गृह मंत्रालय का परामर्श : महिलाओं के साथ अपराधों में पुलिस कार्रवाई अनिवार्य करें राज्य

नई दिल्ली। देश में महिलाओं के साथ अपराध के बढ़ते मामले पर केंद्रीय गृह मंत्रालय चिंतित है। गृह मंत्रालय ने महिलाओं की सुरक्षा को लेकर सभी राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों को परामर्श जारी कर कहा है कि महिलाओं के साथ हो रहे अपराधों के मामलों में पुलिस कार्रवाई अनिवार्य कर दी जाए। मंत्रालय ने कहा है कि अगर महिला के साथ किसी तरह का अपराध थाने के अधिकार क्षेत्र के बाहर हुआ है तो भी उस स्थिति में ‘शून्य प्राथमिकी’ दर्ज की जाए जानी चाहिए।

उल्लेखनीय है कि इन दिनों उत्तर प्रदेश समेत कई राज्यों में महिलाओं के साथ अपराधों के मामले बढ़ते ही जा रहे हैं। यूपी के हाथरस प्रकरण को लेकर सियासत सरगर्म है। ऐसे में गृह मंत्रालय ने सभी राज्यों व केंद्रशासित प्रदेशों के मुख्य सचिवों को परामर्श जारी कर कहा कि नियमों का पालन नहीं करना न्याय दिलाने के लिहाज उचित नहीं होगा। गृह मंत्रालय ने कहा है कि थाने के स्टॉफकर्मी या किसी अधिकारी द्वारा महिला के साथ हुए अपराध मामले में प्राथमिकी दर्ज नहीं की जाने पर उनके खिलाफ कठोर कार्रवाई होनी चाहिए।

परामर्श में कहा गया है कि यौन शोषण के मामले में पीड़िता की सहमति से एक रजिस्टर्ड मेडिकल प्रैक्टिशनर 24 घंटे के अंदर मेडिकल जांच करेगा और फॉरेंसिक साइंस सर्विसेज डायरेक्ट्रेट ने यौन शोषण के मामले में फॉरेंसिक सबूत एकत्र करने और उसे स्टोर करने की जो गाइडलाइन बनाई है, उसका पालन होना चाहिए। संज्ञेय अपराध की स्थिति में प्राथमिकी दर्ज करना अनिवार्य है।

गृह मंत्रालय है कि बलात्कार के मामले में पूरी जांच दो महीने के अंदर पूरी हो जानी चाहिए और इसकी रिपोर्ट सरकार की ओर से बनाये गये पोर्टल पर अपलोड कर दिया जाना चाहिए। इस पोर्टल का नाम ‘इंवेस्टिगेशन ट्रेकिंग सिस्टम फॉर सेक्सुअल अफेंसेज (आईटीएसएसओ)’ है। मंत्रालय इस पोर्टल के जरिए हर मामले की निगरानी कर सकेगा।

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