भारत बायोटेक का बड़ा ऐलान, कोवैक्सीन के गंभीर साइड इफेक्ट हुए तो देंगे मुआवजा

कोवैक्सीन

कोरोना वायरस के खिलाफ दुनिया के सबसे बड़े टीकाकरण अभियान के पहले दिन शनिवार को देश में कुल 191181 लोगों को टीका लगाया गया। कांग्रेस द्वारा वैक्सीन पर सवाल खड़े किए जाने के बीच भारत बायोटेक ने बड़ा ऐलान किया है। कोवैक्सीन बनाने वाली कंपनी भारत बायोटेक ने कहा कि यदि इससे साइड इफेक्ट होता है तो फिर मुआवजा मिलेगा।

टीका लगवाने वाले लोगों द्वारा जिस फॉर्म पर हस्ताक्षर किए जा रहे हैं, उस पर भारत बायोटेक ने कहा है कि किसी प्रतिकूल या गंभीर प्रतिकूल प्रभाव की स्थिति में आपको सरकारी और अधिकृत केंद्रों और अस्पतालों में मान्यताप्राप्त देखभाल दी जाएगी। सहमति पत्र के अनुसार, अगर टीके से गंभीर साइड इफेक्ट होने की बात साबित होती है तो मुआवजा बीबीआईएल द्वारा दिया जाएगा।

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बता दें कि कोवैक्सीन के पहले और दूसरे चरण के क्लिनिकल परीक्षण में कोविड-19 के खिलाफ एंटीडोट विकसित होने की पुष्टि हुई है। टीका निर्माता कंपनी के मुताबिक, टीके के क्लिनिकल रूप से प्रभावी होने का तथ्य अभी अंतिम रूप से स्थापित नहीं हो पाया है तथा इसके फेज के क्लिनिकल ट्रायल में स्टडी की जा रही है।

इसमें कहा गया है, ”इसलिए यह जान लेना आवश्यक है कि टीका लगाने का मतलब यह नहीं है कि कोविड-19 संबंधी अन्य सावधानियों को नहीं बरता जाए।” इस क्षेत्र के एक विशेषज्ञ के मुताबिक चूंकि टीका अभी क्लिनिकल ट्रायल के चरण में ही है इसलिए यदि किसी को गंभीर दुष्प्रभाव होते हैं तो मुआवजा देना कंपनी की जिम्मेदारी बनती है। वहीं, भारत बायोटेक इंटरनेशनल लिमिटेड (बीबीआईएल) की संयुक्त प्रबंध निदेशक सुचित्रा एल्ला ने ट्वीट किया कि कोवैक्सीन और भारत बायोटेक, देश और कोरोना योद्धाओं की सेवा करके सम्मानित और कृतज्ञ महसूस कर रहे हैं।

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कांग्रेस नेता ने कोवैक्सीन पर खड़े किए सवाल

कांग्रेस सांसद और पूर्व केंद्रीय मंत्री मनीष तिवारी ने कोरोना टीकाकरण पर सवाल खड़े किए। उन्होंने भारत बायोटेक के टीके पर कहा कि कई प्रख्यात डॉक्टरों ने सरकार के सामने कोवैक्सीन के प्रभावी और सुरक्षा के संबंध में सवाल खड़े किए हैं और कहा है कि वे नहीं चुन सकेंगे कि उन्हें कौन सी वैक्सीन लेनी है। यह सहमति के पूरे सिद्धांत के खिलाफ जाता है। तिवारी ने आगे कहा कि कोवैक्सीन की अलग ही कहानी है। उसे उचित प्रक्रिया के बिना मंजूरी दी गई है।

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