Chattisgarh : रायगढ़ में पोकलैंड की चपेट में आया श्रमिक, हुई मौत

श्रमिकों की जान की कीमत चंद कागज के टुकड़ों से लगाने वाले हत्या के आरोपितों की ओर से मामले को दबाने का प्रयास जोर शोर से चल रहा है। दरअसल यह पूरा मामला रायगढ़(Chattisgarh) जिले में स्थित कंपनी एमएसपी से जुड़ा हुआ है। इस कंपनी के लिए जामगांव रेलवे साइडिंग में रेलवे के रेक से कोयले की अनलोडिंग करने के लिए कंपनी ने कोलकाता की एक दूसरी कंपनी को ठेका दिया है। यह ठेका कंपनी मृणमई ट्रेडिंग एंड मूवर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी का है। इसकी ओर से सभी नियम कानूनों को दरकिनार कर पोकलैंड के माध्यम से रेलवे रैक से कोयला अनलोड किया जा रहा है। इस दौरान पोकलैंड की चपेट में आने से एक मजदूर की बुधवार को देर रात जान चली गई । रेलवे साइडिंग में पोकलैंड से कोयला लोड करने की अनुमति नहीं होने और बेहद रिस्क होने के बावजूद कंपनी की ओर से मजदूरों की जान की परवाह किए बगैर गैर जिम्मेदाराना तरीके से काम कराया जा रहा था, जिसकी वजह से श्रमिक की मौत हो गई। अब इस पूरे मामले को दबाने के लिए एड़ी चोटी का जोर लगाने की बात सामने आ रही है।

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क्या है पूरा मामला

Chattisgarh में चक्रधरनगर थाना क्षेत्र के जामगांव स्थित रेलवे साइडिंग में रोजाना की तरह रेलवे रैक से कोयले की अनलोडिंग की जा रही थी ।लेकिन यह अनलोडिंग मैनुअल न कराते हुए पोकलैंड के द्वारा कराया जा रहा था। कंपनी की ओर से अपना समय और पैसा बचाने के उद्देश्य से किए जा रहे इस खतरनाक काम से आखिरकार वहां पर कार्यरत एक श्रमिक समारू राम राठिया पोकलैंड के बकेट की चपेट में आ गया और इससे उसकी मौत हो गई। मजदूरों का कहना है कि मृतक के परिवार को कंपनी प्रबंधन की और से मुआवजे का लालच देकर घटना को सामान्य बताने का प्रयास किया जा रहा है।

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क्रिमिनल धाराओं के हेरफेर से कंपनी कर रही बचाव

मृणमई ट्रेडिंग एंड मूवर्स प्राइवेट लिमिटेड कंपनी(Chattisgarh) की ओर से कानून को ताक पर रखकर श्रमिकों की जान से खिलवाड़ करने और इस दौरान एक श्रमिक की मौत हो जाने पर चक्रधर नगर पुलिस थाने में धारा 304 ए आईपीसी के तहत मामला दर्ज किया गया है ।अब पुलिस की ओर से मामले की विस्तृत विवेचना की जा रही है। पुलिस सूत्रों के अनुसार जाँच के बाद धारा 304 लगाई जा सकती है। यदि पुलिस ने ठीक-ठाक विवेचना कर लिया और ठेका कंपनी एवं राजनीति के प्रभाव से दूर रही तो कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों और रेलवे साइडिंग पर काम कर रहे अधिकारियों को 10 साल तक की सजा भुगतनी पड़ सकती है।

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