नौनिहालों की ख़ुशहाली के लिए बेसिक शिक्षा विभाग का ‘हैप्पीनेस कैरिकुलम’ प्रोग्राम

लखनऊ. बेसिक शिक्षा विभाग उत्तर प्रदेश द्वारा हैप्पीनेस पाठ्यक्रम की शुरुआत की जा रही है. इस पाठयक्रम का उदेश्य बच्चों में ख़ुशी की समझ विकसित करना है. आधुनिक दुनिया के तमाम देशों में ‘सोशल इमोशनल लर्निंग’ नाम से पाठ्यक्रम लाये जा रहे हैं. ऐसे समय में जब शिक्षित लोगों की तादाद लगातार बढ़ रही है लेकिन अवसाद, प्रकृति का शोषण, असहनशीलता व हिंसात्मक प्रवृत्ति कहीं ज़्यादा देखने को मिल रही है, तब शिक्षा विभाग की यह पहल कितनी असरदार साबित हो सकती है? जानिए शिक्षाविभाग के इस प्रोग्राम से जुड़ी तमाम जानकारी हैप्पीनेस कैरिकुलम के प्रभारी/ विशेषज्ञ डॉ सौरभ मालवीय से सुधांशु श्रीवास्तव की बातचीत में

सवाल. क्या है हैप्पीनेस कैरिकुलम?

जवाब. हैप्पीनेस कैरिकुलम का मतलब ख़ुशी, जैसे हम जानते हैं कि मनुष्य पढ़ लिखकर क्या करना चाहता है. जाहिर है हम पढ़ लिखकर ख़ुश रहना चाहतें हैं और जो हमसे जुड़े जो लोग हैं उन्हें ख़ुश रखने की कोशिश करना चाहते हैं. बच्चा जैसे-जैसे बड़ा होता है वैसे वैसे उसे सामाजिक दायित्व के प्रति समझ विकसित होती है तो उसकी ख़ुशी कम होने लगती है. जिससे एक किस्म की निराशा हाथ लगती है. जिस तरह गणित, हिंदी आदि अनिवार्य विषय है उसी तरह बच्चों के मन में खुशहाली का बीजारोपण करना हैप्पीनेस कैरिकुलम है. ताकि बचपन से ही ख़ुश होने का भाव जीवन भर बना रहे जिससे जीवन की किसी भी कठिन परिस्थिति में वह उससे मुकाबला कर के नयी चेतना के साथ फिर से जीवन जी सके.

सवाल. हैप्पीनेस कैरिकुलम के पाठ्यक्रम में क्या क्या रखा गया है?

जवाब. देखिये इतने बड़े प्रदेश में जहां 1.8 करोड़ विद्यार्थी (प्राइमरी/पूर्व माध्यमिक) और लगभग 7 लाख से अधिक शिक्षक हैं, वहां अनुभूति पाठ्यक्रम के निर्माण में प्रदेश की विभिन्नताओं को ध्यान में रखकर किया जा रहा है. इसके लिए कमेटी, कक्षा 1 से 5 और 6 से 8 तक के बच्चों के लिए पाठयक्रम बालमन और बच्चों के आईक्यू के हिसाब से तैयार कर रही है. बच्चों के मनोविज्ञान को समझते हुए यह पाठ्यक्रम जारी होगा. खेलकूद, कहानी, मेडिटेशन आदि हैप्पीनेस कैरिकुलम का हिस्सा होगा.

सवाल. ये एक तरह का नया पाठ्यक्रम है. क्या इसके लिए शिक्षकों को ट्रेनिंग भी दी जाएगी?

जवाब. बिलकुल, जैसा कि हमने बताया कि यूपी में बेसिक शिक्षा में सात लाख से अधिक शिक्षक कार्यरत हैं. इसलिए रिसोर्स की कोई कमी नही है. हमारे पास पहले से योग्य अध्यापक हैं. जहां तक सवाल हैप्पीनेस पाठ्यक्रम के शिक्षकों के प्रशिक्षण का है तो बिल्कुल उन्हें इस पाठ्यक्रम के लिए प्रशिक्षित किया जायेगा. कार्यशालाएं आयोजित की जायेंगी.

सवाल. क्या पूरे कार्यक्रम की रूपरेखा समझा सकते हैं कि कब और किस तरह से इसे इतने बड़े प्रदेश में

इसे लागू किया जायेगा?

जवाब. इसके लिए हैप्पीनेस कैरिकुलम के अस्सी सदस्यों की एक टीम है, योग्य शिक्षक हैं. जिनके द्वारा ही पूरा कार्यक्रम संचालित होगा. शुरुआत में प्रदेश के 15 जिलों में पायलेट प्रोजेक्ट के तौर पर लागू किया जायेगा. जिसमें वाराणसी, देवरिया, गोरखपुर, सिद्धार्थनगर, प्रयागराज, अमेठी, अयोध्या, लखनऊ, मुरादाबाद, मेरठ, गाज़ियाबाद, आगरा, मथुरा, झांसी और चित्रकूट है. शुरू में हमने एक जिले से सिर्फ़ दस स्कूलों को लिया है. इसी आधार पर कार्यकम की तैयारी चल रही है. उससे बाद धीरे-धीरे पूरे प्रदेश में लागू होगा. इसी हफ्ते प्रयागराज में एक कार्यशाला आयोजित हो रही है जिसमे चयनित शिक्षकों के साथ संवाद होगा. जहां पाठ्यक्रम के विभिन्ग आयामों पर चर्चा होगी.

सवाल. क्या हैप्पीनेस कैरिकुलम प्रोग्राम को भी इन्टरनेट के जरिये जोड़ा जायेगा? ख़ासकर लॉकडाउन

जैसे वक्त में?

जवाब. देखिये ये सरकार के दिशा-निर्देश पर निर्भर करेगा. हां हमें युगानुकूल ज़रूर होना चाहिए यानि हम संचार क्रांति के युग में जी रहे हैं तो इंटरनेट आज के समय की आवश्कता है. हम उससे दूर नही रह सकते. सरकारी विद्यालयों में स्मार्ट क्लासेज पर भी काम चल रहा है.

सवाल. नयी शिक्षा नीति में क्या हैप्पीनेस कैरिकुलम की कोई जगह है?

जवाब. कोठारी आयोग, नयी शिक्षा नीति द्वारा हैप्पीनेस कैरिकुलम आज की आवश्कता है. सीधे निर्देश है चाहे वो केंद्र सरकार हो या राज्य सरकार हो, कि इस तरह के पाठयक्रम को स्कूलों में शामिल किया जाए. दिल्ली, उतराखंड, छतीसगढ़, महराष्ट्र में भी अनुभूति पाठयक्रम को लागू किया गया है. अब तो झारखण्ड सरकार भी इसकी तैयारी में है. बल्कि पूरी दुनिया हैप्पीनेस की तरफ भाग रही है.

सवाल. हैप्पीनेस कैरिकुलम का वैज्ञानिक पक्ष क्या है?

जवाब. जिस दौर में हम पर्यावरण का शोषण कर रहे हैं जिससे ग्लोबल वार्मिंग जैसी विकट समस्या पैदा हो रही है. उस समय हैप्पीनेस का यह कार्यकम समाज में ज़रूर जागरूकता लायेगा.

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