लगातार आ रही थी कोरोना रिपोर्ट निगेटिव, लंग्स इन्फेक्शन ने फेफड़ों का बजाया बैंड

राजस्थान में कोरोना ने हाहाकार मचा दिया है। कोरोना संक्रमण के बारे में आ रही जानकारियां लगातार चिंता बढ़ा रही हैं। जहां अब कोरोना साइलेंट अटैक कर रहा है। इसकी रिपोर्ट तो निगेटिव आती रहती है, लेकिन दर्द, थकान, कमजोरी और सांस लेने में परेशानी जैसे लक्षणों के साथ फेफड़ों का इंफेक्शन बढ़ता रहता है। ये कितना घातक है, इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है।

कोरोना

अगस्त माह के मुकाबले सितंबर माह में लंग्स इन्फेक्शन के मामले 4 प्रतिशत तक बढ़े हैं। अकेले जयपुर में अब तक 9 से ज्यादा मरीज ऐसे सामने आए हैं, जिनकी कोरोना के रिपोर्ट हर बार निगेटिव आती रही है लेकिन फेफड़ों में अंदर ही अंदर सक्रमण होता रहा।

डॉक्टर्स का कहना है कि कोरोना रिपोर्ट नेगटिव होने के बाद भी फेफड़े संक्रमण का शिकार हो रहे हैं। डॉक्टर ने बताया अभी सीटी स्केन करवाने वाले मरीजों में 65 प्रतिशत से ज्यादा मरीजों के लंग्स में इन्फेक्शन पाया गया है।

कोरोना के लक्षण

पहले खांसी, बुखार और जुखाम कोविड के लक्षण माने जाते थे, लेकिन अब सांस लेने में समस्या, कमजोरी, थकान और दर्द मुख्य लक्षण हो गए हैं। राजस्थान की राजधानी जयपुर में कई मरीजों को निमोनिया हुआ और लंग्स इंफेक्शन तेजी से फैल गया।

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60 से 70 प्रतिशत रिजल्ट सही

एक्सपर्ट डॉक्टर की मानें तो उनका कहना है कि जो RT-PCR टेस्ट हो रहे हैं, उनका 60 से 70 प्रतिशत रिजल्ट सही आ रहा है। डॉक्टर्स का कहना है कि आपकी रिपोर्ट निगेटिव आ चुकी है, उसके बाद भी आपको थकान, दर्द, कमजोरी या स्वाद नहीं आ रहा तो इसे नजरअंदाज न करें। जल्द से जल्द सीटी स्कैन या एक्स रे करवाएं। इससे फेफड़ों के इन्फेक्शन का पता लग सकेगा।

राजस्थान में 50 प्रतिशत से ज्यादा केस

एसएमएस मेडिकल कॉलेज के डॉक्टर ने बताया चेस्ट के सिटी स्केन की रिपोर्ट 98 प्रतिशत तक सही आ रही है, जो भी कोविड मरीज है। इसलिए केवल RT-PCR पर निर्भर नहीं रहें। आजकल राजस्थान में 50 प्रतिशत से ज्यादा ऐसे केस आ रहे हैं जिनको जुखाम, बुखार ना होकर थकान, दर्द, कमजोरी और मुंह का टेस्ट खराब हो रहा है।

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राजस्थान का कोविड-19 डेडिकेटेड सरकारी अस्पताल (RUHS) में काम रहे रेजिडेंट डॉक्टर ने कहा कि अभी अगस्त माह के बाद ऐसे मरीज बढ़ रहे हैं जिनके लंग्स में 90 प्रतिशत से ज्यादा इन्फेक्शन हो रहा है। इसलिए अभी ऑक्सीजन की डिमांड भी अस्पतालों में बढ़ गयी है।

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