68 साल के हुए डिस्को किंग बप्पी लहरी, डिस्को संगीत से लोगों को बनाया दीवाना

बॉलीवुड में बप्पी लहरी का नाम एक ऐसे संगीतकार-पार्श्वगायक के तौर पर शुमार किया जाता है जिन्होंने डिस्को संगीत से लोगों को दीवाना बनाया। बप्पी लाहिरी ने ताल वाद्ययंत्रों के प्रयोग के साथ फिल्मी संगीत में पश्चिमी संगीत का समिश्रण करके ‘डिस्कोथेक’ की एक नई शैली ही विकसित की है। अपने इस नए प्रयोग की वजह से बप्पी लाहिरी को कैरियर के शुरुआती दौर में काफी आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा, लेकिन बाद में श्रोताओं ने उनके संगीत को काफी सराहा और वह फिल्म इंडस्ट्री में ‘डिस्को किंग’ के रूप में विख्यात हो गए।

बप्पी लहरी

27 नवंबर, 1952 को पश्चिम बंगाल के कोलकाता शहर में जन्मे बप्पी लाहिरी का मूल नाम आलोकेश लाहिरी था। उनका रुझान बचपन से ही संगीत की ओर था। उनके पिता अपरेश लाहिरी बंगाली गायक थे, जबकि मां वनसरी लाहिरी संगीतकार और गायिका थी। माता-पिता ने संगीत के प्रति बढ़ते रुझान को देख लिया और इस राह पर चलने के लिए प्रेरित किया।

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बचपन से ही बप्पी लाहिरी यह सपना देखा करते थें कि संगीत के क्षेत्र में वह अंतरराष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कर सकें। महज तीन वर्ष की उम्र से ही उन्होंने तबला बजाने की शिक्षा हासिल करनी शुरू कर दी। इस बीच उन्होंने अपने माता-पिता से संगीत की प्रारंभिक शिक्षा भी हासिल की। बतौर संगीतकार उन्होंने अपने कैरियर की शुरुआती वर्ष 1972 में प्रदर्शित बंग्ला फिल्म ‘दादू’ से की, लेकिन फिल्म टिकट खिड़की पर नाकामयाब साबित हुई। अपने सपनो को साकार करने के लिए उन्होंने मुंबई का रुख किया।

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