लगातार बड़े मेडिकल संस्थानों को अलविदा कह रहे सीनियर डॉक्टर

अपर्णा शुक्ला

बदहाल व्यवस्था – राजधानी के बड़े मेडिकल संस्थानों से सीनियर डॉक्टरों का निरन्तर मोहभंग

लखनऊ। राजधानी के बड़े मेडिकल संस्थानों से सीनियर डॉक्टरों का मोह निरन्तर भंग होता जा रहा हैं। डॉक्टर्स इन्हें अलविदा कह नए संस्थानों की तरफ अपना रूख कर रहे हैं। तीन दिनों पहले ही, केजीएमयू के यूरोलॉजी विभाग के वरिष्ठ डॉ राहुल जनक सिन्हा ने अपने पद से इस्तीफा दिया।

हालांकि ये कोई पहली बार नही है, क्योंकि इससे पहले भी किंग जॉर्ज मेडिकल कालेज, राम मनोहर लोहिया अस्पताल और पीजीआई के वरिष्ठ डॉक्टरों ने संस्थानों की बदहाल व्यवस्था और राजनीति के कारण पद छोड़ा हैं। कई डॉक्टरों ने इस्तीफा देने की वजह शोषण बताया तो किसी ने अस्पतालों में चल रही राजनीति से तंग आकर अपना पद त्याग दिया।

ऐसे में यह जानना बेहद जरूरी हो जाता है कि आखिर क्या वजह है कि किसी न किसी बात का बहाना बनाकर डॉक्टर्स संस्थान छोड़ रहे हैं। सबसे बड़ा प्रश्न यह उठता है कि क्या मेडिकल संस्थानों में भी राजनीति होती है? क्या मरीज अच्छे डॉक्टरों से इलाज नही करा पाएंगें? क्या वाकई अस्पतालों में डॉक्टरों का शोषण होता है? जिसके चलते बड़े संस्थानों से अच्छे डॉक्टर्स मजबूरन इस्तीफा दे रहे हैं? बता दें कि इन दिनों तमाम डॉक्टरों के बड़े निजी अस्पतालों की ओर रुख करने का सिलसिला तेज है।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी

13 अक्टूबर 2020 में केजीएमयू के बदहाल व्यवस्था से परेशान होकर वरिष्ठ डॉ राहुल जनक सिन्हा ने इस्तीफा दिया, लेकिन इससे पहले भी 5 जुलाई 2019 में केजीएमयू के इंडोक्राइनॉलजी विभाग के इकलौते डॉ. मधुकर मित्तल ने इस्तीफा दिया था। 2018 अक्टूबर में सबसे पहले नेफ्रॉलजी विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. संत कुमार पांडेय और यूरॉलजी विभाग के डॉ. मनमीत ने इस्तीफा दिया था।

इसके बाद इस साल सर्जिकल गैस्ट्रोएंट्रॉलजी में डॉ. साकेत कुमार और सीवीटीएस के डॉ. विजयंत कुमार ने इस्तीफा दिया। इसी बीच डॉ. मधुकर मित्तल ने इस्तीफा दिया था। एनाटॉमी के डॉ. नवनीत कुमार व प्लास्टिक सर्जरी के विजय कुमार को राजकीय कॉलेज का प्रिंसिपल और हीमैटॉलजी विभाग से डॉ. एके त्रिपाठी लोहिया इंस्टिट्यूट के निदेशक का पद मिलने से वो भी अब केजीएमयू में नहीं है।

संजय गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान
साल 2020 में चाइल्ड पीजीआई के प्लास्टिक सर्जरी विभाग में 2 डॉक्टर तैनात थे। इनमें से डॉ. सुधीर कुमार कुछ महीने पहले ही संस्थान छोड़कर चले गए थे। इसके बाद मरीजों का भार डॉ. अतुल शर्मा पर पड़ गया था। कुछ समय बाद ही डॉ. अतुल शर्मा ने भी अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। 20 अप्रैल 2020 में चाइल्ड पीजीआई के पीडियाट्रिक विभाग में तैनात डॉ. प्रमोद कुमार शर्मा का चयन एम्स भोपाल में एडिशनल प्रफेसर के पद पर हो गया था। वहां से चयन की लिखित सूचना आने के बाद डॉ. प्रमोद ने संस्थान से इस्तीफा दे दिया था। एडमिनिशटेसन विभाग के सीनियर डॉ अभिषेक यादव ने 2015 में अपने पद से इस्तीफा दिया था।


राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान
बीते 4 मार्च 2020 में लोहिया संस्थान के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. भुवन चन्द्र तिवारी ने पद से इस्तीफा दिया था, जबकि नौ महीने पहले पूर्व डॉ. भुवन ने चिकित्सा अधीक्षक पद की कमान संभाली थी। इसी बीच केजीएमयू गैस्ट्रोसर्जरी विभाग के डॉक्टर ने भी इस्तीफा दिया था। इससे लिवर प्रत्यारोपण पर संकट मंडराने लगा था। इसी विभाग से दो संकाय सदस्य लिवर ट्रांसप्लांट शुरू होने के बाद इस्तीफा दिए थे।

संस्थान के रेडियोडायग्नोसिस विभाग के डॉक्टरों ने भी अपना इस्तीफा दिया था। अत्यधिक वर्कलोड के कारण डॉक्टरों के इस्तीफा देने से मरीजों की जांच का काम प्रभावित हुआ था। आलम यह है कि लोहिया संस्थान के डायरेक्टर, अन्य प्रशासनिक अधिकारियों व इस्तीफा देने वाले तीनों डॉक्टर, डॉ. सिमरन, डॉ. अनिल रावत और डॉ. मीनू ने इस्तीफा देना चाहा था, लेकिन कुछ समय बाद करीब 5 घंटे की मैराथन मीटिंग के बाद इस्तीफा वापस लेने का फैसला हुआ।

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