दशहरी पर फिर एक बार कोरोना कहर, नहीं मिल रहे खरीददार

Our Bureau
Lucknow, May 18


लगातार दूसरे साल कोरोना के कहर ने उत्तर प्रदेश के आम उत्पादकों की कमर तोड़ दी है। लाकडाउन और विदेशों में न के बराबर मांग के चलते बीते साल प्रदेश के आम कारोबारियों को 1000 करोड़ रुपये का घाटा सहना पड़ा था। कारोबारियों को इस साल भी घाटे की ही उम्मीद नजर आ रही है। ठीक फसल के मौके पर लगे लाकडाउन ने बागवानों के चेहरे की रौनक गायब कर दी है।
देश दुनिया में अपने स्वाद और खुश्बू के लिए मशहूर उत्तर प्रदेश के फल पट्टी क्षेत्र मलिहाबाद के दशहरी आम अगले हफ्ते से तैयार होने लगेगा पर खरीददार लापता हैं। कच्ची दशहरी की तोड़ाई 20 मई से शुरु होगी और पाल रखकर पकाने के बाद पहली जून से इसकी बाजार सजेगी। शौकीनों को जून के पहले हफ्ते में पाल तो दूसरे हफ्ते से डाल की पकी दशहरी खाने को मिलेगी। हालांकि इस बार भी कारोबारियों के पास बाहर के आर्डर काफी कम हैं। इसके अलावा इस बार मौसम के बदलाव ने भी दशहरी के उत्पादकों को परेशान कर रखा है।
मलिहाबाद के आम उत्पादक नफीस बताते हैं कि अबकी बार समय से पहले दशहरी के पेड़ों में बौर आयी और फिर वो जल्दी ही खराब हो गयी। इसके अलावा आम में कीड़े भी लगे। उनका कहना है कि इन सबके बाद भी आम की फसल इस बार पहले के मुकाबले महज दस से पंद्रह फीसदी ही घटी है। दशहरी की कीमतों को लेकर उनका कहना है कि बाहरी राज्यो व विदेशों से कम मांग रहने के चलते इस बार सभी की पहुंच में आम रहेगा और कीमत पिछले साल जितनी ही रहेगी।
राजधानी लखनऊ के प्रमुख आम कारोबारी हसीब अहमद का कहना है कि इस साल फल पट्टी क्षेत्र काकोरी-मलिहाबाद में करीब एक चौथाई बाग बिके ही नहीं हैं। हालांकि 75 फीसदी बाग पिछले साल का सीजन खत्म होते ही बिक गए थे। फल पट्टी क्षेत्र में बड़े कारोबारी बागवानों से सीधे पूरे बाग की एडवांस में खरीद कर लेते हैं। बाद में फल तोड़ाई और उन्हें बेंचने का काम करते हैं। हसीब के मुताबिक बड़े बागों को तो पहले ही खरीददार मिल गए थे पर छोटे बागों के लिए खरीददार आमतौर अप्रैल के महीने आते हैं। इस बार अप्रैल में कोरोना की दूसरी लहर आने के चलते छोटे बागवानों के पास खरीददार ही नहीं आए।
आम कारोबारी फौजान अल्वी का कहना है कि उम्मीद है कि इस बार शुरुआती दिनों में दशहरी के रेट 40 से 60 रुपये किलो पर खुल सकते हैं पर बाद में इनकी कीमतें गिरेंगी। उनका कहना है कि मलिहाबाद से सबसे ज्यादा दशहरी आम दिल्ली के लिए जाता है और उम्मीद है कि एक जून को मंडी के लगने के समय लाकडाउन में ढील दे दी जाएगी जिससे कारोबार कुछ सुधरेगा। विदेशों को बीते कुछ सालों से दशहरी की खासी तादाद निर्यात हो रही थी पर बीते साल कोरोना के चलते इनमें कमी आयी थी। कारोबारियों को कहना है कि इस बार अभी तक निर्यातकों ने मलिहाबाद की ओर रुख नहीं किया है। अब सारी उम्मीदें इस बात पर टिकी है कि जून में कोरोना क्या रंग दिखाता है और लाकडाउन खत्म होता है कि नहीं।

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