कोरोना महामारी की दूसरी लहर के बीच ब्लैक फंगस ने पसारे पैर, सफेद फंगस ने भी बढ़ाई चिंता

देश इस समय कोरोना की दूसरी लहर का सामना कर रहा है। लेकिन इसके साथ एक और मुसीबत पैर पसारने लगी है। इस मुसीबत का नाम ब्लैक फंगस है, जिसके देश में अब तक 8,848 मामले सामने आ चुके हैं। ये मामले लगभग 15 राज्यों में आए हैं।

गुजरात में ब्लैक फंगस के सबसे ज्यादा 2,281 मरीज मिले हैं। वहीं, उत्तर प्रदेश में ब्लैक फंगस के मरीजों की संख्या 112, महाराष्ट्र में 2000, आंध्र प्रदेश में 910, मध्य प्रदेश में 720, कर्नाटक में 500 और दिल्ली 197 मामले सामने आए हैं। बिहार में ब्लैक फंगस के लक्षणों वाले मरीजों की संख्या 170 से ज्यादा हो गई है।

ब्लैक फंगस का संक्रमण उन मरीजों में दिखाई दे रहा है, जो कोरोना संक्रमण से स्वस्थ हो चुके हैं। ब्लैक फंगस फैलने के पीछे कोरोना के इलाज के दौरान स्टेरायड का इस्तेमाल, साफ-सफाई की कमी जैसे कारण बताए जा रहे हैं। वहीं, एम्स दिल्ली की डॉक्टर प्रोफेसर उमा कुमार ने ब्लैक फंगस या म्यूकोरमाइकोसिस के फैलने के पीछे इंडस्ट्रियल ऑक्सीजन को जिम्मेदार बताया है। उन्होंने कहा कि ऑक्सीजन के साथ ह्यूमिडीफायर में स्टेराइल वॉटर की जगह गंदे पानी का इस्तेमाल हो रहा है। इसके अलावा बिना धुले मास्क भी ब्लैक फंगस के फैलने की वजह बन रहा है।

ब्लैक फंगस के तेजी से बढ़ते मामलों को देखते हुए राजस्थान, गुजरात, तेलंगाना, उत्तर प्रदेश, हरियाणा जैसे कई राज्यों ने महामारी रोग अधिनियम 1897 के तहत महामारी घोषित कर दिया है। इससे सरकारी और निजी अस्पतालों को ऐसे मरीजों की सरकार को सूचना देना अनिवार्य हो गया है। इससे सरकार को इस रोग के नियंत्रण के लिए जरूरी कदम उठाने में मदद मिल सकेगी। केंद्र सरकार ने भी सभी राज्यों को ब्लैक फंगस को महामारी घोषित करने और मरीजों की देखभाल में साफ-सफाई बरतने की एडवाइजरी जारी की है।

हालांकि, कुछ राज्यों में सफेद फंगस के भी मामले सामने आए हैं। इसे ब्लैक फंगस के मुकाबले ज्यादा खतरनाक बताया जा रहा है। इसके सबसे ज्यादा बिहार में मामले सामने आए हैं। उत्तर प्रदेश में भी सफेद फंगस का पहला मामला सामने आने सूचना है।

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