
बरेली। शरद पूर्णिमा के पावन अवसर पर सोमवार को शहर में भगवान महर्षि वाल्मीकि की 132वीं प्रकटोत्सव शोभायात्रा धूमधाम और हर्षोल्लास के साथ निकाली गई। सिटी सब्जी मंडी स्थित प्राचीन भगवान महर्षि वाल्मीकि मंदिर, तकिया काले शाह से शुरू हुई शोभायात्रा में श्रद्धालुओं का जनसैलाब उमड़ पड़ा। भगवान वाल्मीकि के जयकारों और डीजे पर बज रहे भजनों से पूरा वातावरण भक्तिमय हो गया। शोभायात्रा में आकर्षक झांकियां लोगों के बीच विशेष आकर्षण का केंद्र बनी हुई हैं।
शरद पूर्णिमा के अवसर पर तकिया काले शाह स्थित प्राचीन भगवान महर्षि वाल्मीकि मंदिर से शोभायात्रा की शुरुआत हुई। महर्षि भगवान वाल्मीकि शोभायात्रा प्रबंधन समिति के अध्यक्ष अंशु आर्य के नेतृत्व में निकली यात्रा में बड़ी संख्या में महिलाएं, बच्चे, युवा और बुजुर्ग शामिल हुए। शोभायात्रा बिहारीपुर और बरेली कॉलेज चौराहा क्षेत्र से होकर आगे बढ़ी। शाम को नॉवेल्टी चौराहे पर श्रद्धालुओं का जबरदस्त उत्साह देखने को मिला। जगह-जगह स्वागत के लिए खड़े लोगों ने पुष्पवर्षा की। शोभायात्रा में शामिल श्रद्धालु भगवान वाल्मीकि के जयकारे लगाते हुए आगे बढ़ते रहे। डीजे पर ‘जो बोले सो निर्भय बोल, प्रभु वाल्मीकि की जय’ भजन बजा तो युवा खुद को थिरकने से नहीं रोक सके। भजनों की धुन पर झूमते युवाओं के साथ महिलाएं और बच्चे भी उत्साह में डूबे नजर आए। भगवान वाल्मीकि के जयकारों से पूरा इलाका गूंजता रहा।
मुस्लिम समाज ने दिया धर्म रथ, माता सीता और लव-कुश की झांकी बनी आकर्षण
शोभायात्रा का सबसे खास पहलू धार्मिक सद्भाव की तस्वीर रही। सर्वधर्म एकता समिति के माध्यम से मुस्लिम समाज के लोगों ने लगातार दूसरे वर्ष धर्म रथ उपलब्ध कराया। इस रथ पर माता सीता और लव-कुश का सुंदर स्वरूप सजाया गया। एक ओर भगवान वाल्मीकि के जयकारे गूंज रहे थे, तो दूसरी ओर मुस्लिम समाज के लोग आयोजन में सहयोग कर भाईचारे का संदेश दे रहे थे। इस पहल की श्रद्धालुओं और आयोजन समिति ने सराहना की।
फूलों की बारिश के बीच बढ़ता रहा काफिला, जगह-जगह लगे स्वागत शिविर
शोभायात्रा के रास्ते में जगह-जगह स्वागत का सिलसिला चलता रहा। कहीं फूलों की बारिश हुई तो कहीं श्रद्धालुओं के लिए जलपान की व्यवस्था की गई। बिहारीपुर से लेकर शहर के प्रमुख चौराहों तक धार्मिक और सामाजिक संगठनों ने स्वागत शिविर लगाए। कालीबाड़ी क्षेत्र में भी शोभायात्रा के स्वागत में लोगों ने उत्साह दिखाया। पूर्व सांसद प्रवीण सिंह ऐरन, पूर्व महापौर सुप्रिया ऐरन, अनीश बेग, राजेश अग्रवाल, पार्षद समर्थ मिश्रा, डॉ. पवन सक्सेना और मोहम्मद दारा एडवोकेट समेत कई लोगों ने स्वागत कार्यक्रमों में भागीदारी की। भाजपा, सपा, कांग्रेस, बसपा और अन्य संगठनों से जुड़े लोग भी आयोजन में शामिल हुए।
भाजपा से लेकर सपा तक के नेता पहुंचे, एक मंच पर दिखे जनप्रतिनिधि
शोभायात्रा की शुरुआत के दौरान राजनीतिक दलों की सीमाएं भी टूटती नजर आईं। कैंट विधायक संजीव अग्रवाल, शहर विधायक डॉ. अरुण कुमार, सांसद धर्मेंद्र कश्यप, सांसद छत्रपाल गंगवार, राज्यसभा सांसद श्रुति गंगवार, पार्थ गौतम, राष्ट्रीय सफाई कर्मचारी आयोग की सदस्य डॉ. सुषमा गोढ़ियाल और अनुसूचित जाति एवं जनजाति आयोग के सदस्य उमेश कठेरिया समेत कई जनप्रतिनिधि पहुंचे। पूर्व मंत्री शहजिल इस्लाम और अताउर रहमान भी कार्यक्रम में शामिल हुए। सभी ने अंशु आर्य के नेतृत्व में शोभायात्रा को हरी झंडी दिखाकर रवाना किया।
बैंड-बाजे, घोड़े और बग्गियां भी बनीं आकर्षण
शोभायात्रा को भव्य बनाने के लिए समिति ने धार्मिक झांकियों के साथ बैंड, घोड़े और बग्गियों की भी व्यवस्था की थी। आयोजन से पहले समिति अध्यक्ष अंशु आर्य ने बताया था कि शोभायात्रा दोपहर एक बजे सिटी सब्जी मंडी स्थित प्राचीन वाल्मीकि मंदिर से शुरू होकर शहर के विभिन्न मार्गों से गुजरने के बाद वापस मंदिर पहुंचेगी। शोभायात्रा के ब्रह्मपुरा सद्भावना मेला स्थल पहुंचने पर मेला अध्यक्ष मनोज थपलियाल की ओर से स्वागत कार्यक्रम रखा गया है। यहां विभिन्न क्षेत्रों से आई झांकियों का सम्मान किया जाना है। समिति अध्यक्ष अंशु आर्य की ओर से आकर्षक झांकियों को पुरस्कार देकर सम्मानित करने की तैयारी है। इसके बाद शोभायात्रा का समापन किया जाएगा।
अंशु आर्य की अगुवाई में जुटी टीम, देर तक चलता रहा उत्सव
भव्य आयोजन के पीछे महर्षि भगवान वाल्मीकि शोभायात्रा प्रबंधन समिति के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं की सक्रिय भागीदारी रही। मीडिया प्रभारी एडवोकेट अंकित आर्य, महासचिव अंकुश आर्य, उपाध्यक्ष देवेश आर्य, शिशुपाल कठेरिया, हरवंश सिंह, हरि सिंह वरदान, हरिश बाबू वाल्मीकि, पार्षद अजय रत्नाकर, अभिजीत कठेरिया गोलू, राहुल वाल्मीकि, विजय वाल्मीकि और उमेश आर्य समेत अन्य पदाधिकारी व्यवस्थाओं में जुटे रहे। कार्यक्रम का संचालन एडवोकेट अमरीश कठेरिया ने किया। अध्यक्ष अंशु आर्य ने कहा कि शोभायात्रा का उद्देश्य महर्षि वाल्मीकि के आदर्शों को जन-जन तक पहुंचाने के साथ समाज में एकता और भाईचारे को मजबूत करना है।



