वैक्सीन की केंद्रीकृत खरीद की मांग तेज, विपक्षी नेताओं ने उठाई आवाज

कोरोना वायरस से बचाव में वैक्सीन को कारगर उपाय माना जा रहा है। लेकिन वैक्सीन की कमी इसमें आड़े आ रही है। पहली डोज और दूसरी डोज पाने वालों की संख्या में भारी अंतर बना हुआ है। इतना ही नहीं, 18-44 वर्ष आयुवर्ग के लिए वैक्सीन रफ्तार नहीं पकड़ पा रहा है। वैक्सीन की कमी के चलते दिल्ली और पंजाब ने 18 साल से अधिक उम्र के लोगों का टीकाकरण बंद हो गया है।

विपक्ष वैक्सीन की कमी के लिए केंद्र की नीति की जिम्मेदार ठहरा रहा है। सोमवार को कांग्रेस नेता और लोक सभा सांसद राहुल गांधी ने ट्विटर पर लिखा, ‘महामारी को रोकने में वैक्सीन की महत्वपूर्ण भूमिका है, लेकिन केंद्र सरकार परवाह करते नहीं दिखती है।’ इसके साथ उन्होंने अप्रैल के मुकाबले मई में टीकाकरण में गिरावट को दिखाने वाले आंकड़े भी पेश किए। वहीं, एक अन्य ट्वीट में राहुल गांधी ने लिखा, ‘वैक्सीन की ख़रीद केंद्र करे और वितरण राज्य – तभी हर गांव तक वैक्सीन की सुरक्षा पहुंच सकती है। ये सीधी-सी बात केंद्र सरकार को समझ क्यों नहीं आती?’ दरअसल, अप्रैल में केंद्र सरकार ने वैक्सीन की खरीद नीति में बदलाव कर दिया था और राज्यों को वैक्सीन निर्माताओं से सीधे वैक्सीन खरीदने की छूट दे दी थी।

वैक्सीन खरीद को लेकर केंद्र सरकार की नीति पर दिल्ली के उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी सवाल उठाए हैं। उन्होंने इस बारे में केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्री डॉ. हर्ष वर्धन को एक चिट्ठी भी लिखी है। इसमें उन्होंने लिखा, ‘केंद्र सरकार ने अप्रैल में वैक्सीन की नीति में अचानक बदलाव कर दिया और राज्यों से युवाओं के वैक्सीनेशन के लिए वैक्सीन का खुद इंतजाम करने के लिए कह दिया। भारत सरकार ने देश के दो प्रमुख वैक्सीन निर्माताओं को केंद्र और राज्य सरकारों के लिए वैक्सीन के अतार्किक दाम तय करने की भी छूट दे दी।’ उपमुख्ममंत्री मनीष सिसोदिया ने आगे लिखा कि उनकी सरकार ने टीकाकरण के लिए टीका कंपनियों को ऑर्डर दिया, लेकिन कंपनियों ने सप्लाई करने से इनकार कर दिया है। उनके मुताबिक, कंपनियों ने दलील दी है कि केंद्र की ओर से तय कोटे के चलते दिल्ली को कोवैक्सीन की डेढ़ लाख और कोविशील्ड की 6.67 लाख वैक्सीन डोज ही मिल सकती है, इसलिए दिल्ली में 18 साल से ऊपर के लोगों के लिए 23 मई से टीकाकरण को बंद करना पड़ा है।

उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने अपने पत्र में यह भी लिखा कि उनकी सरकार ने वैश्विक स्तर पर फाइजर और मॉडर्ना जैसी वैक्सीन निर्माता कंपनियों से भी संपर्क किया था। लेकिन उन कंपनियों ने अपने जवाब में कहा है कि वे सिर्फ भारत सरकार के साथ सौदा करेंगी, राज्य सरकार के साथ नहीं। उन्होंने आगे लिखा कि दिल्ली और दूसरे कई राज्यों ने वैक्सीन आपूर्ति के लिए ग्लोबल टेंडर निकाला है, लेकिन सभी असफल हो रहे हैं, क्योंकि वैक्सीन निर्माता कंपनियां केवल भारत सरकार के साथ सौदा करने की इच्छुक हैं। दिल्ली के मुख्यमंत्री ने अपनी चिट्ठी के अंत में केंद्र से आगे आने और वैक्सीन की केंद्रीकृत खरीद करने की अपील की है, ताकि लोगों को जानलेवा कोरोना वायरस से सुरक्षा दी जा सके।

दिल्ली से पहले पंजाब सरकार को भी फाइजर और मॉडर्ना ने वैक्सीन सप्लाई करने से इनकार कर दिया था। इस पर केंद्र सरकार ने कहा है कि दोनों ही कंपनियों के साथ बातचीत चल रही है और वे जल्द ही टीके की उपलब्धता के बारे में जानकारी देंगी।

इस बीच केरल के मुख्यमंत्री पिनराई विजयन ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को चिट्ठी लिखी है और केंद्र के स्तर पर ग्लोबल टेंडर निकालने की अपील की है। उनका कहना है कि अगर सभी राज्य सरकारें ग्लोबल टेंडर निकालेंगी तो इस प्रतियोगिता की वजह से टीके के दाम बढ़ जाएंगे। उन्होंने कहा कि अगर केंद्र सरकार ही ग्लोबल टेंडर निकालता है तो टीके की कीमत को घटाने में मदद मिलेगी।

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