भारत-चीन तनाव के बीच एलओसी पर पहुंचे नरवणे, अग्रिम चौकियां भी देखीं

नई दिल्ली। पूर्वी लद्दाख में चीन के साथ तनाव बढ़ने के बाद से पाकिस्तान की ओर से सीज फायर का उल्लंघन करने की घटनाएं बढ़ने से देश की पश्चिमी सीमा पर भी हालात ठीक नहीं हैं। इसीलिए भारतीय थलसेना के प्रमुख जनरल एमएम नरवणे गुरुवार को ​श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर के दौरे पर पहुंचे और ​राज्य में बलों और सुरक्षा स्थिति की परिचालन तैयारियों की समीक्षा की।

पाकिस्तान की ओर से सीजफायर का उल्लंघन किये जाने से 2014 के बाद से भारत के 75 सैनिक शहीद हुए हैं। इस साल 01 जनवरी से 07 सितम्बर के बीच जम्मू क्षेत्र में नियंत्रण रेखा पर 3,186 युद्धविराम उल्लंघन हुए हैं। 2020 में पाकिस्तान की ओर से संघर्ष विराम उल्लंघन का आंकड़ा आश्चर्यजनक है। पिछले 6 महीने से भी कम समय में 2000 से अधिक बार सीजफायर का उल्लंघन हुआ है। अगर पिछले वर्षों की तुलना की जाए तो 2018 में उतने उल्लंघन नहीं हुए।

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2019 में जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद 370 खत्म किये जाने के बाद संघर्ष विराम उल्लंघन के मामलों में बढ़ोतरी देखी गई थी। तब से लगातार सीमा पार से संघर्ष विराम उल्लंघन की घटनाओं में वृद्धि हुई है। इसके अलावा भारत-पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय बॉर्डर पर सीमा पार से गोलीबारी की 242 घटनाएं हुईं हैं। इसके अलावा इस साल 31 अगस्त तक जम्मू में भारत-पाकिस्तान बॉर्डर पर सीमा पार से गोलीबारी की 242 घटनाएं हुई हैं।

इस गोलीबारी की घटनाओं में 7 सितम्बर तक सेना के 8 सैनिक गंभीर रूप से और 2 जवान मामूली रूप से हताहत हुए हैं। जम्मू-कश्मीर में अंतरराष्ट्रीय सीमा और नियंत्रण रेखा पर बीएसएफ के भी 5 जवान हताहत हुए हैं। पाकिस्तान की सीमा पर 2015 में 04, 2016 में 07, 2017 में 23, 2018 में 19, 2019 में 13 और 2020 में 14 सितम्बर तक 09 जवान शहीद हो चुके हैं।

पाकिस्तान पिछले 15 दिनों से आतंकियों की घुसपैठ कराने के इरादे से संघर्ष विराम का उल्लंघन करके सीमावर्ती क्षेत्र के गांव मंजाकोट, बालाकोट, केरी क़स्बा, केरनी, उरी, मनकोट, शाहपुर, रामपुर, नौशेरा, खारी, करमरा, सुंदरबनी, गुलपुर, देगवार, कलाल, सावजैन आदि इलाकों को निशाना बनाकर मोर्टार शेल दाग रहा है। अब सीमा पार से न केवल छोटे हथियारों से बल्कि भारी हथियारों का भी इस्तेमाल किया जा रहा है।

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सेना प्रमुख जनरल मनोज मुकुंद नरवणे आज पाकिस्तान की सीमा पर सेना और सुरक्षा स्थिति की परिचालन तैयारियों की समीक्षा करने के लिए ​​श्रीनगर, जम्मू और कश्मीर पहुंचे। उन्होंने चिनार कार्प्स के सैन्य अधिकारियों के साथ राज्य में बलों और सुरक्षा स्थिति की परिचालन तैयारियों की समीक्षा की। इसके बाद नियंत्रण रेखा (एलओसी) की कई अग्रिम चौकियों का भी निरीक्षण किया।

सेना प्रमुख ने सेना के वरिष्ठ कमांडरों के साथ बैठक करके लद्दाख और जम्मू-कश्मीर के जमीनी हालातों के बारे में जानकारी ली और समीक्षा करके चौकस बने रहने के निर्देश दिए। उन्होंने व्यावसायिकता और कर्तव्य के प्रति समर्पण के उच्च मानकों के लिए सैनिकों की सराहना की। सेना प्रमुख ने जम्मू-कश्मीर के उपराज्यपाल मनोज सिन्हा के साथ भी बातचीत की।

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