भारतीय मीडिया में हांसिये पर रहा किसान आंदोलन, विश्व मीडिया ने दी अहमियत

लखनऊ। भारतीय मीडिया खासतौर से इलेक्ट्रॉनिक मीडिया ने देशव्यापी किसान आंदोलन और विरोध रैली की कवरेज से से परहेज किया, लेकिन विश्व मीडिया में भारतीय किसानों के विरोध-प्रदर्शन को अहमियत दी गई। किसानों के मुद्दों से लोगों का ध्यान हटाने के लिए भी खासे इंतजाम मुकम्मल थे। चुनाव आयोग और एनसीबी ने इस बात का पूरा ख्याल रखा कि जनता का ध्यान किसानों के मुद्दे पर न जाए। शुक्रवार की शाम और रात में तमाम दर्शक किसानों के भारत बंद की खबरों के लिए चैनल बदलते रहे, लेकिन अधिकांश चैनलों पर ड्रग्स, बॉलीवुड और बिहार विधानसभा चुनाव ही छाया रहा। इससे ऊबे तमाम दर्शकों ने या तो टीवी बंद कर दी या फिर मनोरंजन के कार्यक्रम देखने लगे।

भारत के लगभग सभी सूबों और जिलों में कृषि अध्यादेशों के विरोध में किसानों ने धरना-प्रदर्शन और रैलियां की। किसानों के समर्थन में तमाम मजदूर संगठनों, बुनकरों, सियासी पार्टियों ने भी प्रदर्शन किये। पुलिस-प्रशासन ने कहीं-कहीं किसानों के साथ ज्यादतियां भी की। किसानो के जोश के आगे प्रशासन सकते में नजर आ रहा था। लेकिन भारतीय मीडिया को ये सब नहीं नजर आया।

किसानों के मुद्दों पर देश के लोगों का ध्यान हटा रहे इसके लिए भी खासे इंतजाम किये गए थे। चुनाव आयोग और एनसीबी ने इस बात का पूरा ख्याल रखा कि जनता का ध्यान किसानों के मुद्दे पर न जाए। इसके लिए चुनाव आयोग ने कल ही बिहार विधानसभा चुनाव की घोषणा की। एनसीबी ने भी इसी दिन अभनेत्री दीपिका पादुकोण को पूछताछ के लिए चुना ताकि मीडिया भी बाटी रहे।

भारत की इलेक्ट्रॉनिक को भले ही किसानों और मजदूरों का संघर्ष नहीं दिखा, लेकिन दुनिया इसे बड़ी ही संजीदगी से देख रही थी, लेकिन
मशहूर अमेरिकी अख़बार वॉशिंगटन पोस्टस, फोर्ब्स, फ्रांस 24 , न्यूज एजेंसी अलज़जीरा और पाकिस्तानी अखबार द डेली टाइम्स ने भारतीय किसानों द्वारा कृषि विधेयक के खिलाफ़ बुलाए गए ‘भारत बंद’ को प्रमुखता से जगह दी है।

 

 

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