बढ़ते अपराध को देखते हुए पेरेंट्स को बेटों को अच्छी परवरिश देना होगा

Parrots

पत्रकार- अपर्णा शुक्ला

लखनऊ। कहा जाता है ऊपर वाला बेटी उसी को देता है जिसके पास जिगर होता है उसे पालने का बड़ा करने का पढ़ाने का और समाज की बुराईयों से बचाने का। लेकिन बेटियों के साथ हो रही घिनौनी घटनाएं हमें इस ओर भी सोचने पर मजबूर कर रही है कि काश हम बेटों को भी अच्छी परवरिश के साथ ही सामाजिक ज्ञान का बोध कराते तो शायद आज निर्भया या गुड़िया जैसे मामले हमें झकझोर नही करते। क्योंकि बेटियों को तो हम हर सामाजिक ज्ञान से रूबरू कराते हुए बड़ा करते है जबकि बेटों को खुली छूट देते हुए उनकी मर्जी पर छोड़ देते है।

जबकि हमें बेटों को अपराध से संबधित सजा से भी अवगत कराना चाहिए। क्योकि जोश में आकर या बुरी संगत में आकर किया हुआ सामूहिक दुराचार की सजा क्या है। उनके अंदर एक डर पैदा करना चाहिए जिससे लड़के लड़कियों पर बुरी नजर डालने से पहले हजार बार सोचे।

लड़कों को मालूम नही होती ये बात

हाईकार्ट अधिवक्ता मीनाक्षी सिंह बताती है कि बच्चों को छोटे से ही लड़कियों की इ्रज्जत करना सिखाना चाहिए। क्योकि कई बार ऐसा होता है कि लड़कों को ऐसे घिनौंने अपराध की सजा नही मालूम नही होती है। ऐसे केस में लड़कों को लगता है कि वो अपराध करके पुलिस को चकमा देकर बच जाएगें लेकिन क्राइम ब्रांच की आंखों में धूल जोंक पाना किसी की बस की बात नही। कम से कम अगर उन्हें बचपन से ही ये शिक्षा दी जाएगी तो ऐसे अपराध समाज में घटित ही नही होगे।

निर्भया केस के दो गुनाहगारों ने जेल में किया था सुसाइड

वहीं हाईकोर्ट अधिवक्ता विवेक कुमार ने बताया कि कई लोगों ने कहा निर्भया के दो गुनाहगार आत्मगिलानी के शिकार थे जिसके चलते निर्भया के दो गुनाहगारों ने जेल में ही आत्महत्या कर लिया। इसलिए जरूरी है कि लड़कियों को अब कलम के साथ अपने साथ औंजार रखना चाहिए ताकि अपनी सुरक्षा कर सकें। हाथरस में मंगलवार को फिर 6 साल की बच्ची के साथ रेप हुआ। जबकि पुलिस हाथरस में गुड़िया केस के बाद पुलिस का पहरा है।

बेटियों को बताए गुड टच और बेड टच

केजीएमयू के मनोरोग विशेषज्ञ डॉ पीके दलाल ने बताया कि कई बार हमने देखा है कि लड़की के रिस्तेदार या आस पड़ोस के लोग ही उसका शोषण करते है। ऐसे अपराध से न सिर्फ बच्ची के शरीर पर घाव पड़ते है बल्कि मानसिक तौर पर भी ऐसी घटना की गहरी छाप पड़ती है। डरवश बच्चियां अपने मां बाप से बातों को साझा नही करती। इसलिए बेटी से खुलकर बात करे और उसे गुड टच और बेड टच के बारें में जरूर बताए।

दोनों को बचपन से ही होगा सिखाना

मेरी नजर में बेटा और बेटी दोनों एक समान है। मा बाप कभी बच्चों के साथ भेदभाव नही करते। इन्हें बचपन से ही देना होगा सामाजिक ज्ञान।  – सोनल गडोक

बेटे को सिखाती हूं लड़कियों की इज्जत करना

मेरा बेटा नौ साल का है। और मैं अपने बेटे को अभी से लड़कियों की इज्जत करना सिखाती हूं साथ ही सामाजिक ज्ञान का बोध भी कराती हूं। – पूनम निगम

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