यूपी में एस्मा बढ़ाने पर कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी का तीखा हमला, कहा – तानाशाही कर रही है सरकार

उत्तर प्रदेश सरकार ने अगले छह महीने के लिए कर्मचारियों की हड़ताल और विरोध प्रदर्शन पर रोक लगाने को लेकर विपक्ष ने तीखा हमला बोला है। कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर तानाशाही पर उतारू होने का आरोप लगाया है। सोशल मीडिया साइट्स फेसबुक पर उन्होंने आगे लिखा, ‘उत्तर प्रदेश के कर्मचारी संगठनों की तमाम मांगें लंबित हैं। उन्होंने पंचायत चुनावों में बहुतों को खोया है। सरकार उनके साथ बैठकर बात करने की बजाए प्रदेश में तीसरी बार एस्मा लगा रही है। सरकार की नीति कर्मचारियों के लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है।’

दरअसल, उत्तर प्रदेश सरकार ने तीसरी बार उत्तर प्रदेश अतिआवश्यक सेवा अनुरक्षण अधिनियम (एस्मा) को अगले छह महीने तक बढ़ा दिया है। 25 मई, 2021 को जारी अधिसूचना के मुताबिक, सरकार ने लोकहित में एस्मा को अगले छह महीने के लिए बढ़ाने का फैसला किया है। इससे उत्तर प्रदेश सरकार, उसके अधीन किसी संस्था या निगम और स्थानीय प्राधिकरण के कर्मचारी हड़ताल नहीं कर सकेंगे।

हालांकि, इसे कर्मचारियों के असंतोष को दबाने के लिए कदम के तौर पर देखा जा रहा है। दरअसल, कोरोना की दूसरी लहर और पंचायत चुनाव के दौरान ड्यूटी के दौरान कोरोना संक्रमण की चपेट में आकर कर्मचारियों ने जान गंवाई है। खास तौर पर शिक्षा विभाग में सबसे ज्यादा 1,621 शिक्षकों, शिक्षा मित्रों और अनुदेशकों का निधन होने की बात सामने आई है। कर्मचारी संगठन अपने साथी कर्मचारियों के पुनर्वास के लिए आवाज उठा रहे हैं।

इसके अलावा उत्तर प्रदेश में कर्मचारियों का महंगाई भत्ता भी बीते डेढ़ साल से रुका हुआ है। प्रदेश सरकार ने 2021-22 के लिए पेश बजट में कर्मचारियों का महंगाई भत्ता देने के लिए लगभग 16 हजार करोड़ रुपये का प्रस्ताव किया था। लेकिन यह अभी तक कर्मचारियों को नहीं मिल पाया है। इसको लेकर भी कर्मचारियों में असंतोष बढ़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि यह असंतोष चुनावी साल में आंदोलन के रूप में सामने न आ जाए, इसी लिए एस्मा को विस्तार दिया गया है।

एक और बात है, जिसे एस्मा को तीसरी बार विस्तार देने के पीछे वजह मानी जा रही है। हमेशा ही उत्तर प्रदेश में चुनावी साल में कर्मचारियों और बेरोजगारों के धरना-प्रदर्शन तेज हो जाते हैं। इसका मकसद मौजूदा सरकार से मांगें मनवाना या उसे विपक्ष के मेनिफेस्टों में प्रमुखता से जगह दिलाना होता है। इसी आधार पर कर्मचारी मतदान करने के बारे में भी फैसला करते हैं। चूंकि, उत्तर प्रदेश में पुरानी पेंशन बहाली कर्मचारियों की मांग कई साल से लंबित है, जिसे इस बार भी पुरजोर तरीके से उठाए जाने का अनुमान है। इसकी वजह है कि चुनाव साल में सरकार के पास बहुत आक्रामक होने का मौका नहीं होता है। अब सरकार ने एस्मा को विस्तार देकर इस संभावना को फिलहाल के लिए रोक दिया है।

इसके अलावा बेरोजगारों का तबका भी है, जो एस्मा के दायरे में नहीं आता है. लेकिन चुनावी साल में सक्रिय होकर सरकार पर दबाव बनाने और रोजगार पाने के लिए प्रयास करता है। उत्तर प्रदेश सरकार ने एस्मा को विस्तार देकर ऐसे तमाम धरना-प्रदर्शनों को लेकर अपने सख्त रुख का संकेत देने की कोशिश की है। लेकिन कर्मचारियों के व्यवहार को जानने वाले बताते हैं कि कर्मचारियों को लेकर तत्कालीन सरकार का सख्त रुख उसे चुनाव में नुकसान ही पहुंचाता है।

Related Articles

Back to top button
E-Paper