अनोखा: बेगुनाह होने के बावजूद जेल में बंद हैं दो मुर्गे, ये है रिहाई की शर्त

जेल

अगर बदमाश कोई भी हत्या या लूट की घटना को अंजाम देता है तो जेल जाना निश्चित है। लेकिन अगर बेगुनाह जेल चला जाए तो लोगों की आंख भर आती है। हालांकि ऐसे में कई मामलों में गए बेगुनाह जेल की सजा काट भी रहे हैं और कितनों ने काटी भी है। लेकिन अगर वो बेगुनाह इंसान न होकर मुर्गे हों तो मामले में दिलचस्पी आ जाती है।

जानकारी के अनुसार तेलंगाना स्थित नेल्लोर जिले के एक जेल में दो बेगुनाह मुर्गे पिछले 25 दिनों से बंद हैं। इन मुर्गों पर भले ही मानवाधिकार का मामला न बन रहा हो लेकिन मासूमों की कैद पर सवाल खड़ा हो जाता है। इसलिए जब मुर्गों के जेल में कैद होने की खबर फैली तो पूछताछ होने लगी।

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इस मामले में पुलिस का कहना है कि ये मुर्गे गुनहगार की तरह नहीं बल्कि बतौर सबूत जेल में बंद किए गए हैं। मकर संक्रांति के मौके पर तेलंगाना में कुछ लोगों ने मुर्गों की फाइट पर सट्टेबाजी की थी। पुलिस ने मौके पर पहुंच कर कुछ सट्टेबाजों को गिरफ्तार कर लिया, उनके पास ये दो मुर्गे भी थे, साथ में ये भी जेल लाए गए।

अब सट्टेबाज तो जमानत पर रिहा होकर जेल से निकल गए लेकिन मुर्गों की जमानत नही हुई। इसलिए ये बेचारे मुर्गे बेगुनाह होने के बावजूद भी जेल में बंद हैं। अब ये रिहा कैसे होंगे,ये सवाल लोगों के जहन में आ रहा होगा।

अदालत का आदेश हैं कि ये बेजुबान सबूत के तौर पर पेश होंगे इसलिए पुलिस की जिम्मेदारी बनती है कि वो इनको सुरक्षा मुहैया करवाए और इनका दाना पानी करे। सुनवाई के दौरान इन्हें सबूत के तौर पर अदालत में पेश किया जाएगा।

इसके बाद इनकी रिहाई हो जाएगी लेकिन जमानत नहीं होगी। क्योंकि इनका कोई मालिक नहीं है, इसलिए इनकी बोली लगाई जाएगी। जो सबसे ज्यादा पैसों की बोली लगाएगा, ये मुर्गे उसके सुपर्द कर दिए जाएंगे।

गौरतलब है कि इससे पहले ऐसी ही एक खबर पाकिस्तान से आई थी। जहां मीरपुर इलाके में अदालत के आदेश के बाद पांच मुर्गों को पांच महीने की जेल काटने के बाज रिहा किया गया था। वहां भी मुर्गों की लड़ाई का मामला था। मुर्गों की लड़ाई पर कुछ लोगों ने सट्टा लगाया था जिसके दौरान पुलिस ने रेड मारकर सट्टेबाजों समेत मुर्गों को पकड़ लिया था। सट्टेबाज तो रिहा हो गए लेकिन पांच महीने तक मुर्गे जेल में रहे। आखिर में मीरपुर मथेलो अदालत ने मुर्गों की रिहाई का ऑर्डर दिया था।

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