कोरोना काल में उपभोक्ताओं को राहत, यूपी में लगातार दूसरे साल भी नहीं बढ़ी बिजली दरें

लखनऊ

कोरोना महामारी के दौर में लगातार दूसरे साल यूपी के बिजली उपभोक्ताओं को राहत दी गयी है।
उत्तर प्रदेश राज्य विद्युत नियामक आयोग ने लगातार दूसरे साल बिजली दरें न बढ़ाने का फैसला किया है। इतना ही नहीं आयोग ने किसानों को भी राहत दी है। किसानों को अपने ट्बवेल पर बिजली का भुगतान पुरानी दरों के हिसाब के ही करना होगा। आयोग ने बिजली कंपनियों के 10 से 12 फीसदी तक रेगुलेटरी सरच्राज लगाने का प्रस्ताव भी खारिज कर दिया है। आयोग ने अपने आदेश में कहा है कि स्मार्ट मीटर पर आने वाले सभी खर्च को उपभोक्ताओं को नही देना होगा।
आयोग ने बिजली कम्पनियों के स्लैब परिवर्तन व रेगुलेटरी असेट को पूरी तरह से अस्वीकार करते हुये खारिज कर दिया। वहीं वर्ष 2021-22 व ट्रू-अप 2019-20 के लिये बिजली कम्पनियों द्वारा निकाली गयी भारी भरकम धनराशि को समाप्त कर दिया गया है। बिजली कंपनियों की ओर से 10 से 12 प्रतिशत रेगुलेटरी सरचार्ज लगवाने के लिए नियामक आयोग में रेगुलेटरी असेट के रूप में 49827 करोड़ रुपये दाखिल कर दिया गया था। जिसे विद्युत नियामक आयोग द्वारा उचित मानते हुए बिजली कम्पनियो के प्रस्ताव को खारिज कर दिया गया।
नए टैरिफ आदेश के मुताबिक ग्रामीण किसानों के टयूबबेल पर मीटर लग जाने की दशा में भी उनसे अनमीटर्ड 170 रूपये प्रति हार्स पावर की दर से ही वसूली की जायेगी। नियामक आयोग की ओर जारी टैरिफ के बाद राज्य उपभोक्ता परिषद ने बिजली दरों में कमी के लिए पुनर्विचार याचिका दायर करने का फैसला किया है। परिषद अध्यक्ष अवधेश वर्मा के मुताबिक बिजली कंपनी पर उपभोक्ताओ का अब तक कुल निकले लगभग 20559 करोड़ रुपये के एवज में कमी का मुद्दा उठाया जाएगा।
गुरुवार को उत्तर प्रदेश की पांचो बिजली कम्पनियो मध्यांचल पूर्वांचल दाक्षिरान्चल पक्षिमांचल एवं केस्को की ओर से वर्ष 2021-22 के लिये दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्कता व टैरिफ प्रस्ताव सहित स्लैब परिवर्तन आज विद्युत नियामक आयोग चेयरमैन आर पी सिंह व सदस्यों केके शर्मा और वीके श्रीवास्तव की पूर्ण पीठ ने अपना फैसला सुनाते हुये यह आदेश जारी कर दिया है कि इस वर्ष बिजली दरों में कोई भी बदलाव नही किया जायेगा वर्तमान में लागू टैरिफ ही आगे जारी रहेगा।
टैरिफ आदेश में आयोग ने फैसला किया है कि ग्रामीण किसानों के निजी टूयूबबेल पर मीटर भले लग जाये लेकिन अब उनसे वसूली एलएमवी 5 की फिक्स राशि 170 रुपये प्रति हार्स पावर प्रति माह की दर पर ही होगी। उपभोक्ता परिषद अध्यक्ष वर्मा ने बताया कि आयोग ने प्रदेश के उपभोक्ताओ का ही बिजली कम्पनियो पर कुल लगभग 1059 करोड़ रुपया सरप्लस निकाल दिया है। वहीं प्रदेश के उपभोक्ताओ का बिजली कम्पनियो पर पहले भी कुल लगभग 19537 करोड़ रुपये उदय योजना का और ट्रू अप में निकला था अब सब मिलाकर देखा जाय तो प्रदेश के उपभोक्ताओ का बिजली कम्पनियो पर कुल लगभग रुपया 20596 करोड़ रुपया सरप्लस हो गया है बहुत जल्द ही उपभोक्ता परिषद् पूरी टैरिफ का अध्यन कर उपभोक्ताओ की बिजली दरों में कमी के लिए पुनर्विचार याचिका दाखिल करेगा। अवधेश वर्मा ने आज के आदेश को उपभोक्ताओं की बड़ी जीत बताया है।

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