दीप ऐसा जले

डा० कुमुद श्रीवास्तव वर्मा ‘कुमुदिनी’

तमसो मा ज्योतिर्गमय

सद्गमय चले , ज्योर्तिगमये मिले,

दीप ऐसा जले, दीप ऐसा जले, दीप ऐसा जले, दीप जले..

संग हो काफिले देश सेवा चले,

दीप ऐसा जले..

दीन को सुख मिले ,दीप हर घर जले,

दीप ऐसा जले, दीप ऐसा जले…

ना हो दिल में गिले,मीत मन का मिले,

दीप ऐसा जले प्यार से सब मिले,

दीप ऐसा जले, दीप ऐसा जले

प्यार से सब मिले,दीप ऐसा जले,

न्याय सबको मिले दीप ऐसा जले,

दीप ऐसा जले , दीप ऐसा जले..

मृत्यु का भय न हो, शक्ति की क्षय न हो,

लोभ की सह न हो,पुण्य की क्षय न हो,

दीप ऐसा जले , दीप ऐसा जले..

प्रेम की क्षय न हो ,द्वेष की जय न हो ,

दीप ऐसा जले , दीप ऐसा जले,दीप ऐसा जले, दीप ऐसा जले…

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