विकास की ओर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी

Shanti chaudhary

डॉ. शान्ति चौधरी

विज्ञान एक सुविस्तृत विषय है जिसपर विश्वभर में बहुत अधिक कार्य किया जा रहा है। पहले लोगों का मानना था कि कैंसर धनाढ्य लोगों की व्याधि है, गरीब लोगों में कैंसर की बीमारी नहीं होती गरीब किसी अन्य रोग से पीड़ित हो सकते हैं। यह मिथ्या धारण बन चुकी है क्योंकि आज हम देख रहे हैं कि कैंसर से हर वर्ग के लोग पीड़ित हो रहे हैं। इसीतरह भारत मधुमेह की राजधानी होने जा रहा है। आज जरूरत है ऐसी निदान तकनीकों को खेजने की जिससे प्रारम्भिक अवस्था में रोग का निदान हो सके और गरीब व्यक्ति के लिए भी सुविधाएं उपलब्ध हों। इन प्रमुख रोगों के निदान एवं उपचार की अधिक प्रभावी एवं कम खर्चीली विधि सर्व सुलभ कराने की अत्यावश्यकता है।

विज्ञान का क्षेत्र बहुत व्यापक है। इलेक्ट्रॉनिक के क्षेत्र में विकास की बहुत सम्भावनाएं हैं। आज हम लोग नैनो तकनीक में जुटे हुए हैं। मानव कल्याण के लिए इसका उपयोग किया जाना चाहिए। तकनीक का आयात करके हम शक्तिशाली देश नहीं बन सकते हैं। तकनीकी विकास एक दिन में नहीं हो सकता इसके लिए हमें विज्ञान की जड़ें पहले म़जबूत करनी चाहिए, जिसतरह किसी भवन का निर्माण बिना म़जबूत आधार के कर पाना संभव नहीं होता। इस दिशा में आत्मनिर्भर होना अत्यावश्यक है, तभी हम तकनीक का विकास करने में सफल हो पाएंगे।

विज्ञान के क्षेत्र में जब हम म़जबूत होंगे तब अपनी तकनीक विकसित कर सकेंगे । विज्ञान की शिक्षा उच्चस्तरीय हो और वैज्ञानिक शोध संस्थान उत्कृष्ट कोटि के होने चाहिए। कार्य करने की स्वतंत्रता बहुत जरूरी है। नौकरशाही आज हम पर हावी है जो शिक्षा और शोध में नकारात्मक प्रभाव दे रही है। वैज्ञानिकों को यदि अपने देश में अनुकूल वातावरण व शोध की पर्याप्त सुविधाएं उपलब्ध होंगी तो निश्चित रूप से विकास होगा। अधिकांश वैज्ञानिक विदेश पलायन नहीं करेंगे। वर्तमान में हम देश के विकास और प्रगति में अपने वैज्ञानिकों का भरपूर लाभ नहीं ले पा रहे हैं।

हमारा देश कृषि प्रधान देश है। हमें ग्रामीण क्षेत्र के युवा विद्यार्थियों को विज्ञान की ओर प्रेरित करने का प्रयास करना चाहिए। गांव में विज्ञान की शिक्षा पर आज विशेष जोर देने की आवश्यकता है। पढ़ लिखकर ये विद्यार्थी अपने क्षेत्र की आवश्यताओं के अनुवूâल नयी-नयी तकनीवेंâ विकसित करने में सफल हो सकते हैं। विज्ञान की शिक्षा सिर्फ विद्यालय की कक्षा तक ही सीमित न हो बल्कि विद्यार्थियों के मन में यह बात बैठा देनी चाहिए कि विज्ञान का उपयोग आप अपने दैनिक जीवन में विभिन्न रूपों में कर सकते है और अपनी सुविधानुसार नयी-नयी तकनीवेंâ ई़जात कर सकते हैं। विज्ञान की शिक्षा सिर्फ डिग्री लेने के लिए नहीं बल्कि जीवन को सुधारने के लिए हो।

देश के वैज्ञानिक को भारत के विकास की बात को हमेशा घ्यान में रखना चाहिए। शोध व अन्य शिक्षा ग्रहण करने के बाद अपने देश को अपने ज्ञान और अनुभव का काम यदि हमारे देश के वैज्ञानिक दें तो हमारा देश विश्व में अपरी एक अलग पहचान बना सकेगा।

सिर्फ आलोचना से काम नहीं बनता कुछ कमियां हैं सुविधाओं का अभाव है, अनुकूल वातावरण नहीं नाकरशाही हावी है लेकिन फिर भी हमें परिवर्तन लाना होगा। संकल्प दृढ़ होतो कोई कार्य असंभव नहीं है जब हम अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में सर्वोत्म स्थान बना सकते है तो विज्ञान के अन्य क्षेत्रों में क्यो नहीं।

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हमारा देश अपने वैज्ञानिक एवं प्रौद्योगिकी क्षेत्र में उपलब्धियों के लिए विश्व में जाना जाता है। हमारे पौराणिक ग्रन्थ इस बात का प्रमाण हैं कि विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी हमारे देश में प्राचीन काल से बहुत विकसित रहा और इसमें निरन्तर नवाचार होता रहा है।

Science-and-Technology

हमारे प्रधानमंत्री रहे लाल बहादुर शास्त्री ने नारा दिया- ‘जय जवान-जय किसान’। फिर 1998 में हमारे प्रधानमंत्री अटल बिहारी बाजपेयी ने इसमें विज्ञान जोड़ते हुए ‘जय जवान-जय किसान-जय विज्ञान’ का नारा दिया। अब, 2011 में आयोजित 100वें राष्ट्रीय विज्ञान कांग्रेस में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जी ने ‘जय जवान, जय किसान, जय विज्ञान, जय अनुसंधान’ का नारा स्थापित कर शोध के महत्व को प्रतिपादित किया। शोध यानी अनुसंधान आज की जरूरत है।

हमारे देश में अनुसंधान की बहुत सम्भावनाएं हैं लेकिन संसाधनों के अभाव में अनेक कार्य अधूरे रह जाते हैं। अन्य देशों के साथ मिलकर शोध करना हमारी मजबूरी है, इससे सारा श्रेय हमारे देश के वैज्ञानिकों को नहीं मिल पाता। हालांकि, मोदी जी ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय का बजट कुछ बढ़ाया है। इस मंत्रालय के अन्तर्गत विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी विभाग, जैव वैज्ञानिक विभाग एवं विज्ञान एवं औद्योगिक शोध परिषद् आता है। नयी खोजों पर अधिक ध्यान देने की आवश्यकता है।

शोध एवं विकास कार्यों को प्रोत्साहित करना हमारी प्राथमिकता होनी चाहिए। उच्च शिक्षा संस्थानों में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शोध पर अपेक्षा से बहुत कम काम हो रहा है। निजी संस्थानों को भी इस दिशा में अपना महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करना चाहिए। हमारे देश में व्यवसायिक विकास की सम्भावनाओं को बढ़ावा देने की जरूरत है। स्कूल और कॉलेज स्तर पर विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी शिक्षा को मजबूत आधार देने पर ही हम भविष्य में इस क्षेत्र में विश्व स्तर पर अपना स्थान बनाने में सक्षम हो सकेंगे ।

स्कूली बच्चों की राष्ट्रीय स्तर के कार्यक्रमों में भागीदारी जरूरी है। पुस्तकीय शिक्षा की जगह उन्हें व्यावहारिक ज्ञान देना चाहिए ताकि वे ची़जों को अच्छी तरह से समझ बूझकर बड़ा संकल्प ले सवेंâ। शिक्षकों को प्रौद्योगिकी प्रशिक्षण अनिवार्य रूप से दिया जाना चाहिए। विज्ञान प्रसार पर जोर देने की जरूरत है।

भारत सरकार ने विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के विकास के लिए कई योजनाएं चालू की हैं जिनमें प्रमुख हैं-1. राष्ट्रीय आविष्कार अभियान (2015), जो विज्ञान प्रशिक्षण से सम्बन्धित है। 2. जिज्ञासा (2017) जो छात्र वैज्ञानिकों को प्रोत्साहित करने के लिए है। 3. उच्चस्तरीय आविष्कार योजना (2016-17) जो उच्च शोध से सम्बन्धित है। 4. अवसर विज्ञान (2018) जो कि औद्योगिक शोध से सम्बन्धित लेखन को प्रोत्साहित करने के लिए है।

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भारतीय वैज्ञानिक निरन्तर नूतन शोध में लगे हैं। उपलब्धियां अनेक हैं इनमें से कुछ हैं- ‘हेपटाइटिस बी’ का टीका, दो दशक पूर्व से राष्ट्रीय टीकाकरण कार्यक्रम में शामिल हो गया। हमने ‘रोटावायरस वैक्सीन’ पर सफलता पायी। जलवायु परिवर्तन, जल विज्ञान, स्वच्छ ऊर्जा, सोलर ऊर्जा के क्षेत्र में विशेष अनुसंधान हो रहे हैं।

हमारी एक बड़ी उपलब्धि है, ‘इण्डियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइ़जेशन’ (इसरो) द्वारा मंगल ग्रह पर 2013 में भेजा गया मंगलयान उपग्रह, चन्द्रयान २००८ ने चन्द्रमा में अपना झंडा गाड़ा था। भारत में विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी पर शोध के तीन बड़ी अकादमियां हैं- 1. डॉ. मेघनाथ साहा द्वारा 1930 में प्रयाग में स्थापित ‘नेशनल एकेडमी ऑफ साइन्से़ज’ (नासी), 2. ‘इण्डियन एकेडमी ऑफ साइन्से़ज’ जिसकी स्थापना 1934 में प्रख्यात वैज्ञानिक सीवी रमन द्वारा बंग्लौर में हुई और ३. ‘इण्डियन नेशनल साइन्स एकेडमी’ नई दिल्ली जिसकी स्थापना 1935 में हुई यानी तीनों अकादमियां स्वतंत्रता से पूर्व में शुरू हो गई थीं।

विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी के क्षेत्र में नवाचार हमारी आर्थिक स्थिति को सुधारने में सहायक है। जैवतकनीकी के विकास ने भारतीय कृषि को बहुत लाभ पहुँचाया। चिकित्सा एवं कृषि के क्षेत्र में जैवप्रौद्योगिकी (बायोटैक्नोलॉजी) में अनुसंधान को विशेष प्रोत्साहन दिया जा रहा है। हमारे देश में चिकित्सा विज्ञान, कम्प्यूटर साइन्स, अंतरिक्ष विज्ञान, न्यूक्लियर साइन्स, सूचना प्रौद्योगिकी, जैवतकनीकी, निर्माण तकनीकी, ऑटोमोबाइल, इन्जीनियरिंग, जहाज निर्माण, अंतरिक्ष विज्ञान, रासायनिक इन्जीनियरिंग पर अनुसंधान कार्यान्वयन बहुत बड़े पैमाने पर हो रहा है।

हमारे वैज्ञानिकों को अपने अनुसंधान को जनोपयोगी बनाने की दिशा में विकसित करना चाहिए। विज्ञान को घर-घर तक पहुँचाना हमारा ध्येय होना चाहिए। हमारी खोज का लाभ जनसामान्य को तब मिलेगा, जब वह सर्वसुलभ और सर्वग्राह्य हो। स्थानीय समस्याओं को विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी द्वारा सुलझाने का प्रयास वैज्ञानिकों के दिशा-निर्देश पर सम्भव हो सकता है। विज्ञान एवं तकनीक का उपयोग मानवता के कल्याण हेतु किया जाना चाहिए।

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