एसजीपीजीआई का 38वां स्‍थापना दिवस आज, 1983 में आज ही के दिन रखी गई थी नींव

लखनऊ। उत्‍तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ के रायबरेली रोड पर स्थित संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) 14 दिसंबर को अपना 38 वां स्थापना दिवस मना रहा है। साल 1983 में इसी दिन तत्कालीन राष्ट्रपति डॉ. नीलम संजीवा रेड्डी द्वारा इसकी नींव रखी गई थी।

एसजीपीजीआई

बता दें कि एसजीपीजीआई में यही वह अवसर होता है, जब संस्थान द्वारा रोगी सेवा, शिक्षण, प्रशिक्षण और शोध के क्षेत्र में प्राप्त उपलब्धियों को सम्मानित किया जाता है। स्थापना दिवस समारोह कोविड प्रोटोकॉल को अपनाते हुए हाइब्रिड मोड में आयोजित किया जाएगा।

कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश शासन के मुख्य सचिव एवं संस्थान के अध्यक्ष, आई.ए.एस. राजेंद्र कुमार तिवारी समारोह के मुख्य अतिथि होंगे। संस्थान के निदेशक प्रोफ़ेसर आर. के. धीमन अतिथियों का स्वागत करेंगे और संस्थान के पिछले 1 वर्ष की उपलब्धियों का लेखा जोखा प्रस्तुत करेंगे।

इस वर्ष का स्थापना दिवस व्याख्यान असम के कछार हॉस्पिटल एवं रिसर्च केंद्र के निदेशक एवं पद्मश्री प्रोफेसर रवि कन्नन द्वारा प्रस्तुत किया जाएगा। प्रोफेसर रवि कानन ने चेन्नई के किलपॉक मेडिकल कॉलेज से प्रशिक्षण प्राप्त किया व दिल्ली के मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज से सर्जिकल प्रशिक्षण भी पूर्ण किया।

उन्होंने करीमगंज, डूमा, हसाओ व अन्य जिलों में सेटेलाइट सेंटर स्थापित किए हैं, जिससे ऐसे रोगियों को उसी स्थान पर उपचार प्राप्त हो सके। उनके इन सराहनीय कार्यों के लिए उन्हें 2013 में महावीर पुरस्कार व 2020 में पद्मश्री पुरस्कार से सम्मानित किया गया है। डाक्टर कन्नन वीडियो कांफ्रेंसिग के द्वारा हमसे जुड़ेंगे।

शोध के क्षेत्र में उत्कृष्ट कार्यों के लिए 15 शोध वैज्ञानिकों को सम्मानित किया जाएगा। राज्य के मुख्य सचिव आरके तिवारी उन्हें यह पुरुस्कार प्रदान करेंगे। साथ ही संस्थान परिवार के अन्य सदस्यों को विभिन्न श्रेणियों में डॉक्टर (डी एम, एमसीएच, एम डी) स्टाफ नर्स व तकनीशियन को उनके सराहनीय कार्यों के लिए सम्मानित किया जाएगा। चिकित्सा शिक्षा के प्रमुख सचिव आलोक कुमार भी इस दौरान मौजूद रहेंगे। संस्थान के डीन प्रो अनीश श्रीवास्तव द्वारा कार्यक्रम का समापन होगा।

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