सीएम योगी ने पल्‍स पोलिया अभियान का किया शुभारम्‍भ, कहा- हर बच्चा राष्ट्र की अमूल्य धरोहर

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि कोई बच्चा भले किसी परिवार में पैदा हुआ होगा लेकिन, वह एक राष्ट्र की अमूल्य धरोहर है। एक व्यक्ति समाज के निर्माण में और समाज समूह के रूप में राष्ट्र के निर्माण में भागीदार बनता है। एक स्वस्थ और सशक्त भारत के निर्माण के लिए आवश्यक है कि हर नागरिक की दिनचर्या स्वस्थ बनी रहे। उन्होंने कहा कि इसके लिए समय-समय पर अनेक प्रकार के अभियान भारत सरकार के सहयोग से राज्य सरकार चलाती है। मुख्यमंत्री रविवार को राजधानी के वीरांगना अवन्तीबाई महिला चिकित्सालय में बच्चों को पोलियो ड्राप पिलाकर पल्‍स पोलिया अभियान शुभारम्भ करने के दौरान बोल रहे थे।

पल्‍स पोलिया अभियान

उन्होंने कहा कि थोड़ी सी लापरवाही कैसे एक बच्चे के पूरे भविष्य को खराब कर सकती है, पोलियो के ऐसे अनगिनत मामले हम सबको पूर्व में देखने को मिले हैं। उन्होंने कहा कि लेकिन, विश्व स्वास्थ्य संगठन और यूनिसेफ जैसी संस्थाओं के सहयोग से भारत ने अपनी सवा सौ करोड़ की आबादी को सफलतापूर्वक पोलियो जैसी बीमारी से बचाने के लिए एक बड़ी भूमिका का निर्वहन किया है, यह दुनिया के अन्दर एक उदाहरण है।

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मुख्यमंत्री ने कहा कि देश में पोलियो का अन्तिम केस 2010 में देखने को मिला। वहीं मार्च 2014 में भारत को पोलियो से मुक्त घोषित कर दिया गया, लेकिन पाकिस्तान, अफगानिस्तान नाइजीरिया जैसे देश देशों में पोलियो के मामले अभी भी देखने को मिल रहे हैं। वहां का संक्रमण भारत के अंदर न फैले, इसके मद्देनजर पल्‍स पोलिया अभियान निरन्तर चलाए जाने की आवश्यकता है। मुख्यमंत्री ने कहा कि इसी वजह से हम इस अभियान के साथ जुड़ रहे हैं।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक समय कहा जाता था कि उत्तर प्रदेश का स्वास्थ्य ढांचा बेहद खराब है। इसलिए यहां पर लोगों के सामने स्वस्थ रहने और अपनी स्वस्थ दिनचर्या को आगे बढ़ाने की चुनौती है। लेकिन, हमारे चिकित्सकों, स्वास्थ्य कर्मियों का अभिनंदन हैा, जिन्होंने एक वर्ष के अंदर यह साबित किया है कि भले ही किन्हीं परिस्थितियों के कारण उत्तर प्रदेश के अंदर हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर किसी समय में बुरा रहा हो। लेकिन, हमारा आत्मबल, हमारा टीमवर्क और दृढ़ इच्छा शक्ति हमें परिणाम देने में किसी से पीछे नहीं रखेगी।

मुख्यमंत्री ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी का आभार जताते हुए कहा कि उनके नेतृत्व में पिछले तीन—साढ़े तीन वर्षों में राज्य के हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत करने में सफलता प्राप्त हुई। आज उसी का परिणाम है कि 1947 से लेकर 2016 तक प्रदेश के अंदर कुल 12 राजकीय मेडिकल कॉलेज थे और आज हम लोग 30 नए मेडिकल कॉलेज प्रदेश के अंदर बना रहे हैं। जिला अस्पतालाओं को उच्चीकृत करने से लेकर हर जिले में लाइफ सपोर्ट एम्बुलेंस की व्यवस्था की गई है। 

मुख्यमंत्री ने कहा प्रदेश के अंदर कोरोना के जब पहला मामला आया था तब राज्य में जांच की सुविधा नहीं थी। आज उत्तर प्रदेश  देश के अंदर लगभग पौने दो लाख से लेकर दो लाख तक टेस्ट प्रतिदिन करने में सक्षम है। उन्होंने कहा कि इसी तरह जब राज्य में कोरोना के मामले आना शुरू हुआ तो भारत सरकार ने अवगत कराया कि प्रदेश के 36 जनपदों ऐसे हैं जहां पर वेंटिलेटर नहीं है। उन्होंने कहा कि वहीं आज प्रदेश के 75 जिलों में से कोई भी ऐसा नहीं है, जिसके पास अपने कम से कम 10 वेंटिलेटर ना हो। मुख्यमंत्री ने कहा हमने वेंटिलेटर उपलब्ध कराने से लेकर अपने स्टाफ को भी प्रशिक्षण दिया और सब ने पूरी तन्मयता के साथ परिणाम दिया।

मुख्यमंत्री ने कहा कि इसकी वजह से पौने दो करोड़ की आबादी वाले राज्य दिल्ली में कोरोनो से जहां साढ़े दस हजार से ज्यादा मौते हुईं। वहीं 24 करोड़ की आबादी वाला राज्य होने के बावजूद यहां मृतकों की संख्या मात्र साढ़े आठ हजार हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि हम मौत को आंकड़ों में जोड़कर नहीं दे सकते। लेकिन, फिर भी यह हमारे सामूहिक प्रयासों के परिणाम को बताता है।

चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग के परिवार कल्याण निदेशालय के मुताबिक प्रदेश में इस बार 3.40 करोड़ बच्चों को पोलियो प्रतिरक्षण की खुराक पिलाने का लक्ष्य है। पल्‍स पोलिया अभियान के लिए पूरे राज्य में 1.10 लाख बूथ बनाये गए हैं। 69,000 टीमों को घर-घर जाकर बच्चों को खुराक पिलाने का जिम्मा सौंपा गया है। मोबाइल टीमों की संख्या 1700 है, जबकि 65,000 ट्रांजिट टीमें और 23,000 सुपरवाइजर हैं।

उत्तर प्रदेश पिछले लगभग 11 वर्षों से पोलियो मुक्त स्थिति को सफलतापूर्वक बनाये हुए है। प्रदेश में पोलियो का अन्तिम मामला 21 अप्रैल 2010 को फिरोजाबाद जिले में पाया गया था। ये बीमारी जब तक पूरे विश्व से पूरी तरह खत्म नहीं हो जाती, इसके लिए निरंतर प्रयास करते रहने की आवश्यकता को समझा गया है। इसके देखते हुए प्रदेश में पोलियो प्रभावित देशों से आने वाले यात्रियों और घुमन्तु परिवार और मजदूरों के परिवारों को भी पोलियो की वैक्सीन से प्रतिरक्षित किया जाता है।

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