गाजियाबाद पुलिस का हाल, पीएमओ से मिली शिकायत तब 6 महीने बाद दर्ज की एफआईआर

गाजियाबाद। सोशल मीडिया पर देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह की आपत्तिजनक फोटो डालने के मामले में आखिरकार गाजियाबाद की कविनगर पुलिस को दो लोगों के खिलाफ एफआईआई दर्ज करनी ही पड़ी। वह भी उस जिले की पुलिस ने जो राष्ट्रीय राजधानी से सटा हुआ है और यहां की पुलिस को अत्याधुनिक सुविधाओं से लैस माना जाता है।

गाजियाबाद

खासतौर पर साइबर क्राइम के लिए अलग से सेल गठित की गई है। इस मामले की शिकायत कई दिन पहले सोशल अवेयरनेस सोसाइटी के कानूनी सलाहकार व अधिवक्ता आकाश वशिष्ठ ने अप्रैल महीने में की थी। कविनगर थाने में की थी लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की। अब पीएमओ के दखल के बाद रिपोर्ट दर्ज हुई। इस संबंध में जिलाधिकारी डा. अजय शंकर पांडेय का कहना है कि उनकी जानकारी में यह प्रकरण नहीं है। मामला पुलिस से जुड़ा है इस लिए एसएसपी से इसकी जानकारी मांगी जा रही है।

शिकायतकर्ता आकाश वशिष्ठ ने सोमवार को बताया कि 8 अप्रैल 2020 को उन्होंने सुबह साढे 11 बजे अपना फेसबुक अकाउंट खोला तो उसमें एक पोस्ट देखी जिसमें देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी व गृहमंत्री अमित शाह की आपत्तिजनक तस्वीर पोस्ट की हुई थी जिन्हें जाकिर हुसैन आलम नामक व्यक्ति ने पोस्ट किया था। मैंने जाकिर हुसैन का प्रोफाइल सर्च किया तो उसमें प्रधानमंत्री व अमित शाह की घोर आपत्तिजनक तस्वीर व अन्य अनेक महिलाओं की भी अश्लील तस्वीरें प्रसारित कर रखी थीं। इतना ही नहीं अगले दिन यानि नौ अप्रैल की रात को उन्होंने देखा कि एक और शख्स सादिक अली खान रोहेला ने भी इन तस्वीरों को सोशल मीडिया पर प्रचारित व प्रसारित कर रखा है। इसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत कविनगर थाने में दी जिसमें उन्होंने आपत्तिजनक तस्वीरों की स्क्रीन शॉट भी दिए, लेकिन पुलिस ने कोई कार्रवाई नहीं की।

उनका कहना है कि वह इस संबंध में थानाध्यक्ष से लेकर पुलिस के अन्य उच्चाधिकारियों से शिकायत करते रहे लेकिन कुछ नहीं हुआ। उनका कहना है कि इस मामले में देश के प्रधानमंत्री व गृहमंत्री की गरिमा को बहुत क्षति पहुंची है। इसके बावजूद पुलिस ने इसे गंभीरता से नहीं लिया। इसके बाद उन्होंने इसकी शिकायत आपत्तिजनक तस्वीरों के स्क्रीन शॉट के साथ मेल से दो शिकायतें आठ व दस अप्रैल को पीएमओ में की जिसके बाद पीएमओं के संयुक्त सचिव ने यूपी के एडिशनल चीफ सेक्रेटरी को पत्र लिखा जिसमें प्रकरण की जानकारी दी गई और पूछा कि अभी तक इस मामले में क्या कार्रवाई की गई। एडिशनल चीफ सेक्रेटरी ने गाजियाबाद पुलिस को इस संबंध में लिखा। इसके बाद गाजियाबाद पुलिस सक्रिय हुई और तब जाकर इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई।

आकाश वशिष्ठ का कहना है कि दो लोगों के इस कृत्य से पूरे विश्व में देश के प्रधानमंत्री व गृहमंत्री की छवि धूमिल हुई है। लेकिन गाजियाबाद पुलिस ने इसे गंभीरता नहीं लिया। इतना ही नहीं गाजियाबाद के भाजपा से जुडे़ लोगों से भी उन्होंने शिकायत की थी लेकिन उन्होंने भी इसे गंभीरता से नहीं लिया। उन्होंने कहा कि इस मामले में लापरवाही बरतने वाले पुलिस अधिकारियों व भाजपा के नेताओं के खिलाफ भी कार्रवाई की जानी चाहिए। साथ ही इस मामले की विस्तृत जांच होनी चाहिए कि प्रधानमंत्री व गृहमंत्री की छवि विश्वस्तर पर धूमिल करने में कौन तत्व शामिल हैं। उसकी बैक ग्राउंड क्या है।

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