12 या फिर 13 नवंबर… यहां जानिए धनतेरस और नरक चतुर्दशी की सही तिथि

धनतेरस के दिन से अगले पांच दिनों तक दीपावली का त्‍योहार मनाया जाता है। लेकिन हर बार की तरह ये त्‍योहार इस बार सिर्फ चार दिन का ही होने वाला है। दरअसल धनतेरस के अगले दिन नरक चतुर्दशी (छोटी दीपावली) मनाई जाती है। इस बार लोग धनतेरस और नरक चतुर्दशी की तिथि को लेकर कन्‍फ्यूज हैं। आइए आज हम आपकी ये कन्‍फ्यूजन दूर करने की कोशिश करते हैं…

धनतेरस

दरअसल इस साल कृष्ण त्रयोदशी 12 नवंबर यानी गुरुवार की रात 9.31 पर शुरू होगी जो 13 नवंबर को शाम 5:00 बजे तक रहेगी। इसलिए उदया तिथि और प्रदोष काल के कारण धनतेरस का त्योहार 13 नवंबर यानी शुक्रवार के दिन ही मनाना बेहद शुभ रहेगा।

वहीं नरक चतुर्दशी के त्योहार को नरक चौदस या रूप चौदस के नाम से जाना जाता है। नरक चतुर्दशी दिवाली से एक दिन पहले मनाई जाती है इसलिये कई लोग इसे छोटी दिवाली भी कहते हैं। बता दें कि इस बार नरक चतुर्दशी और दि‍वाली एक दिन ही पड़ रहे हैं।

दरअसल 13 नवंबर यानी शुक्रवार की शाम से चतुर्थी तिथि लगेगी, जो 14 नवंबर यानी शनिवार को दोपहर 2:21 मिनट तक रहेगी। उदया तिथि के हिसाब से 14 नवंबर को ही नरक चतुर्दशी का त्यौहार मनाया जायेगा। चतुर्दशी तिथि को सूर्योदय से पूर्व स्नान करने की परंपरा है। इस दिन स्नान करने का शुभ मुहूर्त सुबह साढ़े पांच बजे से पौने छह बजे तक रहेगा।

ज्‍योतिषियों के मुताबिक, चतुर्दशी तिथि 14 नवंबर को दोपहर 2 बजकर 21 मिनट तक रहेगी और उसके बाद अमावस्या तिथि शुरु हो जाएगी, जो 15 नवंबर को सुबह 10 बजकर 39 मिनट पर समाप्त होगी। यही वजह है कि इस साल 14 नवंबर को एक ही दिन चतुर्दशी और दिवाली दोनों मनाई जाएगी।

वहीं ज्‍योतिषियों का कहना है कि जो लोग नरक चतुर्दशी का व्रत करते हैं, उन्हें इस बार धनतेरस के दिन यानी 13 नवंबर को ही व्रत रखना चाहिए, क्योंकि ये व्रत उसी दिन रखा जाता है जिस दिन से ये तिथि प्रारंभ होती है।

पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, नरक चतुर्दशी के मृत्यु के देवता यमराज की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि इस दिन यमराज की पूजा करने से अकाल मृत्यु से मुक्ति मिलती है। इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने नरकासुर नामक राक्षस का वध किया था, तब से इस दिन को नरक चतुर्दशी कहा जाता है। इस दिन यम का दीपक जलाने की भी परंपरा है।

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