कागजों में किया विद्युतीकरण, बांस बल्ली के सहारे हो रही बिजली आपूर्ति

गोंडा। लकड़ी की बल्लियों पर फैले बिजली के तारों के इस मकड़जाल को देखिए! बिजली आपूर्ति के इस तरीके को देखकर आप हैरानी में पड़ जायेंगे और सड़े हुए लकड़ी के खंभों पर जमीन से लटकते बिजली के तार देख आपके रोंगटे खड़े हो जायेंगे। यह तस्वीरें हैं गोंडा जिले के मुजेहना ब्लाक के पूरेसिधारी गांव की जहां इसी तरह से बिजली आपूर्ति का जा रही है।

यह तस्वीर केंद्र सरकार की हर घर सहज बिजली योजना (सौभाग्य योजना) और पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना की हकीकत बताने के लिए काफी हैं जिसमें इन गांवों को बिजली योजना से आच्छादित किए जाने का दावा किया जा रहा है। ऐसा नहीं कि यहां का विद्युतीकरण नहीं किया गया। यहां का विद्युतीकरण भी हुआ है और इसकी गवाही के लिए यहां बोर्ड भी लगा हुआ है लेकिन कागजों पर लिखी गई रिपोर्ट और यहां की जमीनी सच्चाई दोनों बेहद अलग हैं।

बिजली आपूर्ति की यह खतरनाक तस्वीर जिले के मुजेहना ब्लाक के पूरेसिधारी गांव की है। इस ग्राम पंचायत में 6 छोटे छोटे गांव हैं। इन्ही गांवों मे से एक है माफीपुरवा गांव जहां आज भी बांस और लकड़ी के बल्लियों के सहारे बिजली की आपूर्ति की जा रही है। पूरे गांव में लकड़ी और बांस के खंभे लगाए गए हैं और इन्ही खंभों पर बेहिसाब तार दौड़ाए गए हैं। लकड़ी और बांस के ये खंभे बेहद जर्जर हालत में है और इनसे हमेशा खतरा बना रहता है। यहां रखा गया ट्राँसफार्मर अक्सर जल जाया करता है लेकिन बिजली विभाग के अफसर आपूर्ति के इस खतरनाक तरीके को देखने की जहमत नहीं उठाना चाहते। ग्रामीणों ने कई बार इस बदहाली और लापरवाही के खिलाफ आवाज उठाई लेकिन उनकी सुनवाई नहीं हुई।

वर्ष 2018 में प्रधानमंत्री हर घर सहज बिजली योजना (सौभाग्य योजना) और पंडित दीनदयाल उपाध्याय ग्राम ज्योति योजना के तहत इस ग्राम पंचायत का विद्युतीकरण किया जा चुका है। विद्युतीकरण के अंतर्गत हर गांव में बिजली के पोल और तार लगाए जा चुके हैं। इसकी गवाही के लिए बाकायदा गांव के बाहर बोर्ड भी लगाया गया है लेकिन यह पूरा काम आपको महज कागजों पर दिखाई देगा। जमीनी हकीकत कागजी रिपोर्ट से बिल्कुल उल्टी है। यहां आपको खंभे से नाम पर सिर्फ बांस व लकड़ी की बल्लियां दिखाई देंगी जिसपर बिजली की सप्लाई की जा रही है। लकड़ी के यह खंभे इतने जर्जर हैं कि तेज हवा और हल्की सी बारिश में भी यह टूटकर जमीन पर गिर जाते हैं और आए दिन इनसे हादसे का खतरा बना रहता है।

क्या कहते हैं ग्रामीण

माफीपुरवा गांव के लोगों का कहना है कि कई बाप इसकी शिकायत बिजली विभाग के अफसरों से की गई। क्षेत्रीय विधायक को भी इस समस्या से अवगत कराया गया लेकिन सभी ने इस समस्या को अनदेखा कर दिया है। गांव के सुनील सोनकर कहते हैं कि 8 साल पहले गांव का विद्युतीकरण हुआ था लेकिन गांव मे न तो खंभा गाडा गया और न ही कार लगाए गए। लकडी के खंभे लगाकर बिजली चालू कर दी गई। तब से यही व्यवस्था चल रही है। लकड़ी के खंभे इतने जर्जर हो चुके है कि उनसे अक्सर हादसे का डर बना रहता है।

गांव के ही राकेश कुमार बताते हैं कि 2 साल पहले सौभाग्य योजना के तहत उनकी ग्राम सभा की चयन हुआ था। तब लगा था कि उनके गांव मे भी बिजली के पोल लग जायेंगे लेकिन उनके गांव इससे अछूता रह गया। अब शिकायत करने पर कहीं सुनवाई नहीं हो रही है।

माफीपुरवा गांव के रहने वाले रंजीत पांडेय का कहना है कि कागजों में तो पूरी ग्राम पंचायत का विद्युतीकरण कर दिया गया लेकिन माफीपुरवा गांव इससे वंचित रह गया। यहीं लकड़ी के जर्जर खंभे पर लगाई गई केबिल अक्सर टूटकर गिर जाये करती है। ट्राँसफार्मर भी अक्सर जल जाता है। इसकी शिकायत लेकर बिजली विभाग के अफसरों के पास जाओ तो वह सुनवाई ही नहीं करते।

रामस्वरूप, अधीक्षण अभियंता, मध्यांचल विद्युत वितरण निगम लिमिटेड का कहना है कि सौभाग्य योजना का काम बिजली कंपनियां ठेकेदार के माध्यम से करवा रही हैं। हो सकता है कि यह गांव पहले फेज मे छूट गया हो या फिर इसका चयन अलग फेज मे हुआ हो। इसकी जांच कराई जाएगी और यहां पर बिजली के पोल व तार जल्द ही लगाए जायेंगे।

 

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