नागर विमान महानिदेशालय का डिजीटल अवतार,जल्द ई-डीजीसीए नाम से जाना जायेगा

नयी दिल्ली. देश के विमानन क्षेत्र के इतिहास में एक नया अध्याय प्रारंभ करते हुए नागर विमानन महानिदेशालय (डीजीसीए) ने आज से अपने डिजीटल स्वरूप में ई-नागर विमान महानिदेशालय (ई-डीजीसीए) के नाम से काम करना शुरू कर दिया।

        केन्द्रीय नागरिक उड्डयन मंत्री ज्योतिरादित्य सिंधिया ने आज यहां एक कार्यक्रम में डीजीसीए के इस नये अवतार का उद्घाटन किया। इस मौके पर नागरिक उड्डयन सचिव राजीव बंसल, डीजीसीए के महानिदेशक अरुण कुमार, मंत्रालय में संयुक्त सचिव सत्येन्द्र मिश्र एवं टाटा कन्सल्टेंसी सर्विसेज़ में हेड, गवर्नमेंट बिजनेस तेज बाटला मौजूद थे।

       इस अवसर पर समारोह को संबोधित करते हुए सिंधिया ने कहा, “डीजीसीए अब बीते जमाने की बात हो गयी है। अब ई-जीसीए है जो ग्राहकों को केन्द्र में रख कर देश के विमानन क्षेत्र की नियामक व्यवस्था में बदलाव लायेगा।” उन्होंने कहा कि नागरिक उड्डयन के सुरक्षा एवं नियामक मामलों को नियंत्रित करने वाली यह शीर्ष संस्था अपने नये अवतार में कार्यदक्षता, पारदर्शिता के साथ देश के विमानन क्षेत्र में क्रांतिकारी बदलाव लाएगी।

         उन्होंने कहा कि ई-जीसीए में 298 प्रकार की सेवाओं को समाहित किया गया है। ई-जीसीए के माध्यम से पायलट लाइसेंस से लेकर विमानों के पंजीकरण और उड़ानों के लिए विभिन्न प्रकार की स्वीकृतियां अविलंब ऑनलाइन मिला करेंगी। आवश्यक दस्तावेज़ों को ऑनलाइन डाउनलोड कराया जा सकेगा। इस प्रकार से अब तक जिन कामों में एक माह से अधिक समय लगा करता था, वे काम अब अधिकतम तीन से चार दिन में हो जाएंगे। अब पायलट लॉग बुक को भी मोबाइल ऐप पर लाया गया है जिससे बड़ी मात्रा में कागज़ी कार्यवाही की जरूरत नहीं होगी।

      सिंधिया ने कहा कि सरकार अब प्रतिबंधात्मक नियामन की बजाय रचनात्मक सहभागिता की ओर जा रही है।  प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के विज़न के मुताबिक न्यूनतम सरकार अधिकतम शासन के मंत्र पर ये तकनीकी सुधार किये जा रहे हैं। डीजीसीए के नये डिजीटल अवतार के प्रदर्शन को लेकर विभिन्न पक्षकारों के साथ उनका मंत्रालय निरंतर संपर्क में रहेगा और लगातार विचार मंथन करते हुए जानेगा कि कहां क्या नहीं हो पा रहा है और क्या करने की जरूरत है, इस फीडबैक के साथ डिजीटल प्रणाली में निरंतर सुधार की यात्रा चलती रहेगी।

         नागर विमानन सचिव बंसल ने कहा कि ई-जीसीए का शुभारंभ हमारे लिए एक गौरवपूर्ण क्षण है और यह कार्य ऐसे मौके पर हो रहा है जब देश स्वच्छ भारत अभियान के दूसरे चरण में जा रहा है और देश की स्वतंत्रता के 75 वर्ष पूरे होने के मौके पर आज़ादी का अमृत महोत्सव मना रहा है।

        डीजीसीए के महानिदेशक अरुण कुमार ने बताया कि ई-जीसीए परियोजना में नागर विमानन महानिदेशालय की हजारों फाइलों के तीन करोड़ से अधिक पृष्ठों को डिजीटाइज़्ड किया गया है। सबसे पहले इस परियोजना को संयुक्त प्रगतिशील गठबंधन की सरकार में स्वीकृत किया गया था जिसे 2015 में पूरा होना था लेकिन उस दिशा में कोई कदम नहीं उठाये गये। बाद में मध्य 2019 में इसे दोबारा शुरू किया गया तथा टाटा कन्सल्टेंसी सर्विसेज़ और प्राइस वाटरहाउस कूपर्स को इसे क्रियान्वित करने के लिए चुना गया।

         अरुण कुमार के अनुसार इसे दिसंबर 2020 में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया था लेकिन कोविड महामारी एवं लॉकडाउन के कारण इसमें थोड़ा विलंब हुआ। लॉकडाउन में भी पूरी टीम ने जोरशोर से काम करके इसे अंजाम तक पहुंचा दिया। टाटा कन्सल्टेंसी सर्विसेज़ और प्राइस वाटरहाउस कूपर्स को ई-जीसीए के परिचालन एवं अनुरक्षण के लिए पांच साल यानी अगस्त 2026 तक के लिए अनुबंधित किया गया है। पांच साल बाद इसकी समीक्षा की जाएगी और सब कुछ ठीक रहा तो अनुबंध आगे बढ़ाया जाएगा।

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