इस दिन मनाई जाएगी देवउठनी एकादशी, पांच महीने में पड़ेंगे केवल 8 विवाह मुहूर्त

देवउठनी एकादशी इस बार 25 नवम्बर को मनाई जाएगी। इस एकादशी को प्रबोधिनी एकादशी या देवउठनी एकादशी भी कहा जाता है। इसको लेकर ज्‍योति‍षी ने बताया कि एकादशी तिथि का प्रारंभ 25 नवम्बर बुधवार सुबह 2.42 बजे से होगा तथा 26 नवम्बर सुबह 5.10 बजे तक रहेगा। आषाढ़ मास के शुक्ल पक्ष की एकादशी को भगवान विष्णु चार माह के लिए सो जाते हैं और कार्तिक माह के शुक्ल पक्ष की एकादशी को जागते हैं। चार माह की इस अवधि को चतुर्मास कहते हैं। देवउठनी एकादशी के दिन ही चतुर्मास का अंत हो जाता है और शुभ काम शुरु किए जाते हैं। विवाह मुहूर्त 25 नवंबर देवउठनी एकादशी से शुरु होंगे। क्योंकि इस दिन भगवान विष्णु का शयनकाल समाप्त हो जाएगा। 25 नवंबर से 11 दिसंबर तक के बीच में कुल 8 विवाह मुहूर्त रहेंगे। फिर 15 दिसम्बर से खरमास लग जाएगा।

देवउठनी एकादशी

2021 में 24 अप्रैल से बजेंगी शहनाई

शादी ब्याह के मुहूर्त जनवरी से प्रारंभ हो जाते हैं, लेकिन वर्ष 2021 में मांगलिक कार्यों को करने के लिए अप्रैल तक का इंतजार करना पड़ेगा। ज्‍योतिषाचार्य के मुताबिक जनवरी से मार्च तक गुरु व शुक्र ग्रह के अस्त रहने पर मुहूर्त नहीं रहेंगे। 15 जनवरी 2021 को गुरु ग्रह अस्त हो जाएंगे और 12 फरवरी 2021 को उदय होंगे। हालांकि 16 फरवरी को बसंत पंचमी पर अबूझ मुहूर्त वाला दिन होने के कारण इस दिन विवाह किया जा सकता है। शुक्र ग्रह 14 फरवरी 2021 से अस्त हो जाएंगे, क्योंकि शुक्र ग्रह सभी सुख-सुविधाओं का मुख्य कारक है। इसके अतिरिक्त यह नैसर्गिक रुप से भी शुभ ग्रह है। यही कारण है कि सभी प्रकार के मांगलिक कार्यों में शुक्र ग्रह का अस्त होना त्याज्य माना गया है। विवाह में गुरु बल भी अत्यधिक आवश्यक होता है। अत्यंत शुभ ग्रह होने के कारण जब बृहस्पति अस्त होता है अर्थात सूर्य के समीप आ जाता है तो यह स्थिति बृहस्पति के शुभ प्रभाव में कमी का कारण बन जाती है। 22 अप्रैल 2021 से दिसंबर तक करीब 46 विवाह मुहूर्त रहेंगे।

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