Chanakya Niti : इन दो लोगों पर गलती से भी न आजमाए जुबान की ताकत

Chanakya Niti

आचार्य चाणक्य (Chanakya Niti) ने मनुष्य को प्रभावित करने वाली हर चीज का बहुत ही सूक्ष्मता से अध्ययन किया था। उन्‍होंने अपने अनुभव और अध्ययन के आधार पर जो कुछ भी सीखा और समझा, उसे उन्‍होंने अपनी चाणक्य नीति में दर्ज कर दिया। चाणक्य नीति में बताई गई बातें व्यक्ति के जीवन के हर पहलू को बहुत ही गहराई से स्पर्श करती हैं। आज का ये विचार जुबान पर आधारित है।

जुबान पे रखें नियंत्रण | Chanakya Niti

चाणक्य के अनुसार हमेशा बोलते वक्त इस बात का ध्यान रखना चाहिए कि आप किसके सामने और क्या बोल रहे हैं। जुबान की ताकत बहुत तेज और ताकतवर होती है। जिस तरह से धनुष से निकला बाण वापस नहीं लिया जा सकता ठीक उसी तरह जुबान से निकले शब्द वापस नहीं लिए जा सकते हैं। इसीलिए बोलने से पहले हमेशा इस बात को ध्यान में रखना चाहिए कि आपके सामने कौन हैं।

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बिना सोचे समझे न बोलें | Chanakya Niti

कई बार असल जिंदगी में देखा गया है कि लोग जब बोलने पर आते हैं तो उनके निशाने पर माता पिता भी आ जाते हैं। वो अपने माता पिता को भी बिना सोचे समझे जो मन में आए बोल देते हैं और ये बात उनके लिए तकलीफ दायक हो सकता है। लेकिन उस वक्त वो अपनी जुबान को अपने कंट्रोल में करने की अपेक्षा अपनी जुबान की ताकत को और आजमाते हैं। अगर आप भी किसी ऐसे व्यक्ति को जानते हैं या फिर खुद ऐसा करते हैं तो संभल जाए।

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जुबान की ताकत | Chanakya Niti

मनुष्य को अपनी जुबान की ताकत माता पिता पर भूल कर भी आजमानी नहीं चाहिए। ऐसा मनुष्य उस वक्त तो अपने गुस्से में अंधा हो चुका होता है। उसे सही और गलत का अहसास नहीं होता। लेकिन जब उसका गुस्सा ठंडा होता है और गलती का अहसास होता है तो वक्त और जुबान से निकले शब्द दोनों ही वापस लाना मुश्किल है। ऐसा करने वाला मनुष्य पाप का भोगी होता है। इसी वजह से आचार्य चाणक्य ने कहा है कि अपनी जुबान की ताकत कभी भी अपने माता पिता पर मत आजमाओ, जिन्होंने तुम्हें बोलना सिखाया है।

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