनिवर्सिटी के साथ अटैच है। कॉलेज पीयू के साथ अटैच न होने के कारण स्टूडेंट्स चंडीगढ़ की ओर ज्यादा रूख करते है। जिसके चलते स्टूडेंट्स की संख्या पर भी असर पड़ता है। इस लिए कॉलेज प्रबंधन चाहता है कि जल्द से जल्द पीयू से मान्यता मिल जाए। क्या कहना है प्रिंसिपल का कॉलेज की प्रिंसिपल कोमल बरोका ने कहा कि मुख्यंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह से भरोसा मिला है कि कॉलेज को पीयू से जोड़ दिया जाएगा। हम चाहते है कि ऐसा हो जाएगा। अगर ऐसा हो गया तो चंडीगढ के कॉलेजों से बेहतर कॉलेज साबित होगा। कोमल ने कहा कि पशु पालन मंत्री बलबीर सिंह सिद्धू को भी कॉलेज के पटियाला यूनिवर्सिटी के साथ अटैच होने के कारण हो रही समस्याओं के बारे में बता दिया गया है। इस लिए प्रबंधन का प्रयास है कि इस साल पीयू से मान्यता मिल जाए।

डॉ. सुमित सिंह श्योराण/राजेश मलकानियां/रोहित कुमार]। पंजाब यूनिवर्सिटी और शहर के कॉलेजों में दाखिले की दौड़ शुरु हो चुकी है। पंसद के कॉलेज और स्ट्रीम में दाखिले के लिए आवेदन की अंतिम तिथि 23 जून हैं। सीटों के मुकाबले आवेदन की संख्या कई गुणा होने से कम मेरिट वाले स्टूडेंट्स …

Read More »

आप विधायक पर खनन माफिया का हमला, गंभीर हालत में पीजीआइ रेफर

यहां वीरवार को दोपहर बाद अाम अादमी पार्टी के विधायक अमरजीत सिंह संदोआ पर खनन माफिया के लाेगों ने हमला कर दिया। इससे वह घायल हाे गए अौर उनकी हाले गंभीर बताई जा रही है। वह सतलुज नदी के किनारे हो रहे रेत खनन का जायजा लेने पहुंचे थे। उनको इलाज के लिए रूपनगर के सिविल अस्‍पताल ले जाया गया और वहां से चंडीगढ़ पीजीआइ रेफर कर दिया गया। इस घटना से क्षेत्र में हड़कंप मच गया। जानकारी के अनुसार, रूपनगर के आम आदमी पार्टी के विधायक अमरजीत सिंह संदोआ काे सतलुज दरिया के किनारे अवैध रेत खनन की शिकायत मिली थी। अमरजीत जिले की बाइहारा खड्ड पर पहुंचे। इस दौरान मीडियाकर्मी भी उनके साथ थे। यहां पोक मशीनों से लगातर दरिया से रेत निकाली जा रही थी। सूचना मिलने पर माफिया के लोगों ने मशीनों को वहां से हटा दिया। हमले के बाद रूपनगर के सिविल अस्‍पताल में लाए गए आप विधायक अमरजीत सिंह संदोआ। जैसे ही विधायक रेत निकासी वाले स्थान पर पहुंचे तो डंडों और तेजधार हथियारों से लैस माफिया के लोगों ने उन पर हमला कर दिया। उनको उपचार के लिए तुरंत रूपनगर के सिविल अस्पताल लाया गया। बताया गया है कि हमले के दौरान एक पत्थर उनकी छाती में लगा। इससे उनकी हालत ज्यादा खराब हो गई। इस दौरान मीडिया कर्मियों के कैमरे छीनने की कोशिश भी की गई। अमरजीत सिंह संदोआ को चंडीगढ़ पीजीआइ ले जाते कर्मचारी। घटना की सूचना मिलने के बाद रूपनगर के एसएसपी राज बचन सिंह संधू भी पहुंचे आैर अमरजीत सिंह संदोआ से बातचीत की। रूपनगर के सिविल अस्‍पमाल में उनका प्रारंभिेक इलाज करने के बाद हालत गंभीर होने के कारण संदोआ को चंडीगढ़ पीजीआइ रेफर क‍र दिया गया।

यहां वीरवार को दोपहर बाद अाम अादमी पार्टी के विधायक अमरजीत सिंह संदोआ पर खनन माफिया के लाेगों ने हमला कर दिया। इससे वह घायल हाे गए अौर उनकी हाले गंभीर बताई जा रही है। वह सतलुज नदी के किनारे हो रहे रेत खनन का जायजा लेने पहुंचे थे। उनको …

Read More »

पंजाब में अवैध निर्माण पर वोट की सियासत, सिद्धू के हल्‍ला बोल से गर्माया मुद्दा

पंजाब में अवैध निर्माणों पर वोट की सियासत हो रही है और पहले भी होती रही है। लेकिन, अब स्‍थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के अवैध निर्माण के खिलाफ मुहिम से यह बड़ा मुद्दा बन गया है। पूरे राज्‍य में कोई शहर एेसा नहीं है जो अवैध निर्माण से अछूता हो। राज्‍य के जालंधर, अमृतसर, लुधियाना, पटियाला व बठिंडा नगर निगमों की सीमा के अंदर एक लाख से ज्यादा अवैध निर्माण किए गए हैं। आधिकारिक तौर पर निकाय विभाग के पास अवैध निर्माण से संबंधित उपलब्ध जानकारी में निगमों से जो रिपोर्ट सौंपी गई है उसमें अवैध निर्माण की संख्या आठ हजार के करीब है। हकीकत इसके विपरीत है। पांच महानगरों में हैं एक लाख से ज्यादा अवैध निर्माण अवैध निर्माण व उनके लिए जिम्मेवार अफसरों के खिलाफ कार्रवाई को लेकर निकाय मंत्री नवजोत सिद्धू अपनी ही पार्टी के विधायकों के निशाने पर आ गए हैं। महानगरों का नक्शा बिगाड़ने में अवैध निर्माण व अवैध कॉलोनियां जितनी जिम्मेदार हैं, उससे ज्यादा जिम्मेदार अधिकारियों, विधायकों व स्थानीय नेताओं का आपसी गठजोड़ भी है। पंजाब के शहरों को मिलेगा मीठा पानी, तीन शहरों में नहरी जल की सप्लाई यह भी पढ़ें यह पहला मौका नहीं है, जब किसी मंत्री ने अवैध निर्माण के खिलाफ कार्रवाई शुरू की हो, लेकिन हर सरकार के निकाय मंत्रियों का अभी तक का इतिहास यही कहता है कि हमेशा ही मंत्री को वोट व नोट के दबाव में अपना अभियान बीच में ही छोड़ना पड़ता है। इस बार सिद्धू के साथ क्या होगा, अभी कहना जल्दबाजी होगी। इतना तय है कि सिद्धू ने मधुमक्खी के छत्ते में हाथ डाल दिया है। हजार से ज्यादा अवैध कॉलोनियां और एक लाख 17 हजार से ज्यादा अवैध निर्माण ने महानगरों का नक्शा बिगाड़ कर रख दिया है। अवैध निर्माण पर हो रही है वोट की सियासत पंजाब सरकार चाहती है मोहाली में शुरू हो इन्फोसिस का कैंपस, नीलेकणी से मिले सिद्धू यह भी पढ़ें अभी तक केवल उन्हीं को अवैध निर्माण माना जा रहा है, जिनका नक्शा निगमों से पास नहीं करवाया गया है। हकीकत में 80 फीसदी से ज्यादा निर्माण अवैध हैं, क्योंकि नक्शे के हिसाब से मौके पर निर्माण करवाया ही नहीं गया है। उसे नगर निगम प्रशासन नजर अंदाज करके चल रहा है। खेमों में बंटी कांग्रेस अवैध कॉलोनियां व अवैध निर्माण रोजाना लाखों लोगों के लिए परेशानी का सबब भी बन रहे हैं। इसके बाद भी वोट व नोट की राजनीति इस बार भी हावी पड़ती नजर आ रही है। फिलहाल तो मामले को लेकर कांग्रेस सीधे तौर पर दो खेमों में बंटी नजर आ रही है। मामले का विरोध कर रहे कांग्रेसियों ने फिलहाल सीएम कैप्टन अमरिंदर सिंह व नवजोत सिद्धू के बीच चल रहे शीत युद्ध की आड़ में मुद्दे को दबाने की कवायद शुरू कर दी है। अभी तक सिद्धू के निशाने पर अवैध कमर्शियल निर्माण ही चल रहे हैं। इसके बाद बाकी का नंबर लगेगा। यह तय है कि अगर सिद्धू कारवाई से पीछे नहीं हटे तो दर्जनों निगम अफसरों का नपना व सरकार के खजाने का भरना तय है। शहरों का नक्शा बिगड़ा जालंधर, अमृतसर, पटियाला, लुधियाना व बठिंडा में बीते 20 सालों में हजारों की संख्या में बनी अवैध कॉलोनियों ने शहरों का नक्शा बिगाड़ कर रख दिया है। शहरों के इस अनियोजित विकास ने पेयजल की सप्लाई से लेकर सीवरेज, स्ट्रीट लाइट व सड़कों का बुरा हाल कर रखा है। चूंकि विधायक व मंत्री के कोटे से आने वाली धनराशि का इस्तेमाल लंबे समय से उक्त कॉलोनियों को सुविधाएं देने में खर्च हो रहा है। इसलिए नेता इसे अपने वोट बैंक के रूप में देखते हैं। कुछ जगहों पर नोट बैंक भी काम आ जाता है। नतीजतन जो धनराशि सरकारी खजाने में जानी चाहिए, वह अफसरों व चंद नेताओं की जेब में जा रही है। सेटेलाइट मैपिंग से सामने आएगी हकीकत सिद्धू ने हाल ही में महानगरों की सेटेलाइट मैपिंग के प्रोजेक्ट को क्लीनचिट दी है। प्रोजेक्ट पर अगले माह से काम शुरू होना है। तीन साल में महानगरों के एक-एक निर्माण के बारे में सारी जानकारी निकाय विभाग के पास होगी। कितने अवैध निर्माण हैं और कितने मंजूरशुदा, इसकी सारी जानकारी सेटेलाइट मैपिंग के बाद सामने आएगी। अभी तक इस बारे में निकाय विभाग के पास कोई पुख्ता जानकारी नहीं है। सब कमेटी ने बैठक में दे दी थी क्लीनचिट अवैध निर्माण को रेगुलर करने को मंत्रिमंडल की सब कमेटी की बैठक में अवैध निर्माण को तय फीस लेकर नियमित करने का फैसला किया गया था। सिद्धू भी कमेटी में हैं। बीते कुछ वर्षो में सैकड़ों ऐसे अवैध निर्माण हो गए हैं, जिनका नक्शा पास नहीं है। तय फीस लेकर उन्हें नियमित करने के फैसले की आड़ में बाकी के सभी प्रकार के अवैध निर्माण को लेकर कांग्रेसी ही सिद्धू पर दबाव बनाने पर जुटे हैं कि कार्रवाई न की जाए। ------- सिद्धू बोले- पिक्‍चर अभी बाकि है, लोगों के हित के लिए हो रही कार्रवाई अवैध निर्माणों पर कार्रवाई के कारण अपनी ही पार्टी कांग्रेस के नेताओं और विधायकों के निशाने पर अाए नवजाेत सिंह सिद्धू इस हमले से अविचलित हैं। सिद्धू का कहना है कि यह शुरूआत हुई है, पिक्चर तो अभी बाकी है। यह कार्रवाई लाेगों के हित के लिए हो रही है। एक बातचीत में सिद्धू ने कहा, अवैध निर्माण से पूरी कॉलोनी या मोहल्ले का नक्शा खराब हो जाता है। अवैध निर्माण एक नहीं कई समस्याओं को पैदा करता है, जिससे वहां रहने वाले लोग रोजाना परेशान होते हैं। यातायात समस्या, नालियों को जाम करने, रास्ताें को जाम करने, सड़क या गली के साथ-साथ शहर की नियोजित प्लानिंग को सीधी चुनौती देने वाले अवैध निर्माण हटाने से सरकार को नहीं बल्कि लोगों को ही फायदा है। सिद्धू ने कहा, मैंने पहले ही निगम अफसरों को चेतावनी दी थी कि ऑनलाइन नक्शे पास करने की सुविधा दी जा रही है। किसी को नक्शे पास करवाने के लि किसी अधिकारी को पैसे देने की जरूरत नहीं है। लोग ऑनलाइन नक्शे का आवेदन करें और उसे पास करवा कर निर्माण करवाएं। अफसरों को पहले ही कहा गया था मौके का दौरा करके देखा जाए कि किस इलाके में कितने अवैध निर्माण हैं। अवैध निर्माणों के लिए अफसर सीधे दोषी होंगे और उन पर कार्रवाई की जाएगी।

पंजाब में अवैध निर्माणों पर वोट की सियासत हो रही है और पहले भी होती रही है। लेकिन, अब स्‍थानीय निकाय मंत्री नवजोत सिंह सिद्धू के अवैध निर्माण के खिलाफ मुहिम से यह बड़ा मुद्दा बन गया है। पूरे राज्‍य में कोई शहर एेसा नहीं है जो अवैध निर्माण से …

Read More »

कर्नाटक मॉडल से कम हो सकती हैं पंजाब में किसान आत्महत्याएं

पंजाब सरकार यदि कृषि में कर्नाटक सरकार का मॉडल अपनाए, तो यहां किसान आत्महत्या की घटनाओं में कमी आ सकती है। आत्महत्या में कमी लाने और उन्हें उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाने के लिए चार साल पहले बनाए गए कर्नाटक एग्रीकल्चर प्राइस कमीशन ने अपना रंग दिखाना शुरू कर दिया है। पिछले चार वर्षों में किसानों पर कर्ज का तनाव कम हुआ है। यह दावा है कर्नाटक स्टेट एग्रीकल्चर प्राइस कमीशन के चेयरमैन डॉ. टीएन प्रकाश का। -कर्नाटक एग्रीकल्चर प्राइस कमीशन के चेयरमैन डॉ. टीएन प्रकाश से विशेष बातचीत वह दो दिन तक चंडीगढ़ में चली डायलॉग हाईवे की नेशनल कांफ्रेंस में हिस्सा लेने के लिए आए थे। जागरण ने उनसे किसानों में बढ़ रही आत्महत्या की प्रवृत्ति और उनकी समस्याओं के समाधान को लेकर चर्चा की। डॉ. प्रकाश ने बताया कि कर्नाटक सरकार ने इस ओर कदम उठाया है। किसानों को समय पर उनकी फसलों का उचित मूल्य न मिलने से ही उन पर कर्ज का बोझ बढ़ता है। फिर इस कर्ज को उतारने की चिंता में ही वह आत्महत्या जैसा कदम उठाते हैं। अमरिंदर सरकार को भाया पाकिस्तानी मॉडल, खेती में करेगी नया प्रयोग यह भी पढ़ें डॉ. प्रकाश ने बताया कि कर्नाटक सरकार ने 2014 में स्टेट प्राइस कमीशन का गठन किया था। इसमें हम फसलों की कीमत सुनिश्चित करते हैं और अगर खुले बाजार में कीमत उससे नीचे जाती है, तो फसल की खरीद सरकार करती है। इसके लिए एक पोर्टल बनाया गया है और पूरे राज्य के किसानों को इस पोर्टल के जरिए फसल की कीमत बताई जाती है, ताकि वे इससे नीचे न बेचें। यह भी पढ़ें: आखिरी बार सफाई दे रहा हूं, 2020 रेफरेंडम का समर्थन नहीं किया: खैहरा महिलाएं थामेंगी कृषि की कमान, खेती को दिलाएंगी नया मुकाम यह भी पढ़ें कमीशन के चेयरमैन ने बताया कि रौंगी, ज्वार, तुअर की दाल, सुपारी, धान समेत दस फसलें हैं, जिनकी कीमत राज्य सरकार तय करती है और कीमत गिरने पर अपनी कीमत पर उसकी खरीद करती है। उन्होंने बताया कि इस सारी खरीदी गई फसलों को राज्य सरकार की विभिन्न स्कीमों के तहत विभागों को बेच दिया जाता है, जिससे सरकार पर इसका बोझ नहीं पड़ता। यह है मॉडल डॉ. प्रकाश ने बताया कि जेलों, आंगनबाड़ी केंद्रों, मिड-डे-मील सहित तमाम सरकारी संस्थानों में बनने वाले खाने में राज्य सरकार की ओर से खरीदे गए खाद्यान्न का इस्तेमाल किया जाता है। मार्केट में जैसे ही सरकार फसलों की खरीद शुरू करती, वैसे ही व्यापारी अपना दाम बढ़ा देते हैं और किसानों को उनकी फसल का वाजिब दाम मिलने लगता है। यह भी पढ़ें: दर्द में डूबी जिंदगी में खुशियों के कुछ पल, ...आैर खिल उठे थके चेहरे यह पूछे जाने पर कि आखिर इसके लिए पैसा कहां से आता हैए उन्होंने बताया कि एपीएमसी एक्ट के अधीन 1.5 फीसद सैस मंडियों में बिकने वाली फसल पर लगाया है, जिससे सरकार को 1500 करोड़ रुपये से ज्यादा की आमदनी होती है। इस राशि को इसी गैप फंडिंग के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। व्यापारियों का नेक्सस नहीं बनता डॉ. प्रकाश ने कहा कि राज्यों के लिए यह फॉर्मूला बहुत अच्छा है, क्योंकि इससे बाजार में व्यापारियों पर नेक्सस न बनाने का दबाव बना रहता है। उन्हें मालूम है कि अगर सरकार ने खरीद कर ली, तो उसे तय दाम से ज्यादा ही अदा करने होंगे। यह भी पढ़ें: यहां मिलता है अद्भूत बूटा प्रसाद, इससे कई पीढि़यां होंगी निहाल प्रसिद्ध एग्रो अर्थशास्त्री दविंदर शर्मा ने भी डॉ. प्रकाश के इस दावे की वकालत की है कि अगर सरकार पंजाब में धान के अलावा वैकल्पिक फसलों को गैप फंडिंग देना शुरू कर दे, तो धान का रकबा कम होने लगेगा। खुद सरकार की अपनी आटा-दाल योजना में सरकार को दालों की जरूरत है। इन्हें प्रमोट करके सरकार खरीद करके इस योजना को चलाए। इसी तरह जेलों में भी दालों की जरूरत होती है।

पंजाब सरकार यदि कृषि में कर्नाटक सरकार का मॉडल अपनाए, तो यहां किसान आत्महत्या की घटनाओं में कमी आ सकती है। आत्महत्या में कमी लाने और उन्हें उनकी फसलों का उचित मूल्य दिलाने के लिए चार साल पहले बनाए गए कर्नाटक एग्रीकल्चर प्राइस कमीशन ने अपना रंग दिखाना शुरू कर …

Read More »
E-Paper

Powered by themekiller.com anime4online.com animextoon.com apk4phone.com tengag.com moviekillers.com