रसोई गैस की मूल्य वृद्धि सरकार के अहंकार का प्रमाण : कांग्रेस

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देश में पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस की कीमतों में लगी आग से जनजीवन काफी प्रभावित हो रहा है। ऐसे में लगातार मूल्य वृद्धि के मुद्दे पर कांग्रेस ने केंद्र की मोदी सरकार को घेरा है। कांग्रेस का कहना है कि रसोई गैस सब्सिडी बंद करने से मोदी सरकार का गरीब व मध्यम वर्गीय विरोधी चेहरा सामने आ गया है। कीमतों में लगातार हो रही वृद्धि मोदी सरकार के अहंकार का जीता-जागता प्रमाण है। कांग्रेस ने मांग की है कि सब्सिडी वाली रसोई गैस की कीमत को तत्काल आधा कर केंद्र सरकार लोगों को राहत दे।

कांग्रेस के मुख्य प्रवक्ता रणदीप सिंह सुरजेवाला ने मंगलवार को पत्रकारों से बातचीत में कहा कि आम जनता के विरोध के बावजूद एक महीने से कम समय में सब्सिडी, गैर सब्सिडी और उज्जवला योजना वाले घरेलू गैस सिलेंडरों के दामों में 125 रुपये प्रति सिलेंडर की बढ़ोतरी हुई है। इसके अलावा, रसोई गैस सब्सिडी बंद करने के बाद सीएनजी-पीएनजी गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से मोदी सरकार का गरीब और मध्यम वर्गीय विरोधी चेहरा सामने आ गया है। उन्होंने कहा कि लोग कोरोना की मार से अभी पीड़ित हैं, अर्थव्यवस्था भी नकारात्मक है.. उसके बावजूद पेट्रोलियम पदार्थों के दाम में लगातार हो रही वृद्धि मोदी सरकार के अहंकार का जीता-जागता उदाहरण है।

महंगाई के मोर्चे पर केंद्र को घेरते हुए कांग्रेस नेता ने कहा कि पेट्रोल-डीजल और रसोई गैस के बाद सीएनजी में 70 पैसे प्रति किग्रा के इजाफे से परिवहन भाड़े मंहगे हो जाएंगे, जिससे महंगाई और बढ़ेगी। वहीं, पाइप के जरिए घरों में पहुंचने वाली पीएनजी गैस की कीमत में 91 पैसे की बढ़ोतरी से भी घरों का बजट बिगड़ेगा। उन्होंने कहा कि ईंधन में लगातार हो रही कमरतोड़ बढ़ोतरी से स्पष्ट है कि मोदी सरकार को लोगों की लगातार घटती आय और बढ़ती महंगाई से उत्पन्न होने वाली समस्याओं की चिंता नहीं है।

वहीं, सुरजेवाला ने पेट्रोल-डीजल और सब्सिडी वाले रसोई गैस सिलेंडर का मूल्य पूर्व की यूपीए सरकार के स्तर पर लाए जाने की भी मांग की। उन्होंने कहा कि पिछले 26 दिनों के भीतर इस जन विरोधी सरकार ने रसोई गैस के सिलेंडर में चार बढ़ोतरियों के जरिए 125 रुपये मूल्य बढ़ाए हैं। उन्होंने कहा कि वर्ष 2012-13 और 2013-14 में एलपीजी का अंतरराष्ट्रीय मूल्य 885.2 व 880.5 डॉलर था। बावजूद इसके यूपीए सरकार महंगे भाव में एलपीजी खरीदकर आम जनता को भारी सब्सिडी देती थी। तभी तो उस वक्त लोगों को एक सिलेंडर पर 399 से 414 रुपये देने पड़ते थे, जबकि वर्तमान में एक सिलेंडर के लिए लोगों को 819 रुपये खर्चने पड़ रहे हैं।

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