वाराणसी: काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परिसर में दो मंजिला इमारत गिरी, 2 मजदूरों की मौत

वाराणसी में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर परिसर में बड़ा हादसा हुआ है। जहां जर्जर दो मंजिला इमारत के ढहने से 2 मजदूरों की मौत हो गई है। जबकि 7 मजदूर घायल हुए हैं। घायलों को कबीरचौक में मौजूद मंडलीय अस्पताल में भर्ती कराया गया है।

घटना काशी विश्वनाथ परिसर की है। कार्यदायी संस्था के मजदूर गोयनका छात्रावास के जर्जर हिस्से के नीचे सोए हुए थे। मंगलवार तड़के चार बजे के लगभग छात्रावास का जर्जर हिस्सा अचानक भरभरा कर गिरने से उसके मलबे के नीचे नौ मजदूर फंस गए। जिसमें दबकर बंगाल निवासी दो मजदूरों की मौत हो गई। वहीं प्राथमिक उपचार के बाद छह मजदूरों को अस्पताल से छुट्टी दे दी गई है। हादसे की सूचना पाकर जिले के पुलिस अधिकारी और प्रशासनिक अधिकारी मौके पर पहुंच जांच में जुट गए हैं।

बनारस के विश्वनाथ कॉरिडोर में काम करने वाले दो मजदूरों अमीनुल मोमिन और एबाउल मोमिन की रात को सोते समय छत गिर जाने के कारण हुई मौत पर अल्पसंख्यक कांग्रेस ने पीड़ित परिवारों को 25 लाख मुआवजा व एक व्यक्ति को नौकरी और घायलों को 5 लाख सहायता की मांग की है। अल्पसंख्यक कांग्रेस ने ठेका कंपनी पर हत्या का मुकदमा भी दर्ज करने की मांग की है।

प्रदेश मुख्यालय से जारी बयान में अल्पसंख्यक कांग्रेस प्रदेश चेयरमैन शाहनवाज़ आलम ने कहा कि प्रधानमन्त्री मोदी जी के ड्रीम प्रोजेक्ट जिसके तहत दर्जनों प्राचीन मन्दिरों को ध्वस्त किया गया और जिसका हिंदू धार्मिक संगठनों और आम नागरिकों के विरोध के बावजूद निर्माण किया जा रहा है, में काम करने के लिए हिंदू मजदूरों का नहीं मिलना साबित करता है किहिंदू समाज मोदी जी के सनातन धर्म विरोधी राजनीति को समझने लगा है। उन्होंने कहा कि कॉरिडोर का ठेका लेने वाली कंपनी को बंगाल के गरीब मुस्लिम मजदूरों से काम कराना पड़ रहा है क्योंकि मोदी जी के इस धर्मविरोधी काम के लिए कोई भी स्थानीय हिंदू मजदूर तैयार नहीं है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमन्त्री के ड्रीम प्रोजेक्ट में मजदूरी करने वालों को मानकों के हिसाब से रहने और सोने की सुविधा तक न मिलना साबित करता है कि मोदी जी के अन्य ड्रीम प्रोजेक्टों की तरह ही इसमें भी फर्जीबाड़ा चल रहा है।

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