चाणक्य नीति : इन दो गुणों में छिपा है सफलता का रहस्य, नहीं होगी धन की कमी

चाणक्य नीति

आचार्य चाणक्य द्वारा बताई गई नीतियां आज के जमाने के हिसाब से पूरी तरह खरी उतरती हैं। उनके बोले गए एक-एक वाक्‍य सत्य के करीब होते हैं। चाणक्य की चाणक्य नीति के अनुसार व्यक्ति सफल होने के लिए जब विकल्प तलाशने लगता है तो वह स्वयं से दूर हो जाता है। अपने आसपास होने वाली कई अच्छी और मौलिक चीजों का वह आनंद नहीं उठा पाता है।

वाणी को मधुर बनाएं | Chanakya Niti

चाणक्य के अनुसार मधुर बोलने वाले व्यक्ति को सभी पसंद करते हैं। विद्वानों का भी मत है कि वाणी में यदि मधुरता नहीं है तो भाषा का सौदंर्य निखर कर नहीं आता है। जिन लोगों की वाणी कर्कश और मधुर नहीं होती है उनसे लोग दूरी बना लेते हैं। वहीं मधुर वाणी बोलने वाले व्यक्ति की डांट को भी लोग सहजता से स्वीकार्य कर लेते हैं। जीवन की सफलता में वाणी का भी प्रमुख योगदान है। वाणी ऐसी होनी चाहिए जो लोगों के दिल में प्रवेश कर जाए। जो इस गुण को अपने भीतर विकसित कर लेते हैं वे लोगों को बहुत जल्दी अपना बना लेते हैं।

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विनम्रता श्रेष्ठ गुण हैं | Chanakya Niti

पौराणिक ग्रंथों में मनुष्य के गुणों का जब वर्णन आता है तो उसमें विनम्रता का वर्णन आता है। व्यक्ति जितना सहज और सरल होगा उसके भीतर उतनी ही विनम्रता होती है। संतों के अचारण में विनम्रता होती है, जिस कारण उन्हें देखकर ही मन को शांति मिलती है। विनम्रता ज्ञान, संस्कार और सत्य बोलने से आती है। विनम्र व्यक्ति शत्रु को भी मित्र बनाने की क्षमता रखता है। ऐसे लोगों को लक्ष्मी जी का भी आर्शीवाद प्राप्त होता है।

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