यूपी: ईडब्ल्यूएस कोटे से मंत्री के भाई की नियुक्ति पर बढ़ा विवाद, कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने मांगा जवाब

उत्तर प्रदेश सरकार में बेसिक शिक्षा मंत्री सतीश द्विवेदी के भाई अरुण द्विवेदी की सिद्धार्थ विश्वविद्यालय में नियुक्ति के मामले ने तूल पकड़ लिया है। इसकी वजह है कि अरुण द्विवेदी को आर्थिक रूप कमजोर वर्ग यानी ईडब्ल्यूएस कोटे से मनोविज्ञान विभाग में असिस्टेंट प्रोफेसर पद पर नियुक्त किया गया है। विश्वविद्यालय प्रशासन के मुताबिक, 150 आवेदन आए थे, जिनमें से 10 उम्मीदवारों को साक्षात्कार के लिए बुलाया गया। इसमें सफल होने के बाद अरुण द्विवेदी को ईडब्ल्यूएस कोटे से नियुक्ति दी गई। सोशल मीडिया पर उनकी आर्थिक स्थिति और आय प्रमाण पत्र की सत्यता पर लोग सरकार से जवाब मांग रहे हैं।

इस बीच कांग्रेस महासचिव प्रियंका गांधी ने भी मुख्यमंत्री योगी आदित्नाथ से जवाब मांगा है। अपने फेसबुक पेज उन्होंने लिखा, ‘इस संकटकाल में यूपी सरकार के मंत्रीगण आम लोगों की मदद करने से तो नदारद दिख रहे हैं, लेकिन आपदा में अवसर हड़पने में पीछे नहीं हैं। यूपी के बेसिक शिक्षा मंत्री के भाई गरीब बनकर असिस्टेंट प्रोफेसर की नियुक्ति पा गए। लाखों युवा यूपी में रोजगार की बाट जोह रहे हैं, लेकिन नौकरी “आपदा में अवसर” वालों की लग रही है।’ उन्होंने आगे लिखा, ‘ये गरीबों और आरक्षण दोनों का मजाक बना रहे हैं। ये वही मंत्री महोदय हैं जिन्होंने चुनाव ड्यूटी में कोरोना से मारे गए शिक्षकों की संख्या को नकार दिया और इसे विपक्ष की साज़िश बताया। क्या मुख्यमंत्री जी इस साज़िश पर कोई ऐक्शन लेंगे?’

वहीं, समाजवादी पार्टी की प्रवक्ता जूही सिंह ने ट्विटर पर लिखा, ‘महोदय सतीश द्विवेदी, नैतिकता की हर परिभाषा में भाई को ईडब्ल्यूएस कैटगरी के माध्यम से नियुक्ति दिलवाना भ्रष्टाचार कहा जाता है। ईडब्ल्यूएस समझते हैं न, आर्थिक रूप से कमजोर जनता, जिनके अधिकार की आपने धज्जियां उड़ा दी हैं। सीएम योगी आदित्यनाथ, यही है आपके नेताओं का कृत्य?’

सिद्धार्थ यूनिवर्सिटी के कुलपति डॉ. सुरेंद्र दुबे का कहना है कि विश्वविद्यालय में कुल सात नियुक्तियां की गई हैं। मनोविज्ञान विभाग में दो नियुक्तियां हुई हैं, जिनमें एक ओबीसी पद के लिए हरेंद्र शर्मा और दूसरे ईडब्ल्यूएस कोटे से अरुण द्विवेदी हैं। हालांकि, उनका कहना है कि उन्हें इस बात की जानकारी नहीं थी कि विश्वविद्यालय में नियुक्ति पाने वाले अरुण द्विवेदी बेसिक शिक्षा मंत्री के भाई हैं। कुलपति डॉ. सुरेंद्र दुबे का कहना है कि अरुण द्विवेदी को उनके आवेदन के आधार पर नियुक्ति दी गई है, जिसमें उनके पिता का जिक्र है, लेकिन भाई का कोई जिक्र नहीं है और न ही भाई ने कभी मुझसे कोई प्रत्यक्ष या अपरोक्ष रूप से सिफारिश की है।

इस मामले में एक और बात सामने आई है। कुलपति सुरेंद्र दुबे का कार्यकाल 21 मई को पूरा हो रहा था, लेकिन सरकार ने एक दिन पहले यानी 20 मई को उनका कार्यकाल नियमित कुलपति की नियुक्ति होने तक बढ़ा दिया था। अब इस फैसले को मंत्री के भाई की नियुक्ति से जोड़कर देखा जा रहा है।

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