यूएपीए के तहत कार्रवाई की सिफारिश करने के लिए प्राधिकरण का गठन

उत्तर प्रदेश सरकार ने विधिविरुद्ध गतिविधि निवारण अधिनियम (यूएपीए) को लेकर एक बड़ा फैसला किया है। इसके तहत कार्रवाई करने की सिफारिश करने के लिए सरकार ने एक प्राधिकरण का गठन किया है। इसमें हाईकोर्ट के रिटायर्ड जज और प्रमुख सचिव न्याय सदस्य होंगे। इसके अलावा रिटायर्ड मुख्य सचिव भी विधायी सदस्य होंगे। फिलहाल इसे एक साल के लिए गठित किया गया है। एक साल बाद इसकी समीक्षा की जाएगी।

सरकार ने प्राधिकरण को मामलों की समीक्षा करने और सबूतों की जांच करने की जिम्मेदारी सौंपी है। प्राधिकरण इसी भआधार पर यूएपीए एक्ट के तहत किसी व्यक्ति पर मामला चलाने के बारे में सुझाव देगा।

दरअसल, यूएपीए के दुरुपयोग का मामला लगातार उठता रहता है। सबसे अहम यह है कि पुलिस यूएपीए के तहत अक्सर जिन लोगों को गिरफ्तार करती है, वे अदालत से छूट जाते हैं, क्योंकि आरोपों का समर्थन करने वाले पर्याप्त सबूत नहीं होते हैं। माना जा रहा है कि इस प्राधिकरण के गठन से जल्दबाजी में यूएपीए के तहत दर्ज होने वाले मामलों को रोका जा सकता है।

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