चिपको आंदोलन के प्रणेता और मशहूर पर्यावरणविद सुंदरलाल बहुगुणा का कोरोना से निधन

मशहूर पर्यावरणविद और चिपको आंदोलन के प्रणेता रहे सुंदर लाल बहुगुणा का निधन हो गया है। 94 वर्षीय बहुगुणा कोरोना संक्रमित पाए जाने के बाद ऋषिकेश एम्स में भर्ती कराए गए थे। वे डायबटीज के मरीज थे। कोविड आईसीयू वार्ड में भर्ती बहुगुणा को एनआरबीएम मास्क (नॉन रिब्रीथर मास्क) के जरिए आठ लीटर ऑक्सीजन सपोर्ट पर रखा गया था। लेकिन उन्हें बचाया नहीं जा सका।

पर्यावरणविद सुंदर लाल बहुगुणा के निधन पर देश के तमाम नेताओं ने शोक जताया है। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने ट्विटर पर लिखा, ‘सुंदरलाल बहुगुणा का निधन हमारे देश के लिए बहुत बड़ी क्षति है। उन्होंने प्रकृति के साथ सद्भाव में रहने के हमारे सदियों पुराने लोकाचार को प्रकट किया। उनकी सादगी और करुणा की भावना को कभी भुलाया नहीं जा सकेगा।’

उत्तराखंड के मुख्‍यमंत्री तीरथ सिंह रावत ने ट्विटर पर लिखा, ‘चिपको आंदोलन के प्रणेता, विश्व में वृक्षमित्र के नाम से प्रसिद्ध महान पर्यावरणविद् पद्म विभूषण श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी के निधन का अत्यंत पीड़ादायक समाचार मिला है। यह खबर सुनकर मन बेहद व्यथित है। यह सिर्फ उत्तराखंड के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण देश के लिए अपूरणीय क्षति है. पर्यावरण संरक्षण के क्षेत्र में दिए गए महत्वपूर्ण योगदान के लिए उन्हें 1986 में जमनालाल बजाज पुरस्कार और 2009 में पद्म विभूषण से सम्मानित किया गया था। पर्यावरण संरक्षण के मैदान में श्री सुंदरलाल बहुगुणा जी के कार्यों को इतिहास में सुनहरे अक्षरों में लिखा जाएगा।’

पर्यावरणविद् सुंदरलाल बहुगुणा ने 70 के दशक में पर्यावरण सुरक्षा को लेकर आंदोलन चलाया था। इनके आंदोलन से प्रेरणा लेकर मार्च 1774 में कुछ महिलाएं पेड़ों की कटाई के विरोध में पेड़ से चिपक कर खड़ी हो गई थीं। जिसे बाद में चिपको आंदोलन का नाम दिया गया।

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