Tuesday , December 11 2018

CBI के अफसरों ने लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) में मार दिया छापा

सीबीआई के 60 सदस्यों की आठ टीमों ने मंगलवार को उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) में छापा मार दिया। व्यापक पैमाने पर हुई छापेमारी के दौरान सीबीआई ने कई महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त कर लिए। सीबीआई की अलग-अलग टीमों ने कई अनुभागों में गहनता से जांच-पड़ताल की।

सीबीआई की यह कार्रवाई चार से पांच दिनों तक चलने की उम्मीद जताई जा रही है। इससे आयोग में हड़कंप की स्थिति है। सीबीआई की टीम सुबह 11 बजे के आसपास एसपी राजीव रंजन के नेतृत्व में आयोग पहुंची। डिप्टी एससी और एएसपी के नेतृत्व में सीबीआई के कुल 60 सदस्यों की अलग-अलग आठ टीमों ने आयोग के विभिन्न अनुभागों में छापा मार दिया।

टीमों ने अनुभागों में रखे दस्तावेजों की गहनता से जांच-पड़ताल शुरू कर दी। इस बीच आयोग के कुछ अफसरों और कर्मचारियों से पूछताछ भी की गई। सूत्रों का कहना है कि सीबीआई ने मौके से उन दस्तावेजों को जब्त कर लिया है, जो आयोग से मांगे गए थे लेकिन आयोग ने संबंधित दस्तावेज सीबीआई को नहीं दिए थे।

इसके अलावा सीबीआई ने पूर्व में आयोग से मिले दस्तावेजों का वहां रखे अभिलेखों से मिलान भी कराया और पड़ताल की कि आयोग ने जो अभिलेख उपलब्ध कराए हैं, वे सही हैं या नहीं। इनकी चार्ट फाइलिंग भी की जा रही है। सीबीआई के एसपी राजीव रंजन शाम को कैंप कार्यालय लौट आए लेकिन बाकी टीमें देर रात तक आयोग में डटी रहीं और जांच-पड़ताल जारी रही।

हर टीम को अलग जिम्मेदारी

आयोग के विभिन्न अनुभागों में छापा मारने वालीं सीबीआई की सभी आठों टीमों के निशाने पर पीसीएस परीक्षा-2015 ही है। सूत्रों के मुताबिक सभी टीमें इस परीक्षा से जुड़े अभिलेख ही खंगाल रही हैं। इसके अलावा पूर्व अध्यक्ष अनिल यादव के कार्यकाल में हुईं कुछ अन्य बड़ी परीक्षाओं के अभिलेख और सीधी भर्तियों से जुड़े अभिलेख भी सीबीआई टीम ने खंगाले।

अन्य अभिलेखों की भी सघन जांच की जा रही है।जांच के लिए सीबीआई की आठ टीमें बनाई गईं हैं और सबको अलग-अलग जिम्मेदारी सौंपी गई है। कोई टीम मॉडरेटर का पता लगाने में जुटी है तो किसी को इंटरव्यू की पड़ताल करने को कहा गया है।

इसी तरह स्केलिंग, पेपर सेटिंग आदि की जांच भी अलग-अलग टीमें कर रही हैं। यह भी पता लगाया जा रहा है कि भर्ती परीक्षाओं के पेपर कहां सेट हुए और मॉडरेशन की आड़ में किस व्यक्ति ने पीसीएस परीक्षा-2015 में अभ्यर्थियों को मिले नंबरों से छेड़छाड़ की।

 
 
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