सुसाइड नोट से हुआ खुलासा, इस वजह से अश्वनी कुमार ने की आत्महत्या

शिमला। नागालैंड के पूर्व राज्यपाल और पूर्व सीबीआई निदेशक अश्वनी कुमार ने बुधवार की शाम अपने आवास पर आत्महत्या कर ली है। घटनास्थल से पुलिस को सुसाइड नोट भी मिला है, जिसमें इसमें उन्होंने लिखा है कि गंभीर बीमारी के चलते वह यह कदम उठा रहे हैं। वह इस जीवन को समाप्‍त कर अगली यात्रा पर निकल रहे हैं। सुसाइड नोट में अपनी मौर के लिए किसी को जिम्मेदार नहीं ठहराया है।

डीजीपी संजय कुंडू ने बताया कि शाम 7:10 बजे उनके बेटे और बहू टहलने गए थे और अश्वनी कुमार घर की छत पर थे। बेटे और बहू ने वापस लौटने पर घर का दरवाजा अंदर से बंद था। घर का मुख्य दरवाजा अंदर से लॉक था। उन्होंने मुख्य दरवाजा तोड़ा और देसखा कि दुसरा कमरा भी लॉक था, उसे भी तोड़ा। तीसरा कमरा खुला था, जिसमे अश्वनी कुमार रस्सी से लटके हुए थे।

बेटे और बहू ने उन्हें नीचे उतारा और पुलिस को सूचना दी। डीजीपी ने बताया कि सभी साक्ष्यों को एकत्र किया गया है और एफएसएल की टीम ने भी मौके से साक्ष्य जुटाए हैं। शव को कब्जे में लिया गया है और गुरुवार सुबह पोस्टमॉर्टम कर शव को परिजनों के हवाले किया जाएगा।

जानकारी के मुताबिक़ अश्वनी कुमार ने दोपहर का खाना साथ खाया था। दिन में कालीबाड़ी मंदिर और शाम को टहलने भी गए थे। अश्वनी कुमार सबके लिए रोल मॉडल हैं। 70 वर्षीय अश्वनी कुमार आईपीएस अधिकारी थे और सीबीआई तथा एलीट एसपीजी में विभिन्न पदों पर भी रहे। वर्ष 2006 से 2008 तक वह हिमाचल के डीजीपी रहे और अगस्त 2008 से नवंबर 2010 तक निदेशक सीबीआई रहे। मार्च 2013 में उन्हें नगालैंड का राज्यपाल नियुक्त किया गया था। वर्ष 2014 में राज्यपाल के पद से त्यागपत्र देने के बाद वह शिमला स्थित एक निजी विश्वविद्यालय में कुलपति भी रहे।

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