Birthday Special : जब बेहोशी का इंजेक्शन लगवाये बिना ही मुलायम सिंह ने करवाया था ऑपरेशन!

प्रत्यक्षदर्शी सुभाष शर्मा (देहारादून) द्वारा!

वर्ष 1993 के नवम्बर माह का समय था। समाजवादी पार्टी और बहुजन समाज पार्टी के बीच चुनावी गठबंधन था। उत्तर प्रदेश के पर्वतीय जिलों में सभी सीट्स सपा के ही कोटे में थीं। उस पर भी देहारादून जनपद की मसूरी विधानसभा सीट पर आदरणीय मुलायम सिंह सर्वाधिक फोकस था। उस सीट पर सपा के विनोद बड्थ्वाल प्रत्याशी थे। तारीख तो मुझे याद नहीं है, परन्तु दीपावली के आसपास का समय था। मीठी-मीठी ठण्ड शुरू हो चुकी थी। चुनाव प्रचार अपने चरम पर था। उस समय मसूरी विधानसभा में बहुत ही दुर्गम पहाड़ी क्षेत्र था। मसूरी के सपा प्रत्याशी विनोद बड्थ्वाल के चुनाव प्रचार के लिये नेताजी आ रहे थे।

मुलायम सिंह

बहरहाल अपने निश्चित कार्यक्रम के तहत नवम्बर 1993 के तीसरे सप्ताह में, सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष मुलायम सिंह जी अपने दौरे पर देहरादून आये। उन दिनों मशहूर फिल्म आर्टिस्ट राजबब्बर नेता जी के लिये समर्पित थे, वे नेताजी की सभाओं में उनसे थोड़ा पहले पहुँच कर आकर्षण का केंद्र बनते थे और भीड़ जुटाने से लेकर भीड़ को जोड़े रखने में अपनी जबरदस्त भूमिका निभाते थे। उस रोज मुलायम सिंह जी की सभायें, मसूरी विधानसभा के महत्वपूर्ण क्षेत्रों, क्रमशः ऋषिकेश, डोईवाला में थी उसके बाद सहसपुर (चकराता विधान सभा), नगरपालिका मैदान देहरादून और फिर रात की आखिरी मीटिंग रायपुर में निश्चित थी।

मैं (लेखक) देहरादून नगरपालिका मैदान की सभा का संयोजक और संचालक था। मैंने शाम 5.00 बजे से ही मीटिंग जमानी शुरू कर दी थी। शहर देहारादून में सपा के प्रत्याशी तो थे परन्तु उनका प्रचार ढीला ही था। इसलिये इस मीटिंग में भीड़ जुटाने और नेताजी मुलायम सिंह यादव जी के आने तक भीड़ को रोके रखने की जिम्मेदारी मेरी ही थी। परन्तु मेरी आशा के विपरीत शाम 5.30- 6.00 बजे से ही मैदान खचाखच भर चुका था। राजबब्बर जी के मीटिंग में आने की खबर का साइड इफेक्ट ही था यह। मीटिंग खूब जमी, लगभग 8.00 रात को राजबब्बर सभा में पहुंचे, मैंने भीड़ को उलझाए रखा। रात को 9.00 बजे के लगभग नेताजी मुलायमसिंह यादव जी सभा में विनोद बड्थ्वाल के साथ पहुंचे।

राजबब्बर जी को संबोधन के लिये आमंत्रित करके मैं नेताजी की ओर मुखातिब हुआ। तो उन्होंने मेरा हाथ पकड़ लिया और मुझे बोले कि मैं तेज बुखार और कान में भयंकर दर्द से परेशान हूँ। अब बिलकुल भी प्रचार नहीं कर पाऊँगा। मैंने ध्यान दिया तो उन्हें कम से कम 102-103 डिग्री का बुखार था। उन्होंने कान और सिर पर मफलर लपेट रखा था। दाहिने कान को अपने हाथ से जोर से दबा के वो मुझसे बात कर रहे थे। कान में दर्द की वजह से तेज बुखार और पीड़ा उनकी डबडबाती आँखों में साफ झलक रही थी। वे मुझे बोले किसी ईएनटी स्पेशलिस्ट को दिखा दो, अब और दर्द नही झेल पाऊँगा। मेरे लिये उनका ये वाक्य एक आदेश था। अब तक राजबब्बर अपना संक्षिप्त मगर प्रभावशाली भाषण समाप्त कर चुके थे। आँखों ही आँखों में मैं उन्हें आश्वस्त करके मंच पर भाषण के लिये आमंत्रित कर चुका था। नेताजी असहनीय दर्द के बावजूद अपने कर्तव्य पथ पर डट गये और भाषण शुरू किया।

मेरी निगाहें भीड़ में काफी आगे खड़े अपने पारिवारिक मित्र अजय गोयल के बड़े भैया कर्नल (रि.) प्रदीप गोयल जी को तलाशने लगी। भाई साहब मुझे दिख गये उन्हें मैंने इशारे से मंच के करीब बुलाया। वे आगे आ गये। मुझे मालूम था कि उनके कज़न डॉ. राजीव गुप्ता एक ईएनटी विशेषज्ञ हैं। मैंने उन्हें मुलायम सिंह जी की खराब तबीयत और दुखते कान के बारे में बताया और आगे का कार्यक्रम मालूम कर के राजपुर रोड स्थित चंद्र लोक कॉलोनी में नेताजी के निकटस्थ एक इंजीनियर के घर पर डॉ. राजीव गुप्ता जी को ले आने का आग्रह किया। कर्नल गोयल भाई साहब तुरन्त ही इस महत्वपूर्ण काम में लग गये। इधर नेताजी का असहनीय दर्द और बुखार के बावजूद भाषण खत्म हुआ तो मैंने उन्हें आश्वस्त किया कि, ईएनटी स्पेशलिस्ट आ रहे हैं। इसके बाद नेताजी विनोद बड्थ्वाल के साथ रायपुर की सभा के लिये रवाना हो गये।

जब तक नेताजी रायपुर में विनोद बड्थ्वाल के चुनाव प्रचार को समाप्त करके चंद्र लोक कॉलोनी पहुंचे तब तक कर्नल भाई साहब, डॉ. राजीव गुप्ता जी को लेकर पहुँच गये थे। बाकी सभी लोग चंद्रलोक की उस कोठी में रात्रि भोज में व्यस्त हो गये। मैं नेताजी का कान देख रहे डॉ. राजीव गुप्ताजी के साथ खड़ा था। डॉ. राजीव गुप्ता ने नेताजी के कान में टॉर्च की रोशनी डाली तो ओह माई गॉड बोल के नेताजी को निहारने लगे, फिर बोले कि ये तो बहुत बुरी तरह पका हुआ है, आप को मेरे क्लीनिक चलना पड़ेगा। नेताजी तुरन्त तैयार हो गये। डॉ. राजीव गुप्ता अपना क्लीनिक खोलने के लिये रवाना हुए तो चंद मिनटों बाद मैं नेता जी मुलायम सिंह यादव को लेकर, चकराता रोड स्थित डॉ. राजीव गुप्ता जी के क्लीनिक के लिये रवाना हुआ। अन्य सभी लोगों के साथ—साथ उन्होंने अपने ब्लैक कैट कमान्डोज़ को भी रात्रि भोज का आदेश दिया और बिना सुरक्षा के ही मेरे साथ कान के भयंकर दर्द के इलाज के लिये चल पड़े। वे मुझ पर बहुत भरोसा करते थे। मैंने इशारे से उन्हें बता दिया था कि, मेरा लाइसेंसी रिवॉल्वर मेरे पास है। वे आंखों ही आंखों में संतुष्ट होकर मेरे साथ चल दिये। विनोद बड्थ्वाल, धस्माना, गिरधर शर्मा भाई सहित किसी पार्टी जन या प्रशासनिक अधिकारी को नहीं मालूम था कि मैं उन्हें कहाँ ले जा रहा हूं।

अब मैं नेताजी को रात के लगभग 11.00 बजे चकराता रोड़ स्थित डॉ. राजीव गुप्ता जी के क्लीनिक में ले गया। वहां वे अपने ऑपरेशन थियेटर को तैयार कर रहे थे। सड़क के उस पार मेरे एक परिचित की केमिस्ट शॉप थी, वो देर तक शॉप खोलते थे, उनसे कॉटन और अन्य दवाईयां डॉ. राजीव गुप्ता जी ने मंगवा ली थी। डॉ. राजीव गुप्ता जी ने मुलायमसिंह जी को बेहोशी का इंजेक्शन लगाने की अनुमति मांगी तो नेताजी सारा दर्द भुला कर तुरन्त बोल पड़े कि मुझे तो कल सुबह मिर्जापुर पहुंचना है। शाम को बनारस में भी सभाएं करनी हैं, बेहोशी की दवा का तो प्रश्न ही नही उठता। मेरी तरफ भी डॉ. राजीव गुप्ता ने प्रश्न भरी नजरों से देखा और बोले कि बड़ा ऑपरेशन है, बेहोश तो करना ही पड़ेगा। वरना बहुत दर्द होगा। नेताजी बोले, कितना भी दर्द हो बर्दाश्त कर लूँगा, मुझे किसी तरह ठीक कर दो। डॉ. राजीव गुप्ता बोले कि कम से कम एक दिन का कम्प्लीट बेड रेस्ट तो करना ही पड़ेगा। नेताजी बोले, ये तो सम्भव ही नहीं है। 10-12 दिन अभी और प्रचार करना है, आराम तो उसके बाद ही मिलेगा। मुझे कान में बहुत ज्यादा तकलीफ है-तेज बुखार भी है, बस कुछ भी करो, कितना भी दर्द हो मैं बर्दाश्त कर लूँगा।

डॉ. राजीव गुप्ता जी थोड़ा परेशान और हैरान थे। फिर उन्होंने मुझे धीरे से कहा कि नेताजी को बातों में लगा के रखो उनका ध्यान बंटाओ, तभी ऑपरेशन करूँगा। मैंने नेताजी का एक हाथ कस के पकड़ रखा था और उन्हें राजनैतिक परिस्थितियों में उलझाकर उनका ध्यान बंटाने के उद्देश्य से सवाल दागा कि, सपा-बसपा गठबंधन कितनी सीटें जीत सकता है? आपका क्या आंकलन है? वे बोले कि दिल्ली से मुरादाबाद तक की बेल्ट तो शाही ईमाम (जामा मस्जिद के शाही इमाम) ने डिस्टर्ब कर दी है। पर, पूर्वांचल, बुन्देलखण्ड और सेंट्रल यूपी सारा मैं जीत रहा हूँ, सरकार बन जायेगी। इसी बीच डॉ. राजीव जी ने लम्बा चीरा लगाकर पस पॉकेट (मवाद का स्त्रोत) छेड़ दिया था। उनकी उंगलियां एक जादूगर की तरह चल रही थी। मुलायम सिंह जी ने चूँ तक नहीं की और मुझसे बतियाते रहे। मैंने उनके कान से काले-लाल रंग के मवाद की नदी बहते हुए देखी। असहनीय बदबू से क्लीनिक भर गया। चिलमची पस से भर गयी और ऑपरेशन थियेटर में बहता हुआ मवाद फैल गया।

मेरे सवाल नेताजी को व्यस्त रखने के लिये जारी थे। वो जानते थे कि, मैं उनका ध्यान ऑपरेशन के दर्द से बांटने के लिये ही उनसे सवाल दर सवाल कर रहा था। नेता जी ने एक लम्बी सांस ले कर कहा कि, बहुत आराम मिला। डॉक्टर अब टान्के लगा रहे थे। सारा दर्द मुलायम सिंह सिंह जी दांत पीसकर बर्दाश्त कर गये। उन्होंने एक बार भी डॉक्टर को नहीं रोका। भरी सर्दी वाली रात को मैंने डॉक्टर राजीव गुप्ता जी को पसीने में भीगे हुए देखा। वे बिना रुके कम से कम समय में इस अद्भुत और जटिल ऑपरेशन को निपटाने में लगे थे। उनके पास रुक कर आराम करने का अवसर ही नहीं था। सहायक के नाम पर उनके भाई ही हमारे साथ थे। मैं एक बार डॉ. राजीव गुप्ता जी को देखता और एक बार नेता जी को। करीब एक सवा घंटे में ऑपरेशन संपन्न हुआ। डॉक्टर ने कान के अंदरूनी हिस्सों को लम्बे—लम्बे औजार डालकर साफ किया और 13 टांके लगाकर लम्बी संतोष भरी सांस ली। मुलायम सिंह जी तो, पस (मवाद) निकलते ही शांत होकर डॉक्टर का मन ही मन शुक्रिया अदा कर रहे थे।

डॉक्टर ने उन्हें बैठाकर कम से कम छह—आठ घंटे आराम करने की सलाह दी। जब वो उनके कान सहित पूरे सिर पर गोल—गोल पट्टी बाँध रहे थे, तो मुलायम सिंह जी बोले कि ये पट्टी रहने दो, मैं ऊपर से मफलर लपेट लूँगा। अगर युद्ध के मैदान में, सेनापति को लोग जख्मी देखेंगे तो हमारी सेना का मनोबल टूटेगा। किसी को नहीं बताऊँगा कि मेरा कोई ऑपरेशन भी हुआ है। डॉ. राजीव और मैं उनके इस अद्भुत साहस और हौसले को देखकर हैरान थे। राजनीति और अपने उद्देश्य के लिये इस हद तक समर्पित आदरणीय “लौह पुरुष” मुलायम सिंह जी के साथ बिताये हुए वो प्रेरणादायक क्षण मेरे जीवन की एक बड़ी उपलब्धि हैं।

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