अगर आप भी करने जा रहे हैं मेहंदीपुर बालाजी के दर्शन, तो भूलकर भी न करें ये गलतियां

बजरंगबली अपने भक्‍तों के हर कष्‍ट को हर लेते हैं, इसी कारण उनको संकटमोचक भी कहा जाता है। देश के कई हिस्सों में बजरंगबली को बालाजी के नाम से भी जाना जाता है। लेकिन बालाजी का मुख्‍य रूप राजस्‍थान के तहसील (सिकराय) में विराजमान है। जिन्‍हें मेहंदीपुर बालाजी के नाम से जाना जाता है।

मेहंदीपुर बालाजी

मेहंदीपुर बालाजी धाम मुख्‍य रूप से निगेटिव एनर्जी और प्रेतबाधा जैसी समस्‍याओं से पीडि़त व्‍यक्तियों के इलाज के लिए प्रसिद्ध है। माना जाता है कि किसी भी तरह की निगेटिव एनर्जी से पीडि़त व्‍यक्ति यहां पर जल्‍दी ही ठीक हो जाता है। आइए आज आपको बताते हैं मेहंदीपुर बालाजी से जुड़ी कुछ खास बातें…

मेहंदीपुर बालाजी धाम के दर्शन करने जाने वाले किसी भी व्‍यक्ति को कुछ महत्‍वपूर्ण बातों की जानकारी जरूर होनी चाहिए। दरअसल यहां पर दर्शन करने से कम से कम एक हफ्ते पहले व्‍यक्ति को प्‍याज, लहसुन, मांस, अंडा और शराब आदि का सेवन बंद कर देना चाहिए। वहीं दर्शन के बाद करीब 40 दिन तक भी ऐसी सभी चीजों से परहेज करना भी बेहद जरूरी है। कहा जाता है कि जो व्‍यक्ति इस नियम का पालन करता है उसकी हर मनोकामना पूर्ण होती है।

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यहां पर बालाजी भगवान के सीने पर बाईं ओर एक छोटा छिद्र है, जिसमें से जल बहता रहता है। इस मंदिर में तीन देवता विराजमान है, जिसमें पहले बालाजी, दूसरे प्रेतराज और तीसरे भैरव बाबा हैं। इन सभी तीनों देवताओं को अलग-अलग तरह का प्रसाद चढ़ाया जाता है। जहां बालाजी महाराज को लड्डू का भोग लगता है, तो वहीं भैरव बाबा को उड़द का और प्रेतराज को चावल का भोग अर्पित किया जाता है।

माना जाता है कि बालाजी महाराज को चढ़ाए गए प्रसाद के दो लड्डू अगर किसी प्रेतबाधा से पीड़ित व्यक्ति को खिलाए जाते हैं तो उसके शरीर में स्थित प्रेत को भयानक कष्ट होता है और वह छटपटाने लगता है।

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यहां पर चढ़ाया जाने वाला प्रसाद यहीं पर खत्‍म करके जाया जाता है। इस प्रसाद को किसी भी व्‍यक्ति को घर ले जाने की अनुमति नहीं होती है। विशेष रूप से जो व्‍यक्ति प्रेतबाधा के इलाज के लिए यहां आते हैं उन्‍हें या उनके परिजनों को किसी भी तरह की कोई भी मीठी चीज या प्रसाद साथ लेकर जाने की अनुमति नहीं है।

शास्त्रों में इसका कारण बताया गया है कि किसी भी प्रकार की कोई सुगंधित वस्तु या मिठाई आदि निगेटिव एनर्जी को अपनी तरफ अधिक आकर्षित करती हैं। इस कारण इनके संबंध में समय और स्‍थान आदि का विशेष निर्देश दिया गया है।

इसके साथ ही यहां आने वाले हर व्‍यक्ति को ब्रह्मचर्य का पालन करना जरूरी होता है। कहा जाता है कि यहां आकर ऐसा कोई भी कार्य न करें जो धार्मिक मर्यादा के खिलाफ हो। आध्यात्मिक संस्कारों में पवित्रता, सात्विकता और मर्यादा का ध्यान रखना बेहद जरूरी है। जहां इन नियमों का पालन नहीं किया जाता है, वहां पूरा फल नहीं मिलता और अनिष्ट की आशंका भी बनी रहती है।

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