संपादकीय : नई फिल्म सिटी

दुनिया में भारतीय सिनेमा जगत को साल-दर-साल सबसे ज्यादा फिल्में देने का श्रेय हासिल है। फिल्म निर्माण की संख्या के मामले में हॉलीवुड काफी पीछे है। बॉलीवुड का सफर अब से करीब एक सदी पहले शुरू हुआ था। मुंबई के साथ ही कोलकाता और देश के अन्य प्रदेशों में भाषाई फिल्म उद्योग का विकास हुआ। धीरे-धीरे ये सभी अपने चरम तक पहुंची, लोकप्रियता हासिल की, नये-नये प्रयोग हुए और नए-नए कलाकार पैदा हुए। भारतीय सिनेमा में बॉलीवुड का जितना योगदान है, उसी के आसपास भाषाई फिल्मी दुनिया का भी रहा है। चाहे वह भोजपुरी, पूर्वांचल की ही फिल्मी दुनिया क्यों न हो। मगर भाषाई फिल्मी कलाकारों का जीवन तभी सार्थक माना जाता, जब वह बॉलीवुड में डुबकी लगा ले। बॉलीवुड ने यह मुकाम यूं ही हासिल नहीं किया। इसके पीछे कई महान कलाकारों, निर्देशकों, निर्माताओं, कहानीकारों, गीतकारों, तकनीशियनों, कैमरामैंनों, जूनियर कलाकारों की कड़ी मेहनत रही है। बॉलीवुड युवाओं के लिए प्रेरक रहा है। इसे भारतीय समाज का ट्रेंड सेटर कहा जा सकता है। मगर जीवन में एक समय आता है लोकप्रियता के शिखर को छोड़ना होता है। ऐसा ही वक्त शायद बॉलीवुड के सामने आ गया है। एक के बाद एक कई मामले हुए जिन्होंने बॉलीवुड को घाव पहुंचाए। अंडरवर्ल्ड से लेकर कास्टिंग काउच और ड्रग से लेकर खेमेबाजी तक के आरोप लगे। जिससे दर्शकों के मन में उसके प्रति विरक्ति आई। लोगों ने अनुभव किया कि दुनिया की कौन सी ऐसी बुराई है, जिसका नाम बॉलीवुड से जुड़ा नहीं। इन्हीं हालात को देखते हुए उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्य नाथ ने देश की राजधानी नई दिल्ली के करीब फिल्म सिटी बसाने जिम्मा उठाया है। इसका व्यापक समर्थन हो रहा है। तमाम फिल्मी हस्तियों का कहना है कि उनके मन की मुराद पूरी हो रही है।

प्रदेश सरकार को यमुना एक्सप्रेस वे के किनारे और जेवर अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डे के करीब जमीन मिल चुकी है। यमुना एक्सप्रेस वे औद्योगिक विकास प्राधिकरण के सेक्टर-21 में डेडिकेटेड इंफोटेनमेंट जोन यानी फिल्म सिटी बनाने का कार्य शुरू हो चुका है। मुख्यमंत्री योगी ने मंगलवार को फिल्मी जगत से इस बारे में राय-मशविरा किया। सबने अपने सुझाव दिए, सरकार ने इन पर गौर करने का आश्वासन दिया। मुख्यमंत्री ने ‘पूर्ण’ फिल्म सिटी का उपहार देने का वचन दिया। साथ ही उन्होंने फिल्म हस्तियों के सुझाव और अनुभवों के आधार पर वैश्विक फिल्म जगत को एक नया विकल्प देने की मंशा भी जताई। इस फिल्म सिटी में अगले 50 वर्ष की जरूरतों को ध्यान ध्यान रखा जाएगा। एक हजार एकड़ जमीन में से 35 एकड़ में फिल्म सिटी पार्क बनेगा। हाई कैपेसिटी, वर्ल्ड क्लास डाटा सेंटर की स्थापना की जाएगी। इसके अलावा 220 एकड़ भूमि कमर्शियल एक्टिविटी के लिए अलग से रखी जाएगी। सरकारी शुल्क माफ करने पर विचार किया जा रहा है। इस इलाके को मेट्रो, रैपिड रेल ट्रांसपोर्ट सिस्टम और हाई स्पीड ट्रेन से भी जोड़ने की योजना है। यह तो हकीकत है कि मुंबई के फिल्मी जगत का विकल्प वहीं के लोग तलाश रहे हैं। थोड़ी सी भी सुविधा मिलते ही बॉलीवुड का विकल्प बनते देर नहीं लगेगी। आज के दौर में स्टूडियो का आकार छोटा हो गया है। कैमरे का साइज और तकनीशियनों का दल काफी सिकुड़ चुका है। बैकग्राउंड में दूर-दराज की लोकेशन का चित्र लगा कर एक औसत क्षमता वाले हॉल में फिल्म की शूटिंग की जा रही है। ऐसे में उत्तर प्रदेश और केंद्र सरकार को सिर्फ इसमें एक उत्प्रेरक की भूमिका निभानी है और उन्हें यहां एक स्वच्छ वातावरण उपलब्ध करा देना है। यह जगत परिवर्तनशील है, पसंद बदलती है, तकनीक बदल जाती है। यह समाज विकल्प का स्वागत हर मोड़ पर करता है।

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