जन समस्याओं का त्वरित निस्तारण करें अधिकारी: मुख्यमंत्री

-मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने मुख्य सचिव और डीजीपी को दिए सख्त निर्देश

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जनसमस्याओं के त्वरित निस्तारण के निर्देश दिए हैं। उन्होंने मुख्य सचिव और डीजीपी को निर्देश दिए हैं कि वह खुद निगरानी रखें। प्रदेश के किसी भी जिले में अवैध टैक्सी स्टैंड, बस स्टैंड, रिक्शा स्टैंड संचालित नहीं होंगे। स्थानीय प्रशासन की जवाबदेही होगी। इसके साथ ही सभी विकास प्राधिकरणों को अपनी वर्तमान और भावी कार्ययोजना तैयार करने को कहा गया है।

मुख्यमंत्री आदित्यनाथ ने बुधवार को एक उच्चस्तरीय बैठक के दौरान कहा कि मुख्य सचिव और पुलिस महानिदेशक यह सुनिश्चित करें कि जिलाधिकारी, पुलिस कप्तान जनसमस्याओं के त्वरित और संतुष्टिपरक समाधान के प्रति संवेदनशील रहें। आमजन के प्रार्थना पत्रों का समयबद्ध ढंग से निस्तारण हो। जिलाधिकारी, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक, पुलिस अधीक्षक, स्थानीय जनप्रतिनिधियों से सतत संवाद कर मार्गदर्शन लेते रहें। उद्योग बंधु की बैठक नियमित अंतराल पर हो।

उन्होंने कहा कि जल जीवन मिशन परियोजनाओं का समयबद्ध और गुणवत्तापूर्ण क्रियान्वयन सुनिश्चित कराया जाए। जल जीवन मिशन के कार्यों की कृषि उत्पादन आयुक्त के स्तर पर समीक्षा की जाए। प्रदेश के किसी भी जिले में अवैध टैक्सी स्टैंड, बस स्टैंड, रिक्शा स्टैंड संचालित नहीं होंगे। जहां कहीं भी ऐसी गतिविधियां संचालित हो रही हों, उन्हें तत्काल बंद कराया जाए। यह स्थानीय प्रशासन की जिम्मेदारी है कि आमजनता को पार्किंग की स्थायी जगह उपलब्ध कराए। अब तक इस सम्बंध में हुई कार्यवाही की विस्तृत रिपोर्ट मुख्यमंत्री कार्यालय को उपलब्ध कराई जाए।

मुख्यमंत्री ने कहा कि समेकित प्रयासों से प्रदेश में जीएसटी संग्रह में सतत बढ़ोतरी हो रही है। इसे और बेहतर करने की जरूरत है। अधिकाधिक व्यवसायी जीएसटी में अपना पंजीयन कराएं। इसके लिए व्यवसायियों को प्रोत्साहित किया जाए। राजस्व संग्रह को बढ़ाने और व्यवसायी बंधुओं को सुविधा के लिए तकनीक का भी उपयोग किया जाना चाहिए।

विकास प्राधिकरणों की कार्यशैली में व्यापक सुधार अपेक्षित है। सभी विकास प्राधिकरण अपनी वर्तमान और भावी कार्ययोजना तैयार करें। अतिशीघ्र मुख्यमंत्री कार्यालय द्वारा इसकी समीक्षा की जाएगी। आईजीआरएस, सीएम हेल्पलाइन जनता की समस्याओं के निदान का अच्छा माध्यम बन कर उभरा है। इसके प्रकरण लंबित न रहें। इनकी हर कार्यालय में सतत समीक्षा होनी चाहिए। निस्तारित प्रकरणों की शासन स्तर से रैंडम जांच कराई जाए। शिकायतकर्ताओं से सीधा संवाद कर उनकी संतुष्टि का स्तर पूछा जाए।

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