ऑनलाइन एजुकेशन यानि संभावनाओं के नये द्वार

Anand Agnihotri

वरिष्ठ पत्रकार – आनन्द अग्निहोत्री

आपदाएं आती हैं, विनाश करती हैं और चली जाती हैं, लेकिन कोरोना ऐसी महामारी है, जो पूरी दुनिया पर छायी हुई है। फिलहाल इससे निजात पाने का कोई रास्ता नजर नहीं आता। हमें इसी के बीच सावधानी के साथ जीना है और विकास का नया सफर भी तय करना है। विकास के लिए सबसे अनिवार्य तत्व है शिक्षा। वैसे तो जीवन का शायद ही कोई क्षेत्र हो, जिसे कोरोना ने प्रभावित न किया हो। रोजगार हो, उद्योग हों, व्यापार और कारोबार हो, सभी बुरी तरह प्रभावित हुए हैं। लेकिन जो क्षेत्र सर्वाधिक प्रभावितों की श्रेणी में है, वह है शिक्षा। संयुक्त राष्ट्र शैक्षणिक, सांस्कृतिक और वैज्ञानिक संगठन यूनेस्को की रिपोर्ट की मानें तो कोरोना से भारत में करीब 32 करोड़ विद्यार्थियों की शिक्षा प्रभावित हुई है।

इनमें 15.81 करोड़ लड़कियां हैं और 16.25 करोड़ लड़के। पूरी दुनिया पर नजर डालें तो 193 देशों के 157 करोड़ छात्रों की शिक्षा कोरोना से प्रभावित हुई है। कोरोना समाप्त हो जाये तब भी इस अवधि का असर तो छात्रों के भविष्य पर पड़ेगा ही। लेकिन कहते हैं न कि हर बुराई के पीछे भी कुछ न कुछ अच्छाई छिपी रहती है। परंपरागत शिक्षा प्रभावित हुई, लेकिन आनलाइन शिक्षा के द्वार भी खुले। अब किसी भी देश का विद्यार्थी अपने इच्छित देश के शिक्षण संस्थान से मनचाहे विषय में बिना किसी बाधा के आनलाइन शिक्षा हासिल कर सकता है।

कोरोना काल में लाकडाउन रहा, स्कूल, कालेज और सभी शिक्षण संस्थान बंद कर दिये गये, लेकिन हमेशा के लिए तो पूरे देश को लाक नहीं किया जा सकता न। हालांकि कोरोना का संकट समाप्त नहीं हुआ, लेकिन अब चरणबद्ध ढंग से सभी क्षेत्र अनलाक किये जा रहे हैं। जिन देशों में लाकडाउन लागू किया गया, तकरीबन सभी देशों में यही प्रक्रिया अपनायी जा रही है। हां हर चरण के साथ भारत सरकार एक गाइड लाइन जरूर जारी करती है। शिक्षा के क्षेत्र में भी यही किया जा रहा है।

सरकार ने सभी स्कूल-कालेज 15 अक्टूबर से खोलने के लिए कह दिया है, लेकिन इसके लिए विशेष गाइड लाइन भी जारी की है कि स्कूल, कालेजों को विद्यार्थियों के लिए क्या-क्या अनिवार्य व्यवस्थाएं करनी होंगी। इनमें मुख्य रूप से सोशल डिस्टेंसिंग और सेनिटाइजेशन पर जोर दिया गया है। सरकार ने तो गाइड लाइन जारी कर अपने कर्तव्य की इतिश्री कर ली परन्तु इस बात पर गौर नहीं किया गया कि क्या सभी स्कूल-कालेज अनिवार्य रूप से गाइड लाइंस के अनुरूप व्यवस्थाएं कर पायेंगे। यहां भी बात सरकारी और निजी स्कूलों की आती है। माना कि सरकार अपने स्कूलों के लिए पर्याप्त व्यवस्थाएं कर देगी, लेकिन निजी स्कूल कितनी व्यवस्थाएं कर पायेंगे।

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निजी स्कूल-कालेजों में ही विद्यार्थियों की संख्या ज्यादा होती है। एक-एक कक्षाओं के कई-कई सेक्शन होते हैं, हर सेक्शन छात्र-छात्राओं से खचाखच रहता है। ऐसे में कैसे सोशल डिस्टेंसिंग का पालन हो पायेगा। अध्यापक कैसे विद्यार्थियों को शिक्षा प्रदान कर पायेंगे।

कोरोना ने जो भयावह स्थिति उत्पन्न की है, वह बेहद खौफनाक है। ऐसे में अभिभावक तो अपने बच्चों को स्कूल भेजने के पक्ष में ही नहीं हैं। अपने बच्चों के प्रति उनके मन में भय बैठ गया है। बच्चे स्कूल नहीं जाएंगे तो शिक्षा कैसे हासिल करेंगे। भले ही सरकार बच्चों को अगली कक्षा में प्रमोट कर दे, लेकिन इस अवधि में मिलने वाली शिक्षा से तो वे वंचित रह ही जायेंगे। दूसरा मुद्दा फीस का है।

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अभिभावकों का कहना है कि जब शिक्षा ही नहीं मिली तो फीस कैसी। फीस नहीं मिली तो इस अवधि का वेतन निजी स्कूल शिक्षकों को कहां से देंगे। बड़ी कशमकश की स्थिति है। सरकार पर दबाव है कि वह इन स्कूलों को फीस माफ करने के लिए कहे। स्कूल हैं कि अपनी जिद पर अड़े हैं। अब इनका संचालन कैसे शुरू हो। केवल यह कह देने भर से दायित्व का निर्वाह नहीं हो जाता कि 15 अक्टूबर से स्कूल खोले जा सकते हैं। स्कूल खुलने भी लगे तो बच्चे कैसे पहुंचेंगे, स्कूलों में गाइडलाइंस का पालन हो रहा है या नहीं, इसे देखने की भी व्यवस्था करनी होगी।

शायद यही कारण है कि अभिभावक अपने नौनिहालों को स्कूल भेजने पर रजामंद नहीं हो रहे हैं। हां बड़े कालेजों और तकनीकी शिक्षण संस्थानों ने जरूर इसे लागू किया है। जब तक विधिवत इन कालेजों में क्लास शुरू नहीं हो जातीं तब तक आनलाइन शिक्षण दिया जा रहा है। इसमें कुछ अनुचित भी नहीं। कभी दूरस्थ शिक्षा को नियमित शिक्षा की तुलना में दूसरे दर्जे की शिक्षा माना जाता था, लेकिन कोरोना काल ने तो आनलाइन एजुकेशन को श्रेष्ठ व्यवस्था में ला खड़ा किया है। आनलाइन एजुकेशन लीजिये, आनलाइन परीक्षा दीजिये, आनलाइन सर्टिफिकेट लीजिये, यानि कालेज जाने के झंझट से मुक्ति।

सवाल इस बात का है क्या भारत में आनलाइन एजुकेशन की वह गुणवत्ता रह पायेगी, जो विदेशों में होती है। अपवादों की बात छोड़ दीजिये, सामान्यत: कालेजों, खासकर निजी कालेजों में किस श्रेणी के शिक्षक होते हैं और शिक्षा ग्रहण करने वालों का रवैया क्या होता है, यह किसी से छिपा नहीं है। तमाम निजी कालेज ही किस श्रेणी के हैं, इस पर भी विचार करने की जरूरत है।

जितनी बड़ी संख्या में इन्हें मान्यता प्रदान की गयी है, यह अपने आप में विचारणीय है। जो भी हो, कोरोना काल ने कम से कम आनलाइन शिक्षा प्रणाली तो शुरू ही करा दी है। शिक्षा के क्षेत्र में संभावनाओं के नये द्वार खोले हैं। एक नयी शिक्षा व्यवस्था का जन्म हुआ है। अब किसी भी देश का विद्यार्थी घर बैठे किसी भी देश के कालेज से आन लाइन शिक्षा ग्रहण कर सकता है।

बाकी नियम-कानून तो वही होंगे, लेकिन शिक्षा हासिल करने के लिए संबंधित देश जाना अनिवार्य नहीं होगा। एक संकट होता था, प्रैक्टिकल का, आनलाइन शिक्षा में इसका भी कोई संकट नहीं रहेगा। कारण यह कि प्रोफेसर आपको सारी जानकारी आपको आपके समक्ष उपलब्ध करायेगा। आप सवाल कर सकेंगे और जवाब पा सकेंगे।

माध्यमिक क्षेत्र में आनलाइन एजुकेशन के क्षेत्र में एक बड़ी बाधा भी है, वह है संसाधनों का अभाव। हर विद्यार्थी उच्चतम शिक्षा के क्षेत्र में नहीं जा पाता। खासकर यह दिक्कत ग्रामीण परिवेश पर आती है। आनलाइन शिक्षा लेनी है तो इसके लिए आपको कंप्यूटर, लैपटाप, स्मार्टफोन के साथ चौबीस घंटे इंटरनेट की सुविधा भी चाहिए। अभी भारत में हर जगह इंटरनेट की सुविधा नहीं है। हालांकि समय के अंतराल के साथ इंटरनेट का दायरा बढ़ता जा रहा है। फिलहाल अभी सुदूरवर्ती इलाकों में इसकी अनुपलब्धता आनलाइन एजुकेशन में बाधक बनती है। माध्यमिक स्तर पर ग्रामीण क्षेत्र के सारे अभिभावक अपने बच्चों को कंप्यूटर, लैपटाप जैसे संसाधन उपलब्ध कराने की स्थिति में नहीं होते। फिर माध्यमिक स्तर के विद्यार्थी कैसे आनलाइन शिक्षा ग्रहण करें। सरकार को इस पर भी विचार करना होगा।

जो भी हो, कोरोना की इस महामारी ने आनलाइन एजुकेशन के माध्यम से संभावनाओं के नये द्वार तो खोले ही हैं। परम्परागत शिक्षा प्रणाली तो चलती ही रहेगी, लेकिन आनलाइन एजुकेशन उन विद्यार्थियों के लिए ज्यादा मुफीद साबित होगी, जो रेगुलर शिक्षा ग्रहण करने की स्थिति में नहीं होते। इस संभावना से इनकार नहीं किया जा सकता कि उच्च शिक्षा के क्षेत्र में विद्यार्थी परंपरागत शिक्षा के स्थान पर आनलाइन एजुकेशन को तरजीह देने लगें। जरूरत इस बात की होगी कि आनलाइन एजुकेशन को भी परंपरागत शिक्षा प्रणाली की तरह गुणवत्तापूर्ण बनाया जाये।l

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