दिग्गजों के ‘सुरक्षित‘ सीट से लड़ने से चुनावी मुकाबले रहते हैं फीके

दिग्गजों के अक्सर अपने गढ़ से यानी ‘सुरक्षित‘ सीट पर लड़ने के कारण चुनावी मुकाबले फीके होते हैं और यही पंजाब विधानसभा चुनावों में भी होने जा रहा है जहां फिलहाल एकमात्र अमृतसर सीट ही ऐसी है जहां शिरोमणि अकाली दल (शिअद) की तरफ से वरिष्ठ नेता बिक्रम सिंह मजीठिया को पंजाब कांग्रेस अध्यक्ष नवजोत सिंह सिद्धू के सामने उतारने से यहां चुनावी मुकाबला थोड़ा रोचक भी होगा और रोमांचक भी।
शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल ने कल यह घोषणा की हालांकि श्री सिद्धू या कांग्रेस की तरफ से अब तक कोई प्रतिक्रिया आई नहीं है पर यह श्री सिद्धू ही हैं जो नशा मामले में अपनी सरकार पर कार्रवाई करने के लिए दबाव डालते रहे और पिछले महीने श्री मजीठिया के खिलाफ एनडीपीएस अधिनियम के तहत मामला दर्ज किया गया। इस मामले में श्री मजीठिया को आज ही सुप्रीम कोर्ट से सोमवार तक राहत मिली है और अब संभावाना है कि वह इस दौरान अमृतसर पूर्व से पर्चा भरेंगे।
वैसे श्री मजीठिया अपनी परंपरागत और ‘सुरक्षित‘ सीट मजीठिया से भी चुनाव लड़ेंगे। जिसका मतलब है कि शिअद का दांव पर बहुत कुछ नहीं लगा लेकिन श्री सिद्धू व कांग्रेस को थोड़ी मुश्किल जरूर हो सकती है। यह भी एक और परंपरा ही है कि एक दिग्गज जब दूसरे दिग्गज के ‘घरेलु मैदान‘ पर टकराता है तो अक्सर वह साथ ही अपनी परंपरागत व ‘सुरक्षित‘ सीट पर भी चुनाव लड़ रहा होता है।
विभिन्न दलों के प्रत्याशियों की अब तक जारी सूचियों के अनुसार लगभग तमाम दिग्गज परंपरागत व सुरक्षित सीटों पर ही लड़ रहे हैं। इनमें प्रमुख नेताओं में मुख्यमंत्री चरणजीत सिंह चन्नी (चमकौर साहब), कांग्रेस प्रदेशाध्यक्ष (अमृतसर पूर्व), पूर्व मुख्यमंत्री कैप्टन अमरिंदर सिंह (पटियाला अर्बन), शिअद के संरक्षक व वयोवृद्ध नेता प्रकाश सिंह बादल (लंबी), शिअद अध्यक्ष सुखबीर सिंह बादल (जलालाबाद), और आम आदमी पार्टी (आप) के मुख्यमंत्री पद के प्रत्याशी भगवंत मान (धूरी, जो संगरूर संसदीय क्षेत्र में आता है) और भाजपा के मनोरंजन कालिया (जालंधर सेंट्रल) आदि शामिल हैं।
दिलचस्प यह भी है कि अक्सर दिग्गज दूसरे दिग्गजों को चुनौती अपने क्षेत्र में आकर लड़ने के लिए देते हैं। श्री मान के धूरी से चुनाव लड़ने पर शिअद नेता व पूर्व केंद्रीय मंत्री हरसिमरत कौर बादल ने कल ही श्री मान के धूरी से चुनाव लड़ने को ‘कायराना हरकत‘ बताते हुए उन्हें जलालाबाद से चुनाव लड़ने की चुनौती दी है, जहां से वह पिछलेे चुनाव में सुखबीर सिंह बादल से हार चुके हैं। यह सीट शिअद का गढ़ मानी जाती है।
पिछले विधानसभा चुनाव में जलालाबाद के अलावा शिअद का गढ़ मानी जाने वाली सीट लंबी पर सीनियर बादल व कैप्टन अमरिंदर सिंह में मुकाबला हुआ था, जिसमें कैप्टन की हार हुई थी। कैप्टन अपनी परंपरागत सीट पटियाला अर्बन सेे भी चुनाव लड़े थे, और जीते थे।

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