हाथरस मामला : पीड़िता का परिवार छोड़ना चाहता है अपना गांव, दिल्‍ली जाने की मांग

हाथरस। उत्‍तर प्रदेश के हाथरस में कथित तौर पर सामूहिक दुष्कर्म का शिकार होने और पखवाड़े भर बाद इलाज के दौरान दम तोड़ देने वाली 19 वर्षीय दलित लड़की का परिवार अब उस बुलगड़ी गांव को छोड़कर जाना चाहता है, जो कई पीढ़ियों से उनका घर रहा है।

हाथरस

गांव में ऊंची जाति के लगभग 60 परिवार और चार दलित परिवार हैं। आरोपी ऊंची जातियों के हैं और उनका समुदाय उनके लिए समर्थन करता रहा है।

पीड़िता के बड़े भाई ने कहा कि पुलिस और मीडिया के चले जाने के बाद यहां रुकना असंभव होगा। अगर हम कहीं और चले गए तो यह हमारे लिए ठीक होगा।

उन्होंने कहा कि अगर मामला दिल्ली ट्रांसफर किया जाता है, जैसा कि उन्होंने अदालत में गुहार लगाई है, तो वे राष्ट्रीय राजधानी में शिफ्ट होना चाहेंगे। उन्होंने सरकार से उन्हें दूसरी जगह जाने में मदद करने का आग्रह किया।

उन्होंने कहा कि हम हाथरस से दूर जाकर फिर से शुरूआत करना चाहते हैं। परिवार ने 12 अक्टूबर को इलाहाबाद हाईकोर्ट के समक्ष उत्तर प्रदेश से दिल्ली शिफ्ट होने का अनुरोध किया था और हमें उम्मीद है कि हमारी याचिका स्वीकार कर ली जाएगी।

हालांकि, उनके घर पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया गया है, पीड़िता परिवार ने मिलने गए नेताओं से कहा है कि वे अपने गांव में सुरक्षित महसूस नहीं कर रहे और हर तरफ से दबाव डाला जा रहा है।

भीम आर्मी के प्रमुख चंद्र शेखर, जिन्होंने इस महीने की शुरूआत में परिवार का दौरा किया था, ने कहा कि मुझे उन्हें अपने घर में रखना होगा, अगर राज्य के अधिकारी उन्हें पर्याप्त सुरक्षा प्रदान करने में विफल रहते हैं।

आम आदमी पार्टी के सांसद संजय सिंह ने शनिवार को ट्वीट किया कि वह दिल्ली में परिवार को अपने साथ रखने के लिए तैयार हैं। उन्होंने कहा कि मैंने इस संबंध में पीड़िता के चाचा से बात की है।

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