आचार संहिता उल्लंघन में अरविंद केजरीवाल को कोर्ट ने दी राहत, ज़मानत अर्जी हुई मंज़ूर

सुलतानपुर। आम आदमी पार्टी (आप) संयोजक एवं दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल को आदर्श आचार संहिता के उल्लंघन समेत दाे मामलों में सोमवार को यहां एमपी-एमएलए कोर्ट ने जमानत दे दी।

आचार संहिता

न्यायाधीश पी के जयंत की अदालत ने आज सुनवाई के बाद जमानत अर्जी मंजूर की। श्री केजरीवाल के अधिवक्ता मदन सिंह ने पत्रकारों को बताया कि 2014 में चुनाव के दौरान चुनाव अचार संहिता में अमेठी जिले के गौरीगंज और मुसाफिरखाना में दो अलग अलग केस दर्ज हुआ था। अरविंद केजरीवाल ने दोनो मामलों में उच्चतम न्यायालय में एक रिट दायर की थी, जिसमें व्यक्तिगत रुप से उन्हें यहां उपस्थित रहने से छूट मिली हुई थी।

उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री और एक जिम्मेदार नागरिक होने के नाते आचार संहिता मामले में अरविंद केजरीवाल चाहते थे कि मुकदमे की प्रक्रिया जल्द सम्पन्न हो और न्यायालय में सहयोग दें, इसलिए वह स्वेच्छा से न्यायालय में हाजिर हुए। मुकदमें में उन्होंने जमानत का आवेदन किया, जिसे न्यायालय ने मंजूर कर लिया। एक मुकदमे में आरोप तय हुआ है तथा दूसरे मुकदमे में डिस्चार्ज एप्लीकेशन दी है, जिसमें न्यायालय ने तीन नवंबर की तिथि तय की हैं। श्री सिंह ने बताया कि श्री कुमार विश्वास की ओर से मुकदमा वापस लेने की अर्जी दी गई थी जो खारिज हो गई है।

ज्ञातव्य है कि 2014 में लोकसभा चुनाव के दौरान गौरीगंज एवं मुसाफिरखाना थाने में तत्कालीन आम आदमी पार्टी के लोकसभा प्रत्याशी कुमार विश्वास के प्रचार के दौरान दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल समेत अन्य आरोपियों के खिलाफ मुकदमा दर्ज हुआ था। गौरीगंज से जुड़े मामले में पुलिस ने अरविंद केजरीवाल, कुमार विश्वास, हरीकृष्ण, राकेश तिवारी अजय सिंह, बब्लू तिवारी के खिलाफ आरोप पत्र दाखिल किया है। मामला एमपी-एमएलए की विशेष अदालत में चल रहा है।

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अरविंद केजरीवाल और कुमार विश्वास की तरफ से उच्चतम न्यायालय में व्यक्तिगत उपस्थिति में छूट देने की याचिका दाखिल की गई थी, जिस पर सुनवाई के बाद अदालत ने उन्हें अग्रिम आदेश तक हाजिरी से छूट प्रदान की थी। सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका करीब छह वर्षों से विचारधीन रही। अभियोजन की तरफ से पैरवी में कोई रुचि ही नही ली जा रही थी जिसका नतीजा है कि मुकदमे की कार्यवाही काफी समय से लम्बित है।

मामले में गैरहाजिर रहने की वजह न बताने के कारण कोर्ट ने बीती पेशियों पर कुमार विश्वास के खिलाफ बी-डब्ल्यू वारंट जारी करने का भी आदेश दिया था। जिस पर उनकी तरफ से पैरवी कर रहे अधिवक्ता कई पेशियों से सुप्रीम कोर्ट में याचिका पेंडिंग होने का हवाला देकर जारी वारंट सम्बन्धी आदेश निरस्त कराने के प्रयास में लगे हुए हैं। जिसमें अभी तक कोई सफलता नही मिली।

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