चाणक्य नीति : इन दो आदतों से व्यक्ति को रहना चाहिए कोसो दूर

चाणक्य नीति

चाणक्य ने युवाओं को जागरूक बनाने और उनके संपूर्ण विकास के लिए अधिक परिश्रम किया था। चाणक्य विद्वान होने के साथ साथ एक योग्य शिक्षक भी थे। युवाओं को शिक्षित करने और उन्हें प्रेरित करने में चाणक्य ने अपनी जीवन का एक बड़ा हिस्सा समर्पित किया था। इसलिए चाणक्य युवाओं की मनोस्थिति को बहुत अच्छे ढ़ग से समझते थे। चाणक्य का मानना था कि युवा बदलाव के सबसे बड़े सर्मथक होते हैं।

चाणक्य नीति शास्त्र आचार्य चाणक्य के द्वारा रचित ग्रंथ है। इस ग्रंथ में उन्होंने मनुष्यों के कल्याण के लिए कई सूत्र दिए हैं, जिनका पालन करके व्यक्ति सफलता की ऊंचाइयों को छू सकता है। आचार्य चाणक्य ने अपने इस नीति ग्रंथ में बताया है कि अगर युवाओं में ये 2 दोष हो तो उससे सफल नहीं हो सकता है।

चाणक्य का मानना था कि व्यक्ति को हमेशा अच्छी आदतों को अपनाना चाहिए। अच्छी आदते व्यक्ति को महान और सफल बनाती हैं। अच्छी आदतें शिक्षा और संस्कार से विकसित होती हैं। चाणक्य के अनुसार जब व्यक्ति में गलत आदतें आ जाती हैं तो उसकी तरक्की रूक जाती है। समाज और कार्य स्थल पर ऐसे लोगों को सम्मान प्राप्त नहीं होता है।

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आइए जानते हैं चाणक्य नीति के वो 2 आदतें जिससे मनुष्य को दूर रहना चाहिए…

1. झूठ बोलना है पाप के सामान

चाणक्य के अनुसार व्यक्ति को झूठ से सदा ही दूर रहना चाहिए। झूठ बोलने की आदत सबसे बुरी और खतरनाक होती है। जिस व्यक्ति को झूठ बोलने की आदत लग जाती है वह दूसरों को तो हानि पहुंचाता ही साथ ही साथ स्वयं का भी नुकसान करता है। जब ऐसे व्यक्ति की असलियत सामने आती है तो हर कोई दूरी बना लेता है।

2. आलस व्यक्ति के लिए बाधा

चाणक्य के अनुसार आलस व्यक्ति की सफलता में सबसे बड़ी रूकावट है। आलस से व्यक्ति को हमेशा दूर रहना चाहिए। आलसी व्यक्ति जीवन में आने वाले अवसरों को खो देता है। जीवन में सफल होने के लिए अवसर बार बार नहीं मिलते हैं। जो अवसरों का लाभ नहीं उठा पाता है सफलता उससे दूर चली जाती है। आलसी व्यक्ति कभी अवसरों का लाभ नहीं उठा पाता है और अंत में उसे निराश होना पड़ता है। जो व्यक्ति सदैव सावधान की अवस्था में रहता है और अवसरों का लाभ उठाने के लिए हर समय तैयार रहता है वह जीवन में बड़ी सफलता प्राप्त करता है।

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