चॉकलेटी सैनिक हैं चीन के पास

अकु श्रीवास्तव- वरिष्ठ पत्रकार

लेफ्टिनेंट जनरल (रि.) गुरमीत सिंह से बातचीत

चीनी सैनिक पूर्वी लद्दाख में सीमा पर खासकर पैंगोंग झील के किनारे लाउडस्पीकर लगाकर पंजाबी गाने चला रहे हैं। उनका सरकारी मीडिया ग्लोबल टाइ स हमारे सैनिकों के लिए लिख रहा है कि आप ठंड में ऊंची पहाडिय़ों पर न रहें, आप गल जाएंगे। यह चीन की पुरानी रणनीति है। मनोवैज्ञानिक युद्ध का यह तरीका पीपल्स लिबरल आर्मी (पीएलए) शुरू से अपनाती आ रही है। 1962 के युद्ध से पहले, 1967 में सिक्किम के नाथुला और चोला में भी चीनी सैनिक बॉलीवुड के गाने बजाते थे। सिर्फ भारत ही नहीं उत्तर कोरिया और दक्षिण कोरिया की सीमा पर भी चीनी सैनिक ऊंचे टावरों पर लाउडस्पीकर लगाकर अपना एजैंडा चलाते हैं। चीन तीन तरीके से युद्ध लड़ता है। पहला मीडिया वार, दूसरा मनोवैज्ञानिक युद्ध और तीसरा कानूनी दांव-पेंच। अब उसका यह तरीका पूरी दुनिया जानती है। इसमें कुछ भी नया नहीं है।

चीन और पीएलए का लड़ाई का अनुभव बहुत नहीं है। उसके सैनिक चाकलेटी सैनिक हैं। सत्तर फीसदी सैनिक तो मां-बाप की इकलौती संतान है, जिन्हें बहुत लाडप्यार से पाला गया है।  उनमें जंग लडऩे और जीतने की काबलियत नहीं है। वे सिर्फ वीडियो बना सकते हैं। झूठ और फरेब का प्रोपेगंडा चला सकते हैं। ऊंचाई और ठंड में लड़ नहीं सकते। जब चीन सैनिकों को ब्लैक टॉप पर फिर से नियंत्रण पाने के लिए कहा गया तो उन्होंने मना कर दिया। गलवान में भी वे राड, बरछे लेकर लडऩे आए थे, ऐसे लाड़ाई सैना नहीं गुंडे करते हैं। वे गुंडे ही हैं। पीएलए अपने ही देश के लोगों पर गुंडागर्दी करती रही है। वह अपने लोगों पर टैंक चढ़वाने के लिए जानी जाती है। उसने लद्दाख में लामा संतों की हत्याएं कीं। शिजिंयांग में मुस्लमानों को प्रताडि़त किया। चीन के सैनिकों ने आखिरी लड़ाई 1979 में वियतनाम के खिलाफ लड़ी थी, उसमें भी हार गए थे।

यही वजह है कि चीन परोक्ष लड़ाई लडऩा चाहते है। एक तरफ वह एलएसी पर गाने बजा रहा है तो दूसरी ओर उसने अपनी सतर्कता और हथियार भी बढ़ा दिए हैं। इसलिए हमें भी अपनी तैयारी का स्तर ऊंचा रखना होगा। पीएलए एक ऐसी टोली है, जिस पर भरोसा नहीं किया जा सकता। 15 जून को भारतीय जवानों ने गलवान में अपनी आहुति देकर पूरी दुनिया में यह साबित कर दिया है कि चीन झूठ और फरेब के पर्वत पर बैठा है। अब उनका झूठ पूरी दुनिया के सामने है। एक ओर बातचीत करता है तो दूसरी ओर उकसावे की कार्रवाई जारी रखता है। गलवान के बाद 29 अगस्त को उसने पैंगोंग सो झील के दक्षिणी में इस तरह की हरकत की। पहले से ही सतर्क हमारे जवानों ने उसे माकूल जवाब दिया और सामरिक महत्व की ब्लैक टॉप पर नियंत्रण कर लिया। उसके बाद सित बर में भी एलएसी पर 45 साल बाद फिर गोली चली। हालांकि यह हवाई फायरिंग थी।

भारतीय जवानों में गजब का जोश

हाल ही में लेखक को पैंगोंग सो के इलाके में पांच दिन रहने का मौका मिला। कई पुराने दोस्तों और साथियों से बात हुई। स्थानीय लोगों से मुलाकात हुई। वहां जवानों में गजब का जोश है।  वे लडऩे वाले योद्धा हैं। पूरी एलएसी पर भारत की स्थिति बहुत मजबूत है। जितनी भी रणनीतिक महत्ववाली ऊंची चोटियां हैं, उन पर भारतीय जवानों का पूरा नियंत्रण है। 29 अगस्त की रात चीन धोखा देना चाहता था, उसी रात भारतीय जवानों ने एहतियाती कदम उठाकर स्थिति को अपने नियंत्रण में लिया। अब वहां स्थिति पूरी तरह बदल चुकी है। चोटियों पर हमारे सैनिक हैं। हवा में चिनुक और अपाचे उड़ रहे हैं। जवानों का मनोबल बहुत ऊंचा है। उन्हें ऊंचाई और ठंड की कोई फिक्र नहीं है। उन्हें सिर्फ देश की एकता और अखंडता की चिंता है। जवानों की तैनाती के साथ ही उनके लिए खाद्य सामग्री और सैन्य साजो सामान की पूरी व्यवस्था की गई है। सडक़ों पर लॉजिस्टिक वाहन लगातार चल रहे हैं। से टी टेंट और स्पेयर टेंट की अच्छी व्यवस्था है। सर्दियों के लिए खाद्य सामग्री का भंडारण कर लिया गया है। भारतीय जवान वीर सैनिक हैं। उन पर चीन की चालाकियों का कोई असर नहीं होने वाला।

डर गया है चीन

भारतीय जवानों का साहस और तैयारियां देखकर चीनी बुरी तरह से घबरा गए हैं। डर गए हैं। उनकी हर चालाकी और झूठ पकड़ा जा रहा है। वे ऐसी हालत में हैं कि उन्हें पता नहीं चल रहा कि क्या करें। वे अपने ही जाल में फंस गए हैं। उन्हें नहीं पता है कि इस स्थिति से बाहर कैसे निकलें। वे जो भी करने जाते हैं, उसमें ही विफल हो जाते हैं। उन्हें आलाकमान से फटकार मिल रही है। दूसरी ओर भारतीय सैनिक हर स्तर पर मजबूत हैं। हमारी सप्लाई लाइन मजबूत है। हवा में हेलिकॉप्टर और जेट उड़ रहे हैं। सडक़ों पर गाडिय़ों के काफिले निरंतर आ रहे हैं। सिर्फ भारतीय सैनिक ही नहीं लद्दाख के लोग भी उत्साह में हैं। हर लद्दाखी व्यक्ति चाहता है कि मैं फौज के लिए क्या करूं, कैसे मदद करूं। सेना को हर समर्थन दे रहे हैं।

बदल रहा है मौसम

लद्दाख में मौसम अब बदल रहा है। रात को ठंड हो रही है।

(लेखक पूर्व सेना उपप्रमुख हैं और चीन मामलों के विशेष जानकार हैं)

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