संपादकीय लेख : जांच सीबीआई को

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उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने हाथरस में जो स्थितियां पैदा हुईं हैं, उसको लेकर अपने तेवर बहुत सख्त कर दिए हैं। उन्होंने हाथरस के बूलगढ़ी गांव की बिटिया के प्रकरण की जांच, शनिवार को सीबीआई को सौंपने का आदेश दे दिया। इसके पहले मुख्यमंत्री ने पूरे मामले की जांच एसआईटी को सौंपी थी। सीबीआई जांच की मांग बिटिया के परिवारीजन तीन दिन से कर रहे थे। परिवारीजन यह भी पूछ रहे हैं कि उनकी बिटिया को रात के अंधेरे में क्यों जला दिया गया। अब देखना है, इस सवाल के जवाब के लिए वह क्या निर्णय लेते हैं। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक का विपक्ष राज्य सरकार पर काफी हमलावर हुआ है। कई जगह धरना-प्रदर्शन हुए हैं। गांव की नाकेबंदी की गई थी, अंतत: शनिवार को सुबह मीडिया को वहां जाने की अनुमति मिली।

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दिन में प्रमुख सचिव गृह और डीजीपी खुद गांव गए और मीडिया के सामने परिवारीजनों से बातचीत की। शाम को राहुल-प्रियंका इस परिवार से मिलने में कामयाब रहे। इस मामले में प्रधानमंत्री मोदी भी मुख्यमंत्री से बात कर चुके हैं। दो दिन पहले हाथरस के एसपी से लेकर वहां के थानेदार तक को निलंबित किया जा चुका है। अब आइपीएस एसोशिएशन से लेकर मीडिया तक सरकार पूछ रहे हैं कि इसके लिए क्या जिलाधिकारी जिम्मेदार नहीं हैं। बहरहाल इस प्रकरण से राज्य सरकार की छवि को नुक्सान हुआ है। मुख्यमंत्री इसे हर हाल में सुधारना चाहते हैं, इसलिए परिवार को आर्थिक मदद देने के साथ ही सीबीआई जांच की मांग को स्वीकार कर लिया गया।

मुख्यमंत्री ने अपनी नाराजगी शनिवार को दिन में हुए एक कार्यक्रम को वर्चुअली संबोधित करते हुए दिखा दिए थे। उन्होंने कहा कि वह मानते हैं- पुलिस न्यायप्रणाली का महत्तपूर्ण अंग है। उन्होंने कहा- पुलिस को अपराध रोकना होता है, साथ ही दोषियों को दंड दिलाना, कानून व्यवस्था दुरुस्त रखना और आमजन की सुरक्षा प्रदान करना होता है। हमारी सरकार अन्तिम पीड़ित व्यक्ति को न्याय दिलाने के लिए संकल्पबद्ध है। उत्तर प्रदेश पुलिस ने हर परिस्थिति में दायित्वों का निर्वहन किया है, आगे भी करना होगा। बेहतर पुलिसिंग व्यवस्था के लिए राज्य सरकार ने गत साढ़े तीन वर्षों में 1.37 लाख अधिकारियों और पुलिस कर्मियों की तैनाती की है। मुख्यमंत्री इस बात के लिए पुलिस की तारीफ करते हैं कि कोरोना जैसी महामारी में यूपी पुलिस ने खुद को सरकार के एक मजबूत स्तम्भ की भूमिका निभाई है। मुख्यमंत्री यह भी मानते हैं कि मौजूदा दौर में अपराधों का स्वरूप बदला है, इसलिए पुलिस का प्रशिक्षण भी नवीनतम तकनीकी के सहारे होना चाहिए। मुख्यमंत्री पुलिस की कार्यप्रणाली से पूरी तरह वाकिफ हैं। समय-समय पर वह पुलिस के आला अफसरों को याद दिलाते रहते हैं कि उनके बल की सामाजिक और प्रशासनिक जिम्मेदारी क्या होती है। शनिवार को मुख्यमंत्री को एक बार फिर से इस अनुशासित बल को आगाह किया। उनका यह संबोधन दर्शाता है कि पिछले दिनों से उत्तर प्रदेश की जो कार्य प्रणाली सामने आई है, उससे वह व्यथित हैं। अपने शासनकाल में पुलिस और प्रशासन के कारण उन्हें पहली बार विपक्ष के निशाने में आना पड़ा है। वह ऐसा कभी नहीं होने देना चाहते, वह साफ-सुथरी सरकार के पक्षधर रहे हैं। उम्मीद की जानी चाहिए कि उनके तेवरों से पुलिस और प्रशासन के रवैये में सुधार आएगा। पुलिस और स्थानीय प्रशासन संवेदनहीन हो कर कार्य करता नजर आ रहा है।

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