राज्यसभा में नहीं पास हुआ कृषि बिल तो सेलेक्ट कमेटी में भेज सकती है सरकार

नई दिल्ली। केंद्र की मोदी सरकार ने कृषि बिलों को उच्च सदन में पास कराने के लिए विपक्षी पार्टियों को भी पाले में लाने की कोशिश कर रही है। सूत्रों के मुताबिक सरकार की ओर से शिवसेना और एनसीपी के नेताओं से भी संपर्क साधा गया है। 245 सदस्यों वाली राज्य सभा में सरकार के पास बहुमत नहीं है, दो स्थान खाली हैं इसलिए बहुमत के लिए 122 सदस्यों का समर्थन आवश्यक है। यदि सरकार उच्च सदन में पर्याप्त संख्या बल जुटाने में नाकाम रही तो उसके पास कृषि बिलों को सेलेक्ट कमेटी में भेजने के अतिरिक्त और कोई रास्ता नहीं रहेगा।

इस समय राजयसभा में भाजपा के 86 सांसद हैं। राजग घटक दलों व अन्य छोटी पार्टियाँ मिला कर उसके पास कुल 105 का आंकड़ा है। इसमें अकाली दल के तीन सांसदों ने इन बिलों का विरोध करने का फैसला किया है। बहुमत के लिए कम पड़े 17 सांसदों के समर्थन के लिए भाजपा की नज़रें एआईएडीएमके, टीआरएस, वाईएसआरसी, और टीडीपी पर है। उच्च सदन में बीजद तथा एआईएडीएमके के नौ-नौ, टीआरएस के सात, वाईएसआर कांग्रेस के छह और टीडीपी के एक सांसद हैं। सरकार की रणनीति के मुताबिक़ कृषि विधेयकों के समर्थन में 130 से अधिक मत पड़ेंगे।

उच्च सदन में 40 सांसदों वाली कांग्रेस दूसरी बड़ी पार्टी है। कांग्रेस शुरू से ही कृषि बिलों के विरोध कर रही है। यूपीए के अन्य दलों के सांसदों और टीएमसी को मिला कर सदस्यों की संख्या 85 के आसपास है। इनमें से एनसीपी के चार और शिवसेना के तीन सांसदों से सरकार ने संपर्क किया है। हालांकि बात बन नहीं पाई है। इसके साथ ही राजग गठबंधन के घटक दल शिरोमणि अकाली दल के तीन सांसद बिल के विरोध में मत देंगे। इसी तरह आम आदमी पार्टी के तीन, समाजवादी पार्टी के आठ और बसपा के चार सांसद भी बिल के विरोध में मत देंगे इस तरह कुल सौ सदस्य कृषि बिल के विरोध में खुलकर हैं।

उल्लेखनीय है कि वतमान में राज्य सभा के 10 सांसद कोरोना पॉज़िटिव हैं। इसके अलावा विभिन्न पार्टियों के 15 सांसद इस सत्र में हिस्सा नहीं ले रहे हैं। ऐसे स्थिति में कृषि बिलों को पास कराने में सरकार को कोई विशेष परेशानी नहीं होगी। इन्हीं हालातो में विपक्ष कृषि बिलों को सेलेक्ट कमेटी में भेजने की मांग कर रहा है। जानकारों का कहना है की यदि सरकार उच्च सदन में पर्याप्त संख्या बल जुटाने में नाकाम रही तो उसके पास कृषि बिलों को सेलेक्ट कमेटी में भेजने के अतिरिक्त और कोई रास्ता नहीं रहेगा।

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