डॉ. डी नागेश्वर रेड्डी अमेरिकन सोसायटी ऑफ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एंडोस्कोपी (एएसजीई) से सर्वोच्च सम्मान पाने वाले पहले भारतीय डॉक्‍टर

लखनऊ, 26 मई  देश के सबसे बड़े सुपर स्पेशियलिटी अस्पतालों में से एक , एआईजी अस्पताल के चेयरमैन  डॉ. डी नागेश्वर रेड्डी को द अमेरिकन सोसायटी ऑफ गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एंडोस्कोपी (एएसजीई) ने प्रसिद्ध रुडोल्फ वी. शिंडलर पुरस्कार दिया है। एएसजीई दरअसल जीआई एंडोस्कोपी की दुनिया में शीर्ष संस्थाओं में से एक है।  एक वर्चुअल समारोह में एएसजीई  के वार्षिक क्रिस्टल अवार्ड्स में डॉ. रेड्डी को यह पुरस्कार प्रदान किया गया। रुडोल्फ वी. शिंडलर अवार्ड दरअसल प्रतिष्ठित क्रिस्टल अवार्ड्स में सर्वोच्च श्रेणी है,  जिसका नाम डॉ. शिंडलर के नाम पर रखा गया है और जिन्हें गैस्ट्रोस्कोपी का जनक माना जाता है। डॉ. डी नागेश्वर रेड्डी एंडोस्कोपी के क्षेत्र में अपने उत्‍कृष्‍ट कार्यों के लिए एएसजीई से यह उल्‍लेखनीय मान्यता प्राप्त करने वाले पहले भारतीय डाक्टर  बन गए हैं।  

डॉ. क्लाउस मर्जनर, प्रेसिडेंट, एएसजीई ने डॉ. रेड्डी को रुडोल्फ वी. शिंडलर पुरस्कार प्रदान करते हुए कहा, एएसजीई का सर्वोच्च सम्मान उस सदस्य को दिया जाता है, जिन्‍होंने एंडोस्कोपिक अनुसंधान, शिक्षण में कई उपलब्धियां हासिल कर रखी हैं, और जीआई एंडोस्कोपी के क्षेत्र में जिनकी सेवा सही मायनों में डॉ. शिंडलर के मानकों और परंपराओं की एक उत्‍कृष्‍ट मिसाल है।

इस अवसर पर डॉ. डी नागेश्वर रेड्डी, ने कहा, एएसजीई के रुडोल्फ वी. शिंडलर पुरस्कार प्राप्त करना दुनिया भर, यहां तक कि विकासशील देशों के सभी एंडोस्कोपिस्टों के लिए भी एक उत्‍कृष्‍ट प्रमाण है कि कड़ी मेहनत और समर्पण भाव से किए जाने वाले कार्यों को इस सोसायटी द्वारा अवश्‍य ही सराहा जाता है, चाहे वे कहीं भी अपनी सेवाएं दे रहे हों।

इस पुरस्कार से नवाजे जाने से पहले डॉ. रेड्डी ने एक और विशिष्ट उपलब्धि हासिल की है। दरअसल, डॉ. रेड्डी को हाल ही में प्रतिष्ठित अमेरिकन एसोसिएशन फॉर द एडवांसमेंट ऑफ साइंस (एएएएस) के अनेक नवनिर्वाचित फेलो की सूची में शामिल किया गया है। डॉ. रेड्डी पिछले 100 वर्षों में एएएएस की फेलोशिप प्राप्त करने वाले पहले भारतीय डॉक्‍टर हैं।  एएएएस दुनिया की सबसे बड़ा वैज्ञानिक सोसाइटी है और अपनी अनेक विज्ञान पत्रिकाओं के माध्यम से अत्याधुनिक शोध का एक प्रमुख प्रकाशक है।

डॉ रेड्डी के अनुसंधान का मुख्य क्षेत्र जी.आई. एंडोस्कोपी में,  विशेषकर चिकित्सीय पैनक्रिएटिक बिलीएरी एंडोस्कोपी में एवं ट्रांसगैस्ट्रिक एंडोस्कोपिक सर्जरी में नवाचार करने में रहा है।  जी.आई. एंडोस्कोपी में एक विशेषज्ञ के रूप में अब तक उन्‍होंने राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय समकक्ष समीक्षा पत्रिकाओं में 670 से भी अधिक शोध-पत्र प्रकाशित करके अपने गहन ज्ञान को साझा किया है, गैस्ट्रोएंटरोलॉजी की 20 अंतर्राष्ट्रीय पाठ्यपुस्तकों में अनेक अध्यायों का योगदान दिया है, और  8 जी.आई. एंडोस्कोपी पाठ्य पुस्तकों को संपादित किया है। वह गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एंडोस्कोपी, डाइजेस्टिव एंडोस्कोपी, वर्ल्ड जर्नल ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, वर्ल्ड गैस्ट्रोएंटरोलॉजी न्यूज और गैस्ट्रोएंटरोलॉजी टुडे, पेटेंट्स ऑन मेडिकल इमेजिंग और गैस्ट्रो-हेप डॉट कॉम के संपादकीय बोर्ड के एक हिस्से के रूप में चिकित्सा क्षेत्र में आगे और भी योगदान दे रहे हैं। वह लैंसेट, गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल एंडोस्कोपी, वर्ल्ड जर्नल ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, जर्नल ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी एंड हेपेटोलॉजी, और इंडियन जर्नल ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी सहित अनेक प्रसिद्ध पत्रिकाओं के प्रख्यात समकक्ष समीक्षकों में से एक हैं।

डॉ रेड्डी को अब तक भारत सरकार की ओर से प्राप्‍त पद्म भूषण एवं पद्म श्री पुरस्कार, भारतीय चिकित्सा परिषद की ओर से बी सी रॉय पुरस्कार, एएसजीई की ओर से मास्टर एंडोस्कोपिस्ट पुरस्कार,  वर्ष 2011 में एएसजीई इंटरनेशनल लीडरशिप अवार्ड और फेलो ऑफ अमेरिकन कॉलेज ऑफ गैस्ट्रोएंटरोलॉजी, विश्व गैस्ट्रोएंटरोलॉजी संगठन का सर्वोच्च अवार्ड मास्टर और एशिया एंडोस्कोपी मास्टर्स फोरम द्वारा दिया गया एंडोस्कोपी ग्रैंड मास्टर जैसे अहम अवार्ड मिल चुके हैं।

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